Annular Solar Eclipse का वैज्ञानिक आधार: कैसे होता है यह चमत्कार?
Annular Solar Eclipse को समझने के लिए पहले सूर्य ग्रहण के प्रकारों को जानना जरूरी है। सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं: पूर्ण (Total), आंशिक (Partial) और वलयाकार (Annular)। Annular Solar Eclipse तब होता है जब चंद्रमा अपने एपोजी (पृथ्वी से सबसे दूर बिंदु) पर होता है। इस स्थिति में चंद्रमा का आकार सूर्य से छोटा लगता है, इसलिए सूर्य की बाहरी किनारी दिखाई देती है – जैसे एक आग की रिंग।
17 फरवरी 2026 को यह ग्रहण UTC समयानुसार सुबह 7:01 बजे शुरू होगा। अधिकतम ग्रहण अंटार्कटिका में होगा, जहां यह 2 मिनट 20 सेकंड तक चलेगा। कुल अवधि लगभग 271 मिनट होगी। NASA के अनुसार, यह ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका, दक्षिणी अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। भारत में? दुर्भाग्य से, नहीं। क्योंकि घटना दक्षिणी गोलार्ध में हो रही है, और उस समय भारत में सूर्य क्षितिज के नीचे होगा।
लेकिन चिंता न करें! आप इसे ऑनलाइन लाइव स्ट्रीम के जरिए देख सकते हैं। Space.com और NASA की वेबसाइट्स पर लाइव कवरेज होगा। Annular Solar Eclipse की खासियत यह है कि यह सुरक्षित रूप से देखने के लिए विशेष चश्मों की जरूरत पड़ती है। बिना सुरक्षा के देखना आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है।
विज्ञान की दृष्टि से, यह घटना हमें ब्रह्मांड की गतिशीलता समझाती है। चंद्रमा की कक्षा elliptical है, इसलिए कभी वह पृथ्वी के करीब (Perigee) तो कभी दूर (Apogee) होता है। Apogee पर Annular Solar Eclipse होता है। यह घटना पृथ्वी की घूर्णन गति, सूर्य की स्थिति और चंद्रमा की दूरी पर निर्भर करती है।

भारत में Annular Solar Eclipse क्यों ट्रेंड कर रहा है? सांस्कृतिक और ज्योतिषीय महत्व
भले ही 2026 का Annular Solar Eclipse भारत में न दिखे, लेकिन यह ट्रेंडिंग है क्योंकि भारत में ग्रहणों का गहरा सांस्कृतिक महत्व है। हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण को राहु-केतु से जोड़ा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान राहु ने अमृत पीने की कोशिश की, जिससे सूर्य और चंद्रमा ने उसे पहचान लिया। तब से राहु ग्रहण के दौरान सूर्य को निगलने की कोशिश करता है।
भारत में ग्रहण के दौरान कई रीति-रिवाज निभाए जाते हैं, जैसे स्नान, दान, और पूजा। भले ही ग्रहण न दिखे, ज्योतिषी इसके प्रभाव पर चर्चा कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, कुछ ज्योतिषियों का कहना है कि कुंभ, सिंह, मीन और कर्क राशि वाले लोगों को 10-15 दिन पहले से प्रभाव महसूस हो सकता है। X पर पोस्ट्स में लोग राशिफल शेयर कर रहे हैं, जैसे “कुंभ राशि वालों के लिए सावधानी”।
ट्रेंडिंग का एक कारण यह भी है कि भारत में एस्ट्रोनॉमी क्लब्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स इस पर वीडियो बना रहे हैं। जैसे, “रिंग ऑफ फायर” की तस्वीरें और वीडियो शेयर हो रहे हैं। साथ ही, लोग भविष्य के ग्रहणों के बारे में पूछ रहे हैं – जैसे 2031 का Annular Solar Eclipse जो भारत में दिखाई देगा।
इतिहास में Annular Solar Eclipse: भारत के संदर्भ में
Annular Solar Eclipse का इतिहास हजारों साल पुराना है। भारत में सबसे यादगार ग्रहण 26 दिसंबर 2019 का था, जो Annular था और केरल, कर्नाटक से गुजरा। लाखों लोगों ने इसे देखा। इससे पहले, 2010 में भी एक Annular Solar Eclipse भारत में दिखा था।
वैश्विक स्तर पर, 2024 का Annular Solar Eclipse दक्षिण अमेरिका में हुआ, लेकिन भारत में नहीं। 2026 का ग्रहण अंटार्कटिका-केंद्रित है, लेकिन इसका अध्ययन महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जलवायु पर प्रभाव डाल सकता है। इतिहास में, ग्रहणों ने युद्धों और घटनाओं से जोड़ा गया है, जैसे महाभारत काल में एक ग्रहण का उल्लेख। हालांकि, 2031 का ग्रहण भारत के लिए विशेष होगा, जब शनि, केतु और मंगल की स्थिति से जुड़ा होगा।
Annular Solar Eclipse देखने की सुरक्षा टिप्स और तैयारी
Annular Solar Eclipse देखना रोमांचक है, लेकिन सुरक्षा जरूरी है। कभी भी नंगी आंखों से न देखें – इससे रेटिना डैमेज हो सकता है। इस्तेमाल करें:
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सोलर व्यूइंग ग्लासेस (ISO 12312-2 प्रमाणित)
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पिनहोल प्रोजेक्टर
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टेलीस्कोप विद सोलर फिल्टर


















