अमेरिका में H-1B वीज़ा धारकों और उनके परिवारों के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। हाल ही में अमेरिकी प्रशासन ने वीज़ा नीति में कड़े नियम लागू किए हैं, जिससे हजारों भारतीय परिवार प्रभावित हो सकते हैं। खासतौर पर वे बच्चे, जो अपने माता-पिता के H-1B वीज़ा पर अमेरिका में रह रहे थे, अब 21 साल की उम्र के बाद स्व-निर्वासन (Self-Exile) की स्थिति में आ सकते हैं।
ग्रीन कार्ड बैकलॉग से बढ़ी परेशानी
H-1B वीज़ा धारकों के लिए सबसे बड़ी समस्या ग्रीन कार्ड बैकलॉग बनी हुई है। वर्तमान में लाखों भारतीयों को ग्रीन कार्ड मिलने में दशकों का समय लग सकता है। इस देरी के चलते कई युवा, जो अपने माता-पिता के वीज़ा पर आश्रित थे, अब 21 साल की उम्र के बाद अमेरिका में रह नहीं सकेंगे और उन्हें स्वदेश लौटना पड़ सकता है। इसके अलावा, कई भारतीय पेशेवर जो वर्षों से अमेरिका में कार्यरत हैं, उन्हें भी अनिश्चित भविष्य का सामना करना पड़ रहा है।
भारतीय युवाओं के लिए UK और कनाडा का वीज़ा विकल्प?
अमेरिका में बढ़ती अनिश्चितता के बीच कई भारतीय युवा अब Indian Youth Mobility Visa UK की ओर रुख कर सकते हैं। यह वीज़ा 18-30 वर्ष के युवाओं को ब्रिटेन में काम करने की अनुमति देता है। इसके अलावा, कनाडा का एक्सप्रेस एंट्री प्रोग्राम भी भारतीय आईटी और अन्य पेशेवरों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की सख्त वीज़ा नीतियों के कारण ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों की ओर भारतीयों का झुकाव बढ़ सकता है।
H-1B वीज़ा धारकों के लिए अनिश्चित भविष्य
H-1B वीज़ा पर कार्यरत कई भारतीय पेशेवरों को अब यह डर सता रहा है कि भविष्य में उनके वीज़ा के नवीनीकरण में भी दिक्कतें आ सकती हैं। अमेरिकी प्रशासन की नई नीतियों के तहत वीज़ा प्रक्रिया को पहले से अधिक जटिल बना दिया गया है। इससे अमेरिका में भारतीय प्रवासियों की स्थिरता पर असर पड़ सकता है और वे अन्य देशों में अवसरों की तलाश कर सकते हैं।
यह एक YouTube वीडियो है, जिसमें पूरी रिपोर्ट को दिखाया गया है।
क्या समाधान निकल सकता है?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका की वीज़ा नीतियों में सुधार नहीं हुआ, तो यह भारतीय पेशेवरों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। अमेरिकी प्रशासन पर प्रवासी समुदायों से लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वे ग्रीन कार्ड बैकलॉग को कम करने और वीज़ा नीतियों में सुधार के लिए कदम उठाएं। भारतीय समुदाय और विभिन्न संगठनों द्वारा इस मुद्दे को सुलझाने के लिए लॉबिंग की जा रही है।
प्रवासियों के लिए आगे क्या?
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका में भारतीय प्रवासियों के लिए हालात और मुश्किल होंगे या प्रशासन इस संकट का कोई समाधान निकालेगा? जब तक नीतियों में सुधार नहीं होता, भारतीय परिवारों को वैकल्पिक योजनाएं बनानी पड़ेंगी। कई लोग ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में अवसर तलाश रहे हैं, जिससे वैश्विक प्रवासी पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है।