भारतीय सिनेमा की देशभक्ति आत्मा के प्रतीक चरित्र और कार्यकर्ता “भारत कुमार” की अंतिम यात्रा आज जुहू क्रिमेटोरियम में की जाएगी। एक और किस्सी देशभक्त और चित्रीयों की आवाज़ छोड़ गई है। यह लेख उनकी अंतिम यात्रा, निजगी की प्रतिक्रियाओं और उनकी देशभक्ति दृष्टि को श्रद्धांजलि है।
मनोज कुमार: एक परिचय
मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 को अविभाजित भारत के अब्बोटाबाद (अब पाकिस्तान में) हुआ था। विभाजन के बाद उनका परिवार दिल्ली आ गया। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और फिल्मी दुनिया में कदम रखा। उनके शुरुआती करियर में Fashion, Kanch Ki Gudiya जैसी फिल्में थीं, लेकिन उन्हें असली पहचान 1965 में Shaheed और 1967 की Upkar से मिली। Upkar में ‘जय जवान जय किसान’ के विचार को जीवंत कर उन्होंने देशभक्ति फिल्मों का नया अध्याय शुरू किया। इसके बाद Purab Aur Paschim, Kranti, और Roti Kapda Aur Makaan जैसी कई कालजयी फिल्में आईं। उनका नाम ‘भारत कुमार’ रखने का श्रेय भी इसी देशभक्ति के प्रति लगाव को जाता है।
निधन की खबर और कारण
मनोज कुमार का निधन 3 अप्रैल 2025 की देर रात मुंबई के एक निजी अस्पताल में हुआ। वह लंबे समय से लिवर सिरोसिस से पीड़ित थे। अंतिम समय में उन्हें कार्डियोजेनिक शॉक आया, जिससे उनकी स्थिति और गंभीर हो गई। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की भरसक कोशिश की, लेकिन वह 87 वर्ष की आयु में इस दुनिया से विदा हो गए।
अंतिम यात्रा की तैयारियां
उनके पार्थिव शरीर को मुंबई स्थित उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। तिरंगे से सजी एंबुलेंस, फूलों की सजावट और घर पर उमड़ी भीड़ – हर दृश्य भावनात्मक था। बेटे कुणाल गोस्वामी ने बताया कि उनके पिताजी एक सच्चे देशभक्त थे और उन्होंने हमेशा समाज को जागरूक करने की कोशिश की। सुबह 10 बजे अस्पताल से पार्थिव शरीर को निकाला गया और दोपहर 12 बजे पवन हंस श्मशान घाट की ओर अंतिम यात्रा रवाना हुई।
#WATCH | Mumbai | Visuals from the residence of legendary actor and film director Manoj Kumar, who passed away early in the morning yesterday.
At around 11:30 am, Manoj Kumar’s last rites will be performed at a cremation ground in Juhu. pic.twitter.com/w40uZ1DYzq
— ANI (@ANI) April 5, 2025
अंतिम संस्कार स्थल और प्रक्रिया
मनोज कुमार का अंतिम संस्कार जुहू स्थित पवन हंस क्रिमेटोरियम में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके शव को तिरंगे में लपेटा गया और सैन्य बैंड की धुन पर विदाई दी गई। अंतिम दर्शन के लिए फिल्म जगत और राजनीति से जुड़ी कई हस्तियां पहुंचीं – धर्मेंद्र, शाहरुख खान, अक्षय कुमार, अनुपम खेर, सुभाष घई, सलमान खान, और हेमा मालिनी जैसे दिग्गज शामिल थे। ANI और अन्य मीडिया चैनलों ने अंतिम यात्रा का सीधा प्रसारण किया, जिससे उनके चाहने वालों को एक अंतिम झलक मिल सकी।
प्रमुख हस्तियों की प्रतिक्रियाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर लिखा, “मनोज कुमार जी ने भारतीय सिनेमा को एक नई दिशा दी, उनकी देशभक्ति फिल्में सदैव स्मरणीय रहेंगी।” राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी शोक व्यक्त किया। फिल्मी दुनिया से शाहरुख खान ने कहा, “मैंने उनसे अभिनय ही नहीं, देश से प्रेम करना भी सीखा।” अक्षय कुमार ने लिखा, “उनकी फिल्में आज भी प्रेरणा देती हैं।” सलमान खान ने उनके साथ बिताए कुछ पलों को याद कर कहा कि वह भारतीय सिनेमा के महान दिग्गज थे। परिवार की ओर से कुणाल गोस्वामी ने सभी शुभचिंतकों को धन्यवाद कहा और मीडिया से निवेदन किया कि वे इस समय को सम्मानपूर्वक देखें।
सिनेमाई विरासत और योगदान
मनोज कुमार ने न केवल देशभक्ति फिल्मों को एक नया दृष्टिकोण दिया, बल्कि वह उस दौर में सामाजिक मुद्दों को भी अपने सिनेमा में जगह देते थे। Roti Kapda Aur Makaan में उन्होंने बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और गरीबी जैसे मुद्दों को उठाया। Kranti जैसी भव्य फिल्में उनके विज़न की मिसाल हैं। उन्हें 1992 में पद्म श्री, 2016 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, और सात बार फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उनकी फिल्में आज भी टीवी पर आते ही दर्शकों को स्क्रीन से जोड़ लेती हैं। आज के दौर के फिल्म निर्माताओं के लिए वे आदर्श हैं – जिन्होंने मनोरंजन के साथ-साथ समाज का मार्गदर्शन भी किया।
निष्कर्ष
मनोज कुमार का इस दुनिया से जाना एक युग का अंत है। उन्होंने जिस तरह भारतीय सिनेमा को देशभक्ति और सामाजिक चेतना से जोड़ा, वह आज भी मिसाल है। उनकी अंतिम यात्रा में उमड़े जनसैलाब ने यह साबित कर दिया कि वे केवल अभिनेता नहीं, एक जननायक थे। उनका जाना दुखद है, लेकिन उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। हम सबकी ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि – भारत माता के सच्चे सपूत को सलाम।