Dog lick sepsis जुलाई 2025 की बात है। बर्मिंघम (यूके) की रहने वाली मनजीत संघा, जो भारतीय मूल की हैं, अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन बिता रही थीं। उनका पालतू कुत्ता परिवार का सबसे प्यारा सदस्य था। शनिवार को वे कुत्ते के साथ खेल रही थीं। शायद किसी छोटी सी खरोंच या कट पर कुत्ते ने चाट लिया होगा। अगले दिन रविवार को वे काम पर गईं, लेकिन शाम को उन्हें थकान और बेचैनी महसूस होने लगी।
सोमवार रात तक हालत बिगड़ गई। मनजीत बेहोश हो गईं। उनके हाथ-पैर बर्फ जैसे ठंडे पड़ गए, होंठ नीले हो गए और सांस लेना मुश्किल हो गया। पति कमलजीत संघा ने तुरंत उन्हें न्यू क्रॉस हॉस्पिटल, वॉल्वरहैम्प्टन ले जाया। डॉक्टरों ने जांच की तो पता चला – सेप्सिस! शरीर में इंफेक्शन का ऐसा तूफान कि अंगों में ब्लड सप्लाई बंद हो रही थी।
32 हफ्ते यानी लगभग 8 महीने अस्पताल में रहे। छह बार कार्डियक अरेस्ट आया। स्प्लीन (तिल्ली) निकालनी पड़ी। आखिरकार जीवन बचाने के लिए quadruple amputation करनी पड़ी – दोनों पैर घुटनों के नीचे से और दोनों हाथ काट दिए गए। अब वे घर लौट चुकी हैं लेकिन प्रोस्थेटिक्स (कृत्रिम अंग) के लिए GoFundMe पर फंड जुटा रही हैं।
मनजीत ने खुद कहा – “It could happen to anybody.” डॉक्टरों का मानना है कि कुत्ते की लार में मौजूद Capnocytophaga canimorsus बैक्टीरिया छोटे कट से ब्लडस्ट्रीम में घुस गया और dog lick sepsis का रूप ले लिया। यह खबर भारत में इसलिए ट्रेंड कर रही है क्योंकि मनजीत भारतीय मूल की हैं और लाखों भारतीय पालतू कुत्ते रखते हैं।
सेप्सिस क्या है? सरल भाषा में पूरी समझ
सेप्सिस कोई सामान्य इंफेक्शन नहीं है। यह शरीर की खुद की इम्यून सिस्टम की over-reaction है। जब कोई बैक्टीरिया, वायरस या फंगस शरीर में घुसता है, तो इम्यून सिस्टम लड़ने के लिए सैनिक (साइटोकाइन्स) भेजता है। लेकिन कभी-कभी यह रिएक्शन इतना तेज हो जाता है कि स्वस्थ अंगों को भी नुकसान पहुंचाने लगता है।
NHS और UK Sepsis Trust के अनुसार हर साल UK में 50,000 लोग सेप्सिस से मरते हैं। भारत में 2017 के CHEST जर्नल के अनुसार 1.13 करोड़ केस और 29 लाख मौतें हुईं। डॉ. मुक्ता अग्रवाल (मणिपाल हॉस्पिटल, गाजियाबाद) कहती हैं – “सेप्सिस घंटों में जान ले सकता है।”
dog lick sepsis में बैक्टीरिया कुत्ते की लार से आता है, जो ज्यादातर लोगों में हानिरहित रहता है लेकिन कमजोर इम्यूनिटी वाले में घातक हो जाता है।
Dog Lick Sepsis का मुख्य कारण: Capnocytophaga canimorsus बैक्टीरिया
कुत्तों (और बिल्लियों) की लार में यह बैक्टीरिया स्वाभाविक रूप से पाया जाता है। कुत्तों को कोई नुकसान नहीं होता क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम इसे कंट्रोल करता है। लेकिन इंसान के खुले घाव, कट, अल्सर या मुंह के अंदर घुस जाए तो ब्लड में पहुंचकर तेजी से बढ़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
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60% केस dog bite से
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27% सिर्फ lick से (खरोंच पर)
मनजीत के केस में यही हुआ। डॉ. मनोज विठलानी (HCG हॉस्पिटल्स, अहमदाबाद) बताते हैं – “पूर्ण स्वस्थ व्यक्ति में भी अगर स्प्लीन न हो या डायबिटीज हो तो रिस्क 100 गुना बढ़ जाता है।”
Dog Lick Sepsis के शुरुआती लक्षण – इन्हें कभी इग्नोर न करें
सेप्सिस के लक्षण बहुत तेज आते हैं:
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तेज बुखार (>101°F) या बहुत कम तापमान
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ठंड लगना, कांपना
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तेज दिल की धड़कन (>90 प्रति मिनट)
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सांस फूलना
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उल्टी, दस्त
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बहुत कम पेशाब
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भ्रम, चक्कर आना
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त्वचा पर लाल-गहरे धब्बे या रैश
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हाथ-पैर ठंडे पड़ना
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अचानक extreme थकान
मनजीत को ठीक यही हुआ – रातोंरात बेहोशी। अगर 1 घंटे भी देर हो जाए तो septic shock हो जाता है।
कौन ज्यादा खतरे में? भारत में रिस्क फैक्टर्स
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बिना स्प्लीन वाले (asplenia)
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डायबिटीज, लीवर डिजीज, किडनी फेलियर
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कैंसर या कीमोथेरेपी वाले
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शराबी या स्मोकिंग करने वाले
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बच्चे और बुजुर्ग
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हाल ही में सर्जरी हुए
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HIV या इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं लेने वाले
भारत में पेट रखने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे शहरों में स्ट्रे डॉग भी बहुत हैं। इसलिए dog lick sepsis की जागरूकता जरूरी है।
वैश्विक अपडेट
भारत में सेप्सिस की स्थिति और क्यों ट्रेंड कर रहा है dog lick sepsis
भारत में हर साल लाखों सेप्सिस केस होते हैं। WHO के अनुसार विकासशील देशों में mortality rate 20-30% है। COVID के बाद इम्यूनिटी कमजोर होने से रिस्क बढ़ा है। मनजीत की भारतीय मूल होने से मीडिया में खूब कवरेज हुआ। सोशल मीडिया पर #DogLickSepsis, #ManjitSangha जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं – “हमारे कुत्ते भी तो चाटते हैं, क्या हम सुरक्षित हैं?”
पालतू कुत्ते मालिकों के लिए 15+ बचाव के उपाय (Prevention Tips)
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किसी भी कट-खरोंच पर कुत्ते को चाटने न दें।
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घाव को तुरंत साबुन-पानी से धोएं और एंटीसेप्टिक लगाकर पट्टी बांधें।
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कुत्ते को regular vet checkup और vaccination कराएं।
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अगर कुत्ता lick करे तो तुरंत मुंह धो लें।
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इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड व्यक्ति कुत्ते से दूरी रखें।
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हाथ धोने की आदत डालें।
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स्प्लीन निकलवाने के बाद डॉक्टर से स्पेशल एडवाइज लें।
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फ्लू जैसे लक्षण पर तुरंत डॉक्टर जाएं।
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घर में एंटीसेप्टिक स्प्रे रखें।
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बच्चे और बुजुर्गों को सिखाएं कि घाव पर पेट न लगाएं।
इलाज क्या है? समय पर एक्शन से 80% केस बच जाते हैं
IV एंटीबायोटिक्स, फ्लूइड्स, वेंटिलेटर, डायलिसिस। गंभीर केस में amputation। मनजीत की तरह survivor बनने के लिए golden hour महत्वपूर्ण है।
समान विश्व स्तर पर केस और सबक
कई केस रिपोर्ट हुए हैं जहां lick से sepsis हुआ। एक स्टडी में 27% lick से transmission।
विशेषज्ञों की सलाह (भारतीय डॉक्टरों के कोट्स)
डॉ. मुक्ता अग्रवाल: “फ्लू जैसे लक्षणों को घर पर न ट्रीट करें।” डॉ. मनोज विठलानी: “पेट्स से प्यार करें लेकिन सावधानी बरतें।”
मिथक vs फैक्ट
मिथक: कुत्ता चाटना हमेशा सुरक्षित है। फैक्ट: खुले घाव पर नहीं।
FAQs – आपके सारे सवालों के जवाब
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क्या हर कुत्ते में यह बैक्टीरिया होता है?
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बच्चे को कुत्ता चाटे तो क्या करें?
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dog lick sepsis कितना common है?


















