Ali Larijani कौन थे? विस्तृत जीवनी और बैकग्राउंड
Ali Larijani का पूरा नाम अली लारीजानी है। वे 67 साल के थे और ईरान की राजनीति के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली चेहरों में से एक थे। उनका परिवार धार्मिक और राजनीतिक रूप से बहुत मजबूत रहा है। उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में कमांडर के रूप में करियर शुरू किया। बाद में वे ईरान की संसद के स्पीकर बने और 12 साल तक इस पद पर रहे।
2005 से 2007 तक वे सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी रहे और फिर 2025 में दोबारा इस पद पर वापस लौटे। Ali Larijani को “खामेनी का सबसे भरोसेमंद सलाहकार” कहा जाता था। खामेनी की मौत के बाद वे ईरान के डी-फैक्ट रूलर बन गए थे। वे न्यूक्लियर नेगोशिएटर भी रह चुके थे और चीन के साथ 25 साल के स्ट्रेटेजिक एग्रीमेंट को फाइनल करने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
Ali Larijani को प्रगतिशील कंजरवेटिव कहा जाता है – न तो पूरी तरह हार्डलाइनर और न ही लिबरल। वे हमेशा ईरान की संप्रभुता और इस्लामिक रिवोल्यूशन की रक्षा के लिए तैयार रहते थे। खामेनी की मौत के बाद उन्होंने कहा था, “अमेरिकियों ने ईरानी लोगों के दिल पर छुरा घोंपा है, हम उनके दिल पर छुरा घोंपेंगे।” यह बयान पूरे ईरान में वायरल हो गया था।
उनकी मौत की खबर सुनकर कई ईरानी नागरिक सदमे में हैं। Ali Larijani न सिर्फ सिक्योरिटी चीफ थे, बल्कि देश की अंतरिम लीडरशिप काउंसिल के मुख्य स्तंभ थे। उनकी गैरमौजूदगी में ईरान का सिस्टम कितना मजबूत रहेगा, यह बड़ा सवाल है।
2026 का ईरान-इजराइल युद्ध: कैसे शुरू हुआ सब कुछ?
मार्च 2026 की शुरुआत में ही अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हमले शुरू कर दिए। सबसे पहले सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनी की मौत हो गई। यह युद्ध का पहला बड़ा झटका था। उसके बाद Basij फोर्स के हेड गोलामरेजा सोलैमानी और कई अन्य कमांडर टारगेट किए गए।
Ali Larijani ने इस पूरे समय में ईरान को संभाला। उन्होंने मुस्लिम देशों को खुला पत्र लिखा और कहा, “क्या यह इस्लाम है कि तुम ईरान की मदद नहीं कर रहे?” उन्होंने अमेरिका और इजराइल को “दुष्ट शक्तियां” बताया। Quds Day रैली में आखिरी बार वे सार्वजनिक रूप से दिखे थे।
फिर 17 मार्च की रात को इजराइल ने तेहरान के पास प्रिसीजन स्ट्राइक की। इजराइल के डिफेंस मिनिस्टर इजराइल काट्ज ने घोषणा की – “हमने Ali Larijani को मार गिराया है।” नेत्तन्याहू ने तो यहां तक कह दिया कि “वे रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के बॉस थे, जो गैंगस्टरों का गिरोह चलाते थे।”
ईरान ने शुरू में चुप्पी साध रखी थी। लेकिन कुछ घंटों बाद सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने आधिकारिक बयान जारी किया: “आजीवन संघर्ष के बाद Ali Larijani शहादत की मंजिल तक पहुंच गए।” यह पुष्टि थी कि Ali Larijani की मौत हो चुकी है।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई भी शुरू कर दी – स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया, गल्फ देशों पर हमले किए और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।
ईरान की प्रतिक्रिया और शहादत का जश्न
ईरान ने Ali Larijani को “शहीद” घोषित किया। उनके नाम का एक हैंडरिटन लेटर जारी किया गया जिसमें उन्होंने लिखा था – “ब्रेव मेंबर्स की शहादत हमें और मजबूत बनाएगी।” ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब पहले जैसा नहीं रहेगा।
ईरान ने मुस्लिम दुनिया से एकजुटता की अपील की। Ali Larijani की मौत के बाद ईरान ने IRGC को और एक्टिव किया और “Larijani Revenge Operation” नाम से मिसाइल हमले शुरू किए। यह सब कुछ ईरान को एकजुट रखने की कोशिश है।
दुनिया भर में रिएक्शन: टर्की के विदेश मंत्री ने इसे “अवैध हत्या” बताया। अमेरिका ने चुप्पी साधी लेकिन ट्रंप ने NATO की आलोचना की।
Ali Larijani और भारत: कूटनीतिक संबंध और क्यों ट्रेंडिंग in India?
Ali Larijani का भारत से पुराना रिश्ता रहा है। जनवरी 2026 में वे भारत आए थे और डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर पवन कपूर से मुलाकात की थी। उस समय उन्होंने भारत-ईरान रिलेशंस को मजबूत बनाने की बात की थी। चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट में भारत की बड़ी दिलचस्पी है और Ali Larijani ने इसे आगे बढ़ाने का वादा किया था।
अब उनकी मौत की खबर भारत में क्यों ट्रेंड कर रही है? क्योंकि:
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भारत 80% तेल मिडिल ईस्ट से आयात करता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
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ईरान के साथ भारत की स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप है। Ali Larijani की मौत से ईरान अस्थिर हुआ तो भारत की कूटनीति प्रभावित होगी।



















