सर्व पितृ अमावस्या का महत्व
हिंदू धर्म में पितृपक्ष का हर दिन महत्वपूर्ण है, लेकिन उसका अंतिम दिन सर्व पितृ अमावस्या सबसे खास माना जाता है। यह दिन उन सभी पितरों के लिए श्राद्ध करने का अवसर देता है, जिनकी तिथि ज्ञात न हो या जिनका श्राद्ध पूरे पितृपक्ष में किसी कारणवश न किया जा सका हो।
यह अवसर केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आभार और कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन भी है। माना जाता है कि पूर्वज प्रसन्न होकर परिवार पर सुख-समृद्धि की वर्षा करते हैं।
“पितृ पक्ष 2025 में किस दिन किसका श्राद्ध करना चाहिए, इसकी विस्तृत जानकारी के लिए हमारा लेख पितृ पक्ष 2025: किसका श्राद्ध किस दिन अवश्य पढ़ें।”
सर्व पितृ अमावस्या 2025: तिथि और समय
वर्ष 2025 में सर्व पितृ अमावस्या 10 सितंबर, बुधवार को मनाई जाएगी।
- अमावस्या तिथि आरंभ: 09 सितंबर 2025, रात 11:15 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त: 10 सितंबर 2025, रात 01:45 बजे
श्राद्ध और तर्पण के लिए मध्याह्न का समय (दोपहर 11:30 बजे से 1:00 बजे तक) सबसे शुभ माना गया है। इसी समय पूर्वजों को अर्पित किया गया तर्पण उन्हें तृप्त करता है और आशीर्वाद दिलाता है।
कैसे शुरू हुआ पूरा प्रचलन
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों को स्मरण कर श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। कहा जाता है कि जब महाभारत युद्ध के बाद अनेक आत्माएँ अशांत थीं, तब यमराज ने श्राद्ध कर्म का महत्व बताया।
मान्यता है कि श्राद्ध के बिना आत्मा को पूर्ण शांति नहीं मिलती। इसलिए सनातन धर्म में इसे संतति का कर्तव्य माना गया। इस परंपरा के जरिए परिवारजन अपनी भावनाओं और श्रद्धा को पितरों तक पहुँचाते हैं।
श्राद्ध और तर्पण विधि
सर्व पितृ अमावस्या पर श्राद्ध-विधि इस प्रकार होती है:
- स्नान और संकल्प – सुबह पवित्र स्नान कर पितरों के नाम का संकल्प लिया जाता है।
- पितृ आवाहन – तिल, कुश और जल अर्पित कर पितरों का स्मरण किया जाता है।
- तर्पण प्रक्रिया – दक्षिण की ओर मुख करके तिल, अक्षत और जल से तर्पण किया जाता है।
- भोजन और दान – ब्राह्मणों को भोजन कराकर अन्न, वस्त्र और दक्षिणा दान किया जाता है।
- पकवान और प्रसाद – खीर, पूरी और अन्य प्रिय व्यंजन बनाकर अर्पित किए जाते हैं।
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क्या करें और क्या न करें
✔ क्या करें
- व्रत और संयम का पालन करें।
- ब्राह्मण, गौ और गरीबों की सेवा करें।
- भोजन और दान श्रद्धा से करें।
✘ क्या न करें
- नशा, मांसाहार और असत्य से बचें।
- मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृहप्रवेश न करें।
- क्रोध और कलह से दूर रहें।
इन नियमों का पालन करने से श्राद्ध का पुण्य पूर्ण रूप से मिलता है।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण
ज्योतिष के अनुसार, अमावस्या का संबंध सूर्य और चंद्रमा से है। इन दोनों ग्रहों की युति के कारण यह दिन ऊर्जा और पितृ शांति का विशेष माध्यम बनता है।
- अमावस्या पर किया गया श्राद्ध पितृ दोष निवारण करता है।
- दान और जप ग्रहों के दोष कम करने में सहायक होते हैं।
- जिनकी कुंडली में पितृ दोष होता है, उन्हें विशेष रूप से इस दिन पूजा और तर्पण करना चाहिए।
सामाजिक और पारिवारिक महत्व
यह दिन परिवार को जोड़ने और संस्कारों को आगे बढ़ाने का अवसर है।
- परिवारजन एकत्र होकर पितरों का स्मरण करते हैं।
- समाज में सामूहिक भोज और सेवा कार्य होते हैं।
- यह परंपरा बड़ों के प्रति सम्मान और बच्चों में संस्कार जगाने का जरिया है।
दान और पुण्य का महत्व
श्राद्ध के साथ दान का भी महत्व है।
- अन्नदान – भूखों को भोजन देना।
- वस्त्रदान – जरूरतमंदों को कपड़े देना।
- गोदान – परंपरा में अत्यंत पुण्यकारी माना गया।
- जल और तिल दान – पितरों की तृप्ति के लिए आवश्यक।
दान को केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि मानवता का कर्तव्य भी माना जाता है।
सर्व पितृ अमावस्या और आज का समाज
आधुनिक समय में लोग व्यस्तता के बावजूद परंपराओं को निभाने का प्रयास करते हैं। आज कई लोग ऑनलाइन माध्यम से भी श्राद्ध और पूजा करवाते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि समय बदला है, पर आस्था अटल है।
नई पीढ़ी को इन परंपराओं से जोड़ना बेहद आवश्यक है ताकि वे समझें कि पितरों का आशीर्वाद जीवन में सुख-समृद्धि और संतुलन लाता है।
निष्कर्ष
सर्व पितृ अमावस्या 2025 पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करने का दिन है। इस अवसर पर किया गया तर्पण और दान पितरों को संतुष्ट करता है और परिवार को आशीर्वाद दिलाता है।
👉 आप इस परंपरा के बारे में क्या सोचते हैं? क्या आपने अपने परिवार में श्राद्ध या तर्पण किया है? अपने विचार हमें कमेंट सेक्शन में ज़रूर बताइए।




















