UGC Act 2026 का आधिकारिक नाम और कानूनी आधार
सबसे पहले स्पष्ट कर दें – UGC Act 2026 कोई नया संसदीय कानून नहीं है। यह UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 है, जो UGC Act, 1956 की धारा 26 के तहत बनाया गया है। ये नियम 13 जनवरी 2026 को गजट ऑफ इंडिया में प्रकाशित हुए और तुरंत प्रभावी हो गए।
ये नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर आधारित हैं। रोहित वेमुला (2016) और पायल तड़वी (2019) जैसे दुखद मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने UGC को 2012 के नियमों को मजबूत करने का आदेश दिया था। 2025 में ड्राफ्ट जारी किया गया, जिसमें OBC को शामिल नहीं किया गया था, लेकिन विरोध के बाद अंतिम संस्करण में OBC को भी शामिल कर लिया गया।
मुख्य उद्देश्य:
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उच्च शिक्षा में जाति आधारित भेदभाव (caste-based discrimination) को रोकना।
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SC, ST, OBC, PwD, महिलाओं और EWS को सुरक्षा प्रदान करना।
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समावेशी (inclusive) कैंपस बनाना।
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NEP 2020 के समानता वाले लक्ष्यों को लागू करना।
ये नियम सभी UGC मान्यता प्राप्त संस्थानों – सेंट्रल, स्टेट, डीम्ड, प्राइवेट यूनिवर्सिटी, कॉलेज – पर लागू होते हैं। छात्र, फैकल्टी, स्टाफ सभी कवर होते हैं।

2012 नियमों से UGC Act 2026 में क्या बड़े बदलाव आए?
2012 के नियम सलाहकारी (advisory) थे – कोई सख्त दंड नहीं। 2026 के नियम बाध्यकारी (mandatory) और कानूनी रूप से enforceable हैं। मुख्य बदलाव:
पैरामीटर |
2012 नियम |
2026 नियम (UGC Act 2026) |
|---|---|---|
लागू होना |
सलाहकारी |
कानूनी रूप से बाध्यकारी |
OBC शामिल |
नहीं |
हाँ (अंतिम संस्करण में जोड़ा गया) |
समयबद्ध कार्रवाई |
नहीं |
24 घंटे में प्रारंभिक जांच, 15 दिन में रिपोर्ट |
दंड |
सीमित |
UGC स्कीम से बाहर, डिग्री रोकना, मान्यता रद्द |
कमेटी संरचना |
बेसिक |
SC/ST/OBC/PwD/महिलाओं का अनिवार्य प्रतिनिधित्व |
रिपोर्टिंग |
वैकल्पिक |
बाय-एनुअल + एनुअल रिपोर्ट UGC को |
नेशनल मॉनिटरिंग |
नहीं |
UGC नेशनल कमेटी + ओम्बड्सपर्सन |

ये बदलाव UGC को ज्यादा ताकत देते हैं, लेकिन यही कारण है कि विवाद भी बढ़ा है।
UGC Act 2026 के मुख्य प्रावधान: विस्तार से समझें
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Equal Opportunity Centre (EOC) का अनिवार्य गठन हर HEI में EOC बनाना जरूरी। EOC का काम:
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समानता नीतियां लागू करना
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SC/ST/OBC/PwD/महिलाओं को अकादमिक, फाइनेंशियल, सोशल गाइडेंस
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भेदभाव शिकायतें हैंडल करना
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सिविल सोसाइटी, पुलिस, लीगल सर्विसेज से कोऑर्डिनेशन EOC कोऑर्डिनेटर – सीनियर प्रोफेसर या फैकल्टी मेंबर। अगर EOC नहीं बना तो UGC सीधे कार्रवाई कर सकता है।
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Equity Committee का गठन और संरचना EOC के अंदर इक्विटी कमेटी। संरचना:
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संस्थान प्रमुख (चेयरपर्सन)
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3 सीनियर फैकल्टी/प्रोफेसर
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1 नॉन-टीचिंग स्टाफ
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2 सिविल सोसाइटी प्रतिनिधि
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SC/ST/OBC/PwD/महिलाओं का अनिवार्य प्रतिनिधित्व
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छात्र प्रतिनिधि (स्पेशल इनवाइट) कमेटी साल में कम से कम 2 बार मिलेगी। कार्यकाल 2 वर्ष (छात्रों का 1 वर्ष)।
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भेदभाव की परिभाषा “Caste-based discrimination” का मतलब SC/ST/OBC के खिलाफ भेदभाव। इसमें डायरेक्ट (सीधा अपमान) और इंडायरेक्ट (नीतियां जो प्रभावित करें) दोनों शामिल। अन्य आधार: धर्म, लिंग, विकलांगता, जन्म स्थान।
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शिकायत प्रक्रिया
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ऑनलाइन पोर्टल, ईमेल, लिखित, हेल्पलाइन (24/7)
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गोपनीयता का विकल्प
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अगर क्रिमिनल केस तो पुलिस को सूचना
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24 घंटे में कमेटी बैठक + प्रारंभिक एक्शन
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15 कार्य दिवस में विस्तृत जांच रिपोर्ट
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संस्थान प्रमुख 7 दिनों में फैसला
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अपील के लिए ओम्बड्सपर्सन
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दंड और जवाबदेही
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संस्थान प्रमुख व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार
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अनुपालन न करने पर: UGC स्कीम्स से बाहर, प्रोग्राम अप्रूवल रोकना, डिग्री/ऑनलाइन मोड रोकना, UGC लिस्ट से हटाना
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बाय-एनुअल रिपोर्ट और एनुअल रिपोर्ट UGC को
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नेशनल लेवल ओवरसाइट UGC नेशनल मॉनिटरिंग कमेटी बनेगी, जिसमें प्रोफेशनल काउंसिल, कमीशन्स, सिविल सोसाइटी शामिल। रैंडम इंस्पेक्शन और रिपोर्ट चेक।
UGC Act 2026 के फायदे: मार्जिनलाइज्ड ग्रुप्स के लिए राहत
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सुरक्षा और विश्वास: SC/ST/OBC छात्रों को भेदभाव से बचाव। ड्रॉपआउट रेट कम होने की उम्मीद।
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समावेशी माहौल: कैंपस में बेहतर इंटरैक्शन, मेंटरिंग, स्कॉलरशिप गाइडेंस।
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तेज न्याय: समयबद्ध प्रक्रिया से शिकायतों पर जल्द कार्रवाई।
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संस्थागत जवाबदेही: अब कॉलेज/यूनिवर्सिटी भेदभाव को इग्नोर नहीं कर सकतीं।
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राष्ट्रीय स्तर पर मॉनिटरिंग: पारदर्शिता बढ़ेगी, डेटा UGC के पास आएगा।
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NEP 2020 से जुड़ाव: समानता और इंक्लूजन पर फोकस।
UGC के अनुसार, 2019-20 से 2023-24 तक जाति आधारित शिकायतें 100% से ज्यादा बढ़ी हैं। ये नियम ऐसे मामलों को रोकने में मदद करेंगे।
UGC Act 2026 पर विवाद: सामान्य वर्ग क्यों नाराज?
UGC Act 2026 के विरोध के मुख्य कारण:
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एकतरफा सुरक्षा का आरोप भेदभाव की परिभाषा सिर्फ SC/ST/OBC के खिलाफ। सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के खिलाफ भेदभाव पर कोई प्रावधान नहीं। कई लोग कहते हैं – “जनरल स्टूडेंट्स को क्रिमिनल मान लिया गया”।
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फॉल्स कम्प्लेंट्स का डर ड्राफ्ट में फॉल्स शिकायत पर पेनल्टी थी, लेकिन अंतिम नियमों में हटा दी गई। इससे दुरुपयोग का खतरा। पर्सनल दुश्मनी, ग्रेजुएशन, प्रोफेसर-स्टूडेंट झगड़े में गलत इस्तेमाल हो सकता है।
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Equity Committee में बैलेंस की कमी कमेटी में SC/ST/OBC/PwD/महिलाओं का अनिवार्य प्रतिनिधित्व, लेकिन जनरल कैटेगरी का कोई जिक्र नहीं। इससे “स्टैक्ड कमेटी” का आरोप।
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वाग परिभाषाएं “Discrimination” की ब्रॉड डेफिनिशन से अनिश्चितता। क्या कोई सामान्य कमेंट discrimination माना जाएगा?
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संस्थानों पर बोझ छोटे कॉलेजों में संसाधन नहीं। EOC, कमेटी, रिपोर्टिंग, हेल्पलाइन – ये सब महंगे और जटिल।
विरोध के रूप: प्रदर्शन, इस्तीफे, PIL
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प्रदर्शन: दिल्ली UGC HQ के बाहर छात्र प्रदर्शन। UP, बिहार, राजस्थान में सवर्ण संगठन (कर्णी सेना, ब्राह्मण महासभा) सड़कों पर।
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इस्तीफे: बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दिया, BJP युवा मोर्चा Noida VP राजू पंडित ने त्यागपत्र। लखनऊ में दर्जनों BJP सदस्यों ने इस्तीफे।
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राजनीतिक: यूपी BJP MLC देवेंद्र प्रताप सिंह ने UGC को लेटर लिखा। बिहार में MoS होम नित्यानंद राय ने सवालों से बचने की कोशिश की।
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सोशल मीडिया: #ShameonUGC ट्रेंड। Anand Ranganathan जैसे लोगों ने पोस्ट किए।
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PIL: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल, नियमों की संवैधानिकता पर सवाल।
कुछ संगठन “Savarna Samaj Samanvay Samiti” बना रहे हैं।
सरकार और UGC की प्रतिक्रिया
सरकार का कहना है – नियमों का दुरुपयोग नहीं होगा। “फैक्ट्स प्रेजेंट” किए जाएंगे ताकि मिसइनफॉर्मेशन रुके। UGC का दावा – ये नियम सिर्फ सुरक्षा के लिए हैं, न कि किसी वर्ग के खिलाफ।
UGC Act 2026 का भविष्य: क्या होगा आगे?
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संभावना 1: सरकार संशोधन करेगी – फॉल्स कम्प्लेंट पेनल्टी जोड़ेगी, बैलेंस्ड कमेटी बनाएगी।
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संभावना 2: सुप्रीम कोर्ट स्टे दे या रिव्यू करे।
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संभावना 3: विरोध कमजोर पड़ेगा, नियम लागू हो जाएंगे।
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लंबे समय में: अगर सही इंप्लीमेंट हुए तो कैंपस सुरक्षित होंगे। अगर दुरुपयोग हुआ तो और तनाव बढ़ेगा।



















