Menaka Guruswamy कौन हैं? एक संक्षिप्त परिचय
Menaka Guruswamy का जन्म 27 नवंबर 1974 को हैदराबाद में हुआ था। उनके पिता मोहन गुरुस्वामी पूर्व में भाजपा रणनीतिकार और वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के विशेष सलाहकार रह चुके हैं, जबकि मां मीरा गुरुस्वामी विज्ञापन क्षेत्र से जुड़ी रहीं। लेकिन Menaka Guruswamy ने अपना रास्ता खुद चुना – कानून का रास्ता, जो संविधान की रक्षा और मानवाधिकारों की लड़ाई से भरा हुआ है।
वे सुप्रीम कोर्ट की सीनियर एडवोकेट हैं और कोलंबिया लॉ स्कूल में B.R. Ambedkar Research Scholar रह चुकी हैं। Yale Law School, NYU और Toronto University में विजिटिंग फैकल्टी भी रही हैं। Menaka Guruswamy ने न सिर्फ अदालतों में लड़ाइयां लड़ीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों को जीवंत बनाया। उनका जीवन Constitution of India के उन मूल्यों – equality, fraternity और non-discrimination – पर टिका है, जिन्हें उन्होंने अब संसद में ले जाने का संकल्प लिया है।
जब 6 अप्रैल 2026 को राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने Menaka Guruswamy को शपथ दिलाई, तो पूरा सदन गवाह बना कि भारत का लोकतंत्र अब और समावेशी हो गया है। TMC के अन्य सदस्यों – बाबुल सुप्रियो, राजीव कुमार और कोएल मल्लिक – के साथ उन्होंने शपथ ली। लेकिन Menaka Guruswamy की उपस्थिति ने इस समारोह को ऐतिहासिक बना दिया।
शिक्षा और प्रारंभिक करियर: Rhodes Scholar से Supreme Court तक
Menaka Guruswamy की शिक्षा का सफर बेहद शानदार रहा है। हैदराबाद पब्लिक स्कूल और दिल्ली के सरदार पटेल विद्यालय से स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), बेंगलुरु से BA LLB (Hons) 1997 में पूरा किया। फिर Rhodes Scholarship मिला और ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी से BCL (2000) किया। Harvard Law School से LL.M. (Gammon Fellow, 2001) और 2015 में ऑक्सफर्ड से ही D.Phil. – थीसिस थी “Constitutionalism in India, Pakistan and Nepal”।
प्रोफेशनल करियर की शुरुआत अटॉर्नी जनरल अशोक देसाई के साथ हुई। न्यूयॉर्क में Davis Polk & Wardwell में एसोसिएट के रूप में काम किया। 2009 में भारत लौटकर अपनी प्रैक्टिस शुरू की और 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें Senior Advocate का दर्जा दिया। कोलंबिया लॉ स्कूल में लेक्चरर, येल में फैकल्टी – Menaka Guruswamy ने कानून को सिर्फ प्रैक्टिस नहीं, बल्कि शिक्षा और नीति-निर्माण का माध्यम बनाया।
Section 377 केस: Menaka Guruswamy की सबसे बड़ी जीत
Menaka Guruswamy का नाम सबसे ज्यादा Section 377 केस से जुड़ा है। 2016 में Navtej Singh Johar v. Union of India में उन्होंने Arundhati Katju (जो उनकी पार्टनर भी हैं) और Saurabh Kripal के साथ पिटिशन दायर की। यह पहला मौका था जब LGBTQ+ भारतीयों ने खुद मूल अधिकारों के उल्लंघन का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
11 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट में Menaka Guruswamy ने दलील दी: “How strongly must you love knowing you are unconvicted felons under Section 377 IPC?” और “These young people need to be unafraid to love and be loved.” 2018 के फैसले ने 157 साल पुरानी औपनिवेशिक कानून को consenting adults पर लागू नहीं माना। Menaka Guruswamy और Arundhati Katju की जोड़ी ने न सिर्फ कानूनी जीत हासिल की, बल्कि लाखों LGBTQ+ युवाओं को “सूरज में जीने” का हक दिलाया। Time magazine ने 2019 में उन्हें 100 most influential लोगों में शामिल किया।
यह केस Menaka Guruswamy के लिए पेशेवर नहीं, निजी भी था। Fareed Zakaria के CNN इंटरव्यू में उन्होंने खुलकर अपनी रिलेशनशिप के बारे में बताया।
TMC नामांकन से राज्यसभा चुनाव तक: राजनीति में कदम
फरवरी 2026 में TMC चीफ और पश्चिम बंगाल CM ममता बनर्जी ने Menaka Guruswamy को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया। मार्च 2026 में वे निर्विरोध चुनी गईं। 5 मार्च को कोलकाता में नामांकन दाखिल करते हुए उन्होंने X (Twitter) पर लिखा: “Our Constitution’s values of equality, fraternity & non-discrimination have guided my life & work, I hope to carry these ideals forward into Parliament.”
BJP ने उन्हें “आउटसाइडर” कहा, लेकिन TMC ने जवाब दिया कि वे पेशेवर और प्रगतिशील हैं। Menaka Guruswamy ने पश्चिम बंगाल सरकार के लिए RG Kar rape case और ED के खिलाफ केस में भी कोर्ट में पेश हो चुकी हैं।
6 अप्रैल 2026: शपथ ग्रहण का ऐतिहासिक पल
6 अप्रैल 2026 को संसद भवन में Menaka Guruswamy ने संविधान की शपथ ली। 19 नए सदस्यों में वे शामिल थीं। Sansad TV ने इसे लाइव प्रसारित किया। LGBTQ+ समुदाय ने इसे “milestone” कहा। NDTV, WION, The Hindu, Economic Times – हर मीडिया ने इसे headline बनाया।
Menaka Guruswamy ने कहा कि वे West Bengal के लोगों और “We the People” की सेवा करेंगी।
प्रतिक्रियाएं: खुशी, उम्मीद और कुछ सवाल
LGBTQ+ एक्टिविस्ट्स ने इसे स्वागत किया। Naz Foundation की Anjali Gopalan ने कहा कि यह representation difference लाएगा। Chef Ritu Dalmia ने उन्हें “brilliant lawyer and good human being” बताया।
कुछ आलोचक पूछ रहे हैं कि representation से beyond क्या होगा – same-sex marriage legalization, anti-discrimination law आदि। Menaka Guruswamy ने पहले same-sex marriage case में भी दलील दी थी: “Young people want marriage… Do not let them experience what we have experienced.”
Menaka Guruswamy का भविष्य: संसद में क्या करेंगी?
राज्यसभा में Menaka Guruswamy constitutional law, civil liberties और LGBTQ+ equality पर फोकस करेंगी। Manipur extrajudicial killings case में Amicus Curiae के रूप में उनका काम जारी है। वे bureaucracy reform, RTE और human rights की लड़ाई को legislative level पर ले जा सकती हैं।
भारत में LGBTQ+ rights अभी भी चुनौतियों से भरे हैं – marriage equality नहीं मिला, workplace discrimination common है। Menaka Guruswamy की उपस्थिति इन मुद्दों को संसद की बहस में लाएगी।
LGBTQ+ representation in Indian politics: Historical context
भारत में queer representation नगण्य रहा है। Menaka Guruswamy पहली national level openly queer MP हैं। इससे पहले Delhi HC judge Saurabh Kirpal की नियुक्ति में देरी हुई। यह nomination diversity को बढ़ावा देगा।
चुनौतियां और आलोचनाएं
Menaka Guruswamy ने RSS के लिए भी कुछ केस लड़े हैं और student protesters के खिलाफ state action को support किया है (Hyderabad case)। कुछ लोग कहते हैं कि representation symbolic है। लेकिन उनका record constitutional rights की रक्षा का है।
एक नई शुरुआत
Menaka Guruswamy का राज्यसभा प्रवेश सिर्फ एक शपथ नहीं, बल्कि संदेश है – कि भारत का संविधान हर नागरिक के लिए है। Menaka Guruswamy Rajya Sabha MP बनकर उन्होंने साबित किया कि courtroom से Parliament तक, समानता की लड़ाई जारी रहेगी।


















