अमेरिका की हालिया इंटेलिजेंस रिपोर्ट “Annual Threat Assessment (ATA) 2025” में भारत को चीन के साथ जोड़ा गया है, जिससे भारत में राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत “फेंटानाइल संकट” को बढ़ाने में शामिल हो सकता है। रिपोर्ट में भारत को “स्टेट एक्टर” की श्रेणी में रखे जाने पर बहस छिड़ गई है।
रिपोर्ट में भारत का नाम क्यों?
अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और चीन “फेंटानाइल प्रीकर्सर केमिकल्स” की आपूर्ति में भूमिका निभाते हैं। जबकि 2024 की रिपोर्ट में भारत को “माइनर सप्लायर” बताया गया था, इस बार इसे बड़े खतरे के रूप में पेश किया गया है।
- अमेरिका ने भारत की फार्मा इंडस्ट्री पर सवाल उठाए
- रिपोर्ट में भारत के केमिकल सप्लायर्स का जिक्र
- विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट राजनीति से प्रेरित हो सकती है।
From the 2025 Annual Threat Assessment report by the Office of the Director of National Intelligence, United States.
India and China mentioned in the same line in the document’s foreword, in the context of (directly or indirectly) enabling drug related equipment and material. pic.twitter.com/tLLBwlYuGg
— Rishap Vats (@VatsRishap) March 26, 2025
भारत पर इसके संभावित प्रभाव
- भारत सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह रिपोर्ट भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों को प्रभावित कर सकती है।
- अमेरिका और भारत के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं पर इसका क्या असर होगा?
- क्या भारतीय फार्मा इंडस्ट्री को वैश्विक बाजार में नुकसान उठाना पड़ेगा?
- क्या अमेरिका भारत पर कोई नई व्यापारिक पाबंदी लगा सकता है?
अमेरिका की राजनीति और ट्रंप फैक्टर
अमेरिका में आगामी राष्ट्रपति चुनावों के मद्देनजर यह रिपोर्ट कहीं न कहीं डोनाल्ड ट्रंप की “एंटी-चाइना” नीति से जुड़ी हो सकती है। ट्रंप प्रशासन चीन पर पहले से ही सख्त है और हो सकता है कि भारत को भी चीन के साथ जोड़कर अमेरिकी वोटरों को लुभाने की कोशिश की जा रही हो।
चीन और भारत की तुलना क्यों?
रिपोर्ट में भारत को चीन के साथ जोड़ना कई सवाल खड़े करता है। चीन को पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा “फेंटानाइल सप्लायर” माना जाता है, लेकिन भारत की स्थिति चीन से अलग है।
- चीन ने लंबे समय तक गैर-कानूनी सिंथेटिक ड्रग्स का निर्यात किया है
- भारत में ऐसे मामलों की संख्या बेहद कम रही है
- क्या अमेरिका चीन को दबाने के लिए भारत को भी इसी श्रेणी में रख रहा है?
विपक्षी दलों और भारतीय मीडिया की प्रतिक्रिया
अमेरिका की इस रिपोर्ट को लेकर भारतीय राजनीतिक दलों में भी बहस छिड़ गई है। विपक्षी पार्टियां मोदी सरकार पर अमेरिका से जवाब मांगने का दबाव बना रही हैं। वहीं, भारतीय मीडिया इस रिपोर्ट को लेकर अलग-अलग दावे कर रहा है।
निष्कर्ष
इस रिपोर्ट ने भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। हालांकि, भारत सरकार की औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस रिपोर्ट को लेकर भारत की रणनीति क्या होगी, यह देखने लायक होगा।