होली रंगों, खुशी और मस्ती का त्योहार है, जिसे पूरे भारत में जोश के साथ मनाया जाता है। लेकिन, देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग तरीकों से मनाया जाता है। कुछ जगहों पर यह प्यार और भक्ति से भरी होती है, तो कहीं इसे परंपरा और खेल-कूद के साथ जोड़ा जाता है। आइए जानें, भारत में होली के खास और अनोखे रूप कौन-कौन से हैं।
बरसाना की लठमार होली
उत्तर प्रदेश के बरसाना और नंदगांव में मनाई जाने वाली लठमार होली दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इस अनूठी परंपरा में महिलाएं पुरुषों पर लाठियों से प्रहार करती हैं, और पुरुष अपनी ढाल से बचने का प्रयास करते हैं।
बरसाना की होली में बड़ी संख्या में लोग सखी रूप में 16 श्रृंगार कर पहुंचते हैं. कान्हा के साथ होली खेलते हैं. इस होली का इंतजार उनको सालभर रहते हैं, यह परंपरा श्रीकृष्ण और राधा की लीलाओं से प्रेरित मानी जाती है। पहले दिन नंदगांव के पुरुष बरसाना आते हैं और अगले दिन बरसाना के पुरुष नंदगांव जाते हैं।
बरसाना के श्री राधा रानी मंदिर में लड्डू होली मनाते नजर आए भक्त। #Holi #LadduHoli #Barsana pic.twitter.com/2DFEYZ7bjQ
— Doordarshan National दूरदर्शन नेशनल (@DDNational) March 18, 2024
वृंदावन की फूलों की होली
मथुरा और वृंदावन में होली विशेष रूप से भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है। वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर में फूलों की होली खेली जाती है, जिसमें रंगों की जगह सुगंधित फूलों की वर्षा होती है। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण और राधा पर पुष्प अर्पित करते हैं और इस दिव्य माहौल का आनंद उठाते हैं। 2025 में वृंदावन और मथुरा में होली का उत्सव और भी भव्य होने वाला है, जहां भक्ति, रंगों और उल्लास का अनोखा संगम देखने को मिलेगा (2025 में वृंदावन और मथुरा में होली का उत्सव)।
Breaking the shackles of tradition, hundreds of widows in Vrindavan played #Holi with gulal and flowers in the land of Lord Krishna. pic.twitter.com/tYDuQkFodk
— Firstpost (@firstpost) March 13, 2017
हरियाणा की धुलंडी होली
हरियाणा के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में धुलंडी होली का विशेष महत्व है, जिसे भाभी-देवर की होली भी कहा जाता है। इस अवसर पर शादीशुदा महिलाएं अपने देवरों को मजाक और छेड़छाड़ करती हैं। यह होली हंसी-मजाक और प्रेम का प्रतीक है, जिसमें रंगों और गुलाल का प्रमुख स्थान होता है।
पंजाब का होला मोहल्ला
होला मोहल्ला पंजाब का एक जीवंत त्यौहार है। यह त्यौहार वीरता, योद्धाओं, बहादुरी, विजय, गौरव और निडरता के बारे में है। ‘होला’ शब्द स्त्रीलिंग शब्द ‘होली’ का पुल्लिंग रूप है। यह तीन दिनों तक चलता है, लेकिन इसमें शामिल होने वाले लोग आनंदपुर साहिब शहर में लगभग एक सप्ताह तक रुकते हैं, जो होला मोहल्ला उत्सव के लिए प्रसिद्ध है। इस त्यौहार में मार्शल आर्ट शामिल है।
होली के अगले दिन, निहंग उत्सव मनाने के लिए गुरुद्वारा होलगढ़ साहिब के मैदानों में वापस लौटते हैं। वे नकली युद्ध करते हैं, अपनी तलवारों के साथ खतरनाक तरीके से नाचते हैं और दो दौड़ते घोड़ों पर खड़े होकर दर्शकों पर रंग फेंकते हैं।
#WATCH | The traditional ‘Hola Mohalla’ celebrations were held at Anandpur Sahib in Punjab today. pic.twitter.com/08Q3YtUDKv
— ANI (@ANI) March 26, 2024
राजस्थान की गेर और डोलची होली
राजस्थान में होली के विविध रूप हैं। दुनिया रंगों से होली खेलती है, लेकिन राजस्थानी रंग ही नहीं, शरीर पर रुई लपेट कर भी होली खेलते हैं। पतंग उड़ाते हैं और नाचते गाते हैं। यहॉं होली पूर्णिमा के अगले दिन यानि एकम को ही नहीं पंचमी और तेरस को भी खेली जाती है, जिसे रंग पंचमी और रंग तेरस कहा जाता है। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के मांडल कस्बे में रंग तेरस का दिन बेहद विशेष होता है।
वहीं, बीकानेर में डोलची होली खेली जाती है, जिसमें लोग एक-दूसरे पर पानी से भरी डोलची डालते हैं। खास बात यह है कि यह पूरी तरह सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाई जाती है और इसमें किसी को चोट नहीं पहुंचाई जाती।
कहां जाएं होली का अनूठा आनंद लेने?
अगर आप भी इस बार होली का जश्न कुछ अलग अंदाज में मनाना चाहते हैं, तो भारत के इन स्थानों पर जरूर जाएं। हर क्षेत्र में होली का अपना अलग महत्व और उत्साह है, जो इसे और भी खास बनाता है। तो तैयार हो जाइए इस बार रंगों के इस महापर्व को यादगार बनाने के लिए!
Comments 1