हिमाचल प्रदेश एक बार फिर से प्रकृति के कहर का शिकार बन गया है। पहाड़ी राज्य में मानसून के आगमन के साथ ही तेज बारिश और बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं। इस बार कांगड़ा और कुल्लू जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जहां बादल फटने की वजह से दो लोगों की मौत हो चुकी है, और 10 से ज्यादा लोग लापता हैं। यह घटना न सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय बन चुकी है।
कहां और कब फटा बादल
पुलिस और प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पहली घटना कांगड़ा जिले के देहरा उपमंडल के गरली क्षेत्र में हुई, जहां शनिवार रात को अचानक बादल फटा। इसके कुछ ही घंटों के भीतर, कुल्लू जिले के आनी क्षेत्र में एक अन्य स्थान पर भी बादल फटने की घटना हुई, जिससे कई घर और खेत पानी में बह गए। मौसम विभाग का कहना है कि इन इलाकों में पिछले 48 घंटों से लगातार भारी वर्षा हो रही थी, जिससे ज़मीन पहले से ही भीग चुकी थी और तेज बहाव ने हालात और बिगाड़ दिए।
Flash flood fury in Dharamshala after cloudburst in Himachal Pradesh
At least 2 dead, over 20 missing as heavy rains and flash floods wreak havoc across #HimachalPradesh pic.twitter.com/5o2GKtyCF8
— Nabila Jamal (@nabilajamal_) June 26, 2025
2 की मौत, 10 से अधिक लोग लापता
इन हादसों में अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें से एक शव गरली क्षेत्र में बरामद किया गया है और एक अन्य की कुल्लू में। इसके अलावा, कई लोग लापता हैं, जिनमें से कुछ के नदी में बह जाने की आशंका है। घटनास्थल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दो-तीन वाहन भी पानी में बह गए हैं, जिनमें लोग सवार थे। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और बचाव कार्य जारी है।
रेस्क्यू ऑपरेशन: समय के साथ जंग
एनडीआरएफ, पुलिस, होमगार्ड्स और स्थानीय स्वयंसेवकों की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। कांगड़ा में घटनास्थल की भौगोलिक स्थिति बेहद कठिन है, जहां भूस्खलन की वजह से पहुंचना मुश्किल हो रहा है। वहीं कुल्लू में तेज बहाव और संकरी घाटियां रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा बन रही हैं।
हिमाचल सरकार ने हेलिकॉप्टर की मदद से राहत सामग्री पहुंचाने के आदेश दिए हैं, और प्रभावित गांवों को तत्काल खाली कराने की योजना पर काम किया जा रहा है। अब तक 20 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन मौसम की अनिश्चितता के कारण यह कार्य और भी चुनौतीपूर्ण बन गया है।
असरग्रस्त क्षेत्रों का जायजा
कांगड़ा जिले में गरली और आसपास के गांव, और कुल्लू जिले में आनी उपमंडल के दर्जनों गांव, बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। यहां न सिर्फ कई मकान पूरी तरह से बह गए हैं, बल्कि कृषि भूमि और सड़कें भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में ऐसा भयावह मंजर नहीं देखा गया।
कई पुल और रास्ते टूट जाने से राहत टीमें भी अंदरूनी गांवों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। बिजली और संचार सेवाएं पूरी तरह से ठप हैं, जिससे जानकारी जुटाना भी मुश्किल हो रहा है।
प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और प्रभावितों को हरसंभव सहायता दी जाएगी। उन्होंने जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्राथमिकता के आधार पर राहत कार्यों को अंजाम दिया जाए।
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है, वहीं लापता लोगों की तलाश के लिए अतिरिक्त फोर्स की तैनाती की जा रही है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले समय में बादल फटने जैसी आपदाओं से निपटने के लिए सुदृढ़ योजना बनाई जाएगी।
स्थानीय लोगों की आपबीती
घटनास्थल पर मौजूद एक स्थानीय महिला ने बताया, “हम रात को सो रहे थे, तभी जोरदार आवाज आई। बाहर निकलते ही देखा कि पानी घर के अंदर घुस गया है।” कुछ लोग अपने परिजनों को खोजते-खोजते थक चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई खबर नहीं मिली।
स्थानीय पंचायत प्रधानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं जिनमें बहते मकान, पानी में बहती गाड़ियां और लोगों का रोता-बिलखता चेहरा देखा जा सकता है। यह सब देख कर दिल दहल जाता है।
मौसम विभाग की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने हिमाचल प्रदेश के अधिकांश जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। अगले 48 घंटों में तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। विशेषकर चंबा, मंडी, कुल्लू और कांगड़ा जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग ने प्रशासन को सतर्क रहने को कहा है और लोगों से अपील की है कि वे नदियों के किनारे ना जाएं और सुरक्षित स्थानों पर रहें।
भविष्य की दिशा: नीति और सतर्कता
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम प्राकृतिक आपदाओं के लिए तैयार हैं? हर साल हिमाचल और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में बादल फटना, भूस्खलन और बाढ़ आम घटनाएं बनती जा रही हैं। इस स्थिति में ज़रूरत है एक दृढ़ नीति, एडवांस चेतावनी तंत्र और स्थायी राहत संरचना की।
सरकार को चाहिए कि वह स्थानीय समुदायों को प्रशिक्षित करे, आपातकालीन केंद्र बनवाए और बुनियादी ढांचे को जलवायु अनुकूल बनाए।
जहां एक ओर देश प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है, वहीं भारत विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। हाल ही में शुभांशु शुक्ला के माध्यम से भारत ने Axiom-4 स्पेस मिशन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। इस ऐतिहासिक मिशन की पूरी जानकारी आप यहाँ पढ़ सकते हैं: India’s Time in Space: Axiom-4 Mission – शुभांशु शुक्ला का स्पेस स्टेशन तक सफर
सतर्कता ही बचाव है
हिमाचल प्रदेश की ताजा घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि प्रकृति के आगे इंसान की ताकत सीमित है। लेकिन यदि समय रहते चेतावनी और तैयारी की जाए, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सरकार, प्रशासन और आम लोगों को मिलकर ऐसी आपदाओं से निपटने की संयुक्त योजना बनानी होगी, तभी भविष्य सुरक्षित हो सकता है।



















