Nimsdai । ये नाम सुनते ही पर्वतारोहण की दुनिया में एक अलग ही ऊर्जा का एहसास होता है। निर्मल पुर्जा, जिन्हें दुनिया निमस्दाई या निम्स डाई के नाम से जानती है, वो इंसान हैं जिन्होंने असंभव को संभव बनाया। 14 आठ हजार मीटर से ऊंची चोटियों को महज छह महीने और छह दिनों में फतह करने वाले इस नेपाली मूल के ब्रिटिश पूर्व स्पेशल फोर्सेज जवान की कहानी ने लाखों लोगों को प्रेरित किया। नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री “14 Peaks: Nothing is Impossible” ने उन्हें वैश्विक सितारा बना दिया। लेकिन 30 जुलाई 2026 को पाकिस्तान के ब्रॉड पीक पर हुई एक भयानक हिमस्खलन ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। निमस्दाई समेत 10 पर्वतारोही लापता हो गए।
आज 1 अगस्त 2026 तक की स्थिति ये है कि कुछ शव बरामद हो चुके हैं, खोज-बचाव अभियान जारी है और निमस्दाई की सुरक्षा के लिए पूरी पर्वतारोहण बिरादरी प्रार्थना कर रही है।
ब्रॉड पीक पर क्या हुआ? घटना का पूरा ब्योरा
ब्रॉड पीक दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी है। यह पाकिस्तान के कराकोरम रेंज में स्थित है, ऊंचाई लगभग 8,047 से 8,051 मीटर। 30 जुलाई 2026 को दोपहर के आसपास (स्थानीय समय के अनुसार लगभग दोपहर या सुबह 9-10 बजे के आसपास) एक शक्तिशाली एवलांच (हिमस्खलन) ने चढ़ाई करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय दल को जकड़ लिया।
इस दल का नेतृत्व निमस्दाई कर रहे थे। दल में कुल 10 सदस्य थे। इनमें पांच या छह नेपाली पर्वतारोही (खुद निमस्दाई सहित), एक पाकिस्तानी (सोहेल सखी), एक ओमानी महिला (नधीरा अल हर्थी), एक अमेरिकी (मॉलरी गीस) और एक चीनी पर्वतारोही (वांग झोंग) शामिल थे। कुछ रिपोर्ट्स में ब्रिटिश नागरिकों का भी जिक्र आया, लेकिन मुख्य सूची यही रही।
एवलांच के बाद दल से संपर्क पूरी तरह टूट गया। पाकिस्तान के अल्पाइन क्लब ने पुष्टि की कि टीम बेस कैंप से संवादहीन हो गई। निमस्दाई का जीपीएस ट्रैकर शुरू में तेज गिरावट दिखा रहा था—लगभग 800 मीटर नीचे—जो एवलांच के प्रभाव को दर्शाता है। कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया कि ट्रैकर बाद में भी हल्की हलचल दिखा रहा था, जिससे थोड़ी उम्मीद बंधी। लेकिन बैटरी कम होने और कठिन मौसम के कारण डेटा अधूरा रह गया।
31 जुलाई तक खोज टीमें पहुंचीं। हेलीकॉप्टर और ग्राउंड रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुए। कुछ शव बरामद हुए। अलग-अलग रिपोर्ट्स में संख्या 3 से 4 बताई गई। पहचाने गए नामों में नेपाली पर्वतारोही पुर बहादुर गुरुंग (युक्ता), ओमानी नधीरा अल हर्थी और अमेरिकी मॉलरी गीस शामिल हैं। अन्य शवों की पहचान प्रक्रियाधीन रही। निमस्दाई समेत बाकी सदस्य अभी भी लापता हैं।
मौसम ने बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया। खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर उड़ानें प्रभावित हुईं। 1 अगस्त को नेपाल से सांसद और एलिट एक्सपेड के सह-संस्थापक मिंगमा डेविड शेरपा के नेतृत्व में एक अनुभवी बचाव दल पाकिस्तान पहुंचा। यूके से भी सपोर्ट टीम आने की खबर है। पूरी दुनिया की नजरें इस अभियान पर टिकी हैं।
Nimsdai कौन हैं? उनकी अद्भुत यात्रा
निर्मल पुर्जा का जन्म नेपाल में हुआ। उन्होंने ब्रिटिश आर्मी के गोरखा ब्रिगेड में सेवा की, फिर एसबीएस (स्पेशल बोट सर्विस) में शामिल होने वाले पहले गोरखा बने। 16 साल की सैन्य सेवा के बाद उन्होंने पर्वतारोहण को अपना मिशन बनाया।
2019 में उन्होंने “प्रोजेक्ट पॉसिबल” के तहत दुनिया की सभी 14 आठ हजार मीटर से ऊंची चोटियों को रिकॉर्ड समय में फतह किया। बिना ऑक्सीजन के कई चढ़ाई, K2 की पहली शीतकालीन चढ़ाई (बिना ऑक्सीजन), पाकिस्तान की पांचों 8000 मीटर चोटियों का तेज रिकॉर्ड—ये सब उनके नाम हैं। जुलाई 2026 तक उनके पास 57 आठ हजार मीटर समिट का रिकॉर्ड था, जिसमें कई बिना ऑक्सीजन के।
वे एलिट एक्सपेड के संस्थापक हैं, निमस्दाई स्टोर के जरिए गियर डिजाइन करते हैं और निमस्दाई फाउंडेशन के माध्यम से नेपाल के शेरपा, पोर्टर, बच्चों की शिक्षा और आपदा राहत में काम करते हैं। उनका मंत्र हमेशा रहा—“Impossible is Possible”।
इस सीजन में उन्होंने पहले गैशरब्रम II (G2) फतह की। 21 जुलाई 2026 को यह उनकी 57वीं समिट बनी। वे गाइडिंग भी कर रहे थे। फिर ब्रॉड पीक की योजना बनी।
आखिरी पोस्ट: मिशन शिफ्ट
27 जुलाई 2026 को निमस्दाई ने एक पोस्ट लिखा—“THE MISSION SHIFTS. THE COMPASS HOLDS.” इसमें उन्होंने साफ बताया कि मूल योजना सिर्फ G2 चढ़ने की थी। लेकिन आंकड़ों को देखते हुए उन्होंने महसूस किया कि ब्रॉड पीक फतह करने से वे इतिहास के पहले व्यक्ति बन सकते हैं जो सभी 14 आठ हजार मीटर चोटियों को दो बार (बिना ऑक्सीजन) चढ़ चुके होंगे। फिर सिर्फ चो ओयू बचेगा।
उन्होंने लिखा कि यह योजनाबद्ध नहीं था। हेट्रिक प्रोजेक्ट (सभी 14 चोटियां तीन बार और सेवन समिट्स तीन बार) उनका बड़ा मिशन था, लेकिन मौका मिला तो उन्होंने लिया। उन्होंने आलोचकों को जवाब दिया, अपने पिछले रिकॉर्ड्स का जिक्र किया और कहा—“Broad Peak, I ask for nothing but safe passage up and back down.”
ये पोस्ट आज पढ़कर दिल भारी हो जाता है। उन्होंने पहाड़ों का सम्मान करते हुए लिखा था कि वे कोई भी पर्वत हल्के में नहीं लेते।
पर्वतारोहण का जोखिम और ब्रॉड पीक की चुनौती
आठ हजार मीटर से ऊंची चोटियां “डेथ जोन” कहलाती हैं। वहां ऑक्सीजन कम, तापमान बेहद कम, हिमस्खलन, क्रैवेस और अचानक बदलता मौसम जानलेवा साबित हो सकता है। ब्रॉड पीक तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। कराकोरम की अन्य चोटियों की तरह यहां भी मौसम अनिश्चित रहता है।
निमस्दाई हमेशा सुरक्षा को प्राथमिकता देते रहे। उन्होंने कई बार अन्य पर्वतारोहियों को बचाया। लेकिन प्रकृति कभी-कभी बहुत शक्तिशाली साबित होती है। इस घटना ने फिर याद दिलाया कि पर्वत कितने अदभुत और कितने खतरनाक हो सकते हैं।
बचाव अभियान की मौजूदा स्थिति (1 अगस्त 2026 तक)
- कुछ शव बरामद और पहचान।
- निमस्दाई समेत कई अभी लापता।
- जीपीएस डेटा से पहले हल्की उम्मीद, लेकिन पुष्टि नहीं।
- नेपाली और अंतरराष्ट्रीय टीमें शामिल।
- मौसम बाधा बन रहा है।
- परिवार, दोस्त, पर्वतारोहण समुदाय और प्रशंसक प्रार्थना कर रहे हैं।
भारत, नेपाल, पाकिस्तान और दुनिया भर से संदेश आ रहे हैं। कई शेरपा और पर्वतारोही भावुक पोस्ट लिख रहे हैं।
Nimsdai की विरासत और प्रेरणा
चाहे परिणाम कुछ भी हो, निमस्दाई की कहानी अमर रहेगी। उन्होंने दिखाया कि सही मानसिकता, तैयारी, टीम वर्क और उद्देश्य से बड़ा कुछ भी हासिल किया जा सकता है। उनका फाउंडेशन, स्टोर और एक्सपेडिशन कंपनी युवाओं को प्रेरित करती रहेगी।
इस घटना से सबक भी है—पर्वतारोहण में सुरक्षा प्रोटोकॉल, बेहतर मौसम पूर्वानुमान, ट्रैकिंग तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत।
आगे की उम्मीद
खोज अभियान जारी है। हर कोई सुरक्षित वापसी की कामना कर रहा है। निमस्दाई ने खुद हमेशा कहा—“Nothing is Impossible.” शायद प्रकृति इस बार भी उन्हें सुरक्षित मार्ग दे।
हम सब उनके परिवार, टीम और लापता सभी सदस्यों के लिए प्रार्थना करते हैं। अपडेट आते रहेंगे। पर्वत सिखाते हैं कि जीवन अनिश्चित है, लेकिन साहस और मानवता शाश्वत।


















