NCP Ajit Pawar: महाराष्ट्र राजनीति में बड़ा उलटफेर – अजित पवार की मौत और एनसीपी का नया भविष्य
नमस्कार दोस्तों, आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे विषय पर जो इन दिनों पूरे भारत में, खासकर महाराष्ट्र में ट्रेंड कर रहा है – NCP Ajit Pawar। अजित पवार, जो महाराष्ट्र के डिप्टी चीफ मिनिस्टर थे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख नेता, उनकी अचानक और दुखद मौत ने राजनीतिक दुनिया को हिला कर रख दिया है। 28 जनवरी 2026 को बारामती के पास प्लेन क्रैश में उनकी मौत हो गई, और अब उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम बन रही हैं। एनसीपी में मर्जर की चर्चाएं जोरों पर हैं, लेकिन मौत ने सब कुछ बदल दिया है।
अजित पवार का राजनीतिक सफर: परिवार से सत्ता तक का सफर
अजित अनंतराव पवार महाराष्ट्र की राजनीति के ‘दादा’ कहलाते थे। उनका जन्म 1959 में हुआ था, और वे शरद पवार के भतीजे थे। 1991 में पहली बार विधायक बने, और जल्द ही एनसीपी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1999 में जब शरद पवार ने कांग्रेस से अलग होकर एनसीपी बनाई, तो अजित ने पार्टी को मजबूत करने में बड़ा हाथ बटाया।
वे कई बार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे – 2012, 2019 और फिर 2023 में महायुति सरकार में। सिंचाई, वित्त, ग्रामीण विकास जैसे बड़े विभाग उनके पास रहे। अजित पवार को विकास कार्यों के लिए जाना जाता था, खासकर बारामती और पश्चिम महाराष्ट्र में। लेकिन उनके खिलाफ भी कई विवाद रहे, जैसे सिंचाई घोटाला के आरोप।
2023 में सबसे बड़ा ट्विस्ट आया जब अजित पवार ने चाचा शरद पवार से अलग होकर अपनी फैक्शन बनाई और बीजेपी-शिवसेना के साथ गठबंधन किया। चुनाव आयोग ने उन्हें असली एनसीपी माना, और ‘क्लॉक’ सिंबल भी उनके पास रहा। शरद पवार की फैक्शन को NCP(SP) नाम मिला। यह स्प्लिट महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव था।
अजित पवार का स्टाइल आक्रामक और सत्ता-केंद्रित था। वे कहते थे, “राजनीति में सत्ता जरूरी है।” उनकी मौत से पहले वे लोकल बॉडी इलेक्शन (जिला परिषद, पंचायत समिति) की तैयारी में जुटे थे। बारामती जा रहे थे जब हादसा हुआ। उनकी मौत ने एनसीपी को लीडरशिप क्राइसिस में डाल दिया।
प्लेन क्रैश की पूरी घटना: क्या हुआ था 28 जनवरी को?
28 जनवरी 2026 की सुबह, मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट से बारामती के लिए एक चार्टर्ड लर्नजेट 45XR उड़ा। प्लेन में अजित पवार, उनके पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर विदिप जाधव, दो क्रू मेंबर्स और पायलट थे। कुल 5 लोग सवार थे।
बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान खराब विजिबिलिटी के कारण पहली कोशिश फेल हुई। दूसरी अटेम्प्ट में प्लेन रनवे के किनारे क्रैश हो गया और आग लग गई। सभी की मौत हो गई। एविएशन मिनिस्ट्री ने कहा कि प्लेन ने एटीसी को कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया, और फिर आग लग गई। ब्लैक बॉक्स रिकवर हो चुका है, जांच तेजी से चल रही है।
अजित पवार उस दिन चार महत्वपूर्ण मीटिंग्स के लिए जा रहे थे – लोकल इलेक्शन से जुड़ी। यह हादसा महाराष्ट्र के लिए बड़ा सदमा था। तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया। प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं ने श्रद्धांजलि दी। लेकिन कुछ अफवाहें भी चलीं – क्या यह सिर्फ हादसा था? जांच से साफ होगा।
सुनेत्रा पवार का उदय: महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम
अजित पवार की मौत के बाद एनसीपी में सबसे बड़ा सवाल था – अब लीडरशिप कौन संभालेगा? जवाब मिला सुनेत्रा पवार के रूप में। 31 जनवरी 2026 को मुंबई में एनसीपी की लेजिस्लेचर पार्टी मीटिंग हुई, जहां सुनेत्रा को लीडर चुना गया। शाम 5 बजे राज भवन में गवर्नर ने उन्हें डिप्टी सीएम की शपथ दिलाई।
सुनेत्रा पवार (उम्र 62) राज्या सभा सदस्य हैं। वे अजित पवार की पत्नी हैं और राजनीति में सक्रिय रहीं। 2024 लोकसभा चुनाव में बारामती से लड़ीं, लेकिन हार गईं। अब वे महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम बन गई हैं। उनके पास एक्साइज, स्पोर्ट्स जैसे विभाग रहेंगे। फाइनेंस और प्लानिंग फिलहाल सीएम देवेंद्र फडणवीस के पास रहेंगे, क्योंकि बजट सेशन मार्च में है।
सुनेत्रा को पार्टी में चहगन भुजबल, प्रफुल पटेल जैसे सीनियर लीडर्स सपोर्ट कर रहे हैं। लेकिन वे MLA नहीं हैं, इसलिए 6 महीने में विधान परिषद या विधानसभा में आना होगा। उनकी नियुक्ति ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा दिया है। शरद पवार ने कहा कि वे इस बारे में नहीं जानते थे, लेकिन फैमिली में चर्चा नहीं हुई।
एनसीपी मर्जर की चर्चाएं: मौत ने रोका या तेज किया?
अजित पवार की मौत से पहले एनसीपी की दोनों फैक्शन – अजित वाली और शरद पवार वाली – के बीच मर्जर की बातें चल रही थीं। जयंत पाटिल और शरद पवार ने खुलासा किया कि फरवरी 12 को मर्जर का ऐलान होना था। चार महीने से बातचीत चल रही थी। अजित पवार खुद मर्जर के पक्ष में थे, ताकि पार्टी यूनाइटेड हो।
लेकिन मौत ने सब रोक दिया। शरद पवार ने कहा, “दुर्भाग्य से अजित हमें छोड़ गया, मर्जर की इच्छा पूरी नहीं हो सकी।” सुनील तटकरे ने मर्जर की अफवाहों को खारिज किया, कहा कि 17 जनवरी की मीटिंग लोकल इलेक्शन के लिए थी।
अब सुनेत्रा के आने के बाद मर्जर पर नई बहस है। कुछ लीडर्स कहते हैं कि सुनेत्रा पहले अपनी पोजीशन मजबूत करें, फिर मर्जर। शरद पवार की फैक्शन जल्दी मर्जर चाहती है। मराठवाड़ा जैसे इलाकों में अनिश्चितता है। कई MLAs मर्जर की मांग कर रहे हैं। अगर मर्जर होता है, तो महायुति मजबूत होगी, लेकिन इंडिया ब्लॉक को झटका लगेगा।
महाराष्ट्र राजनीति पर प्रभाव: महायुति और विपक्ष क्या करेंगे?
अजित पवार महायुति (बीजेपी, शिवसेना, एनसीपी) के महत्वपूर्ण स्तंभ थे। उनकी मौत से गठबंधन में अनिश्चितता आई। सुनेत्रा के डिप्टी सीएम बनने से स्थिरता आई है, लेकिन लॉन्ग टर्म में क्या होगा? 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।
बारामती, पुणे, मराठवाड़ा में एनसीपी की मजबूत पकड़ है। लोकल इलेक्शन में बदलाव आ सकता है। विपक्ष में कांग्रेस और NCP(SP) को फायदा मिल सकता है अगर मर्जर नहीं हुआ। डायनेस्टिक पॉलिटिक्स फिर चर्चा में आई – पवार फैमिली की विरासत।
सोशल मीडिया पर #NCPAjitPawar, #SunetraPawar ट्रेंड कर रहे हैं। लोग शोक मना रहे हैं, मर्जर पर डिबेट कर रहे।
एनसीपी का इतिहास संक्षेप में
एनसीपी 1999 में बनी। शरद पवार ने सोनिया गांधी के खिलाफ विदेशी मूल का मुद्दा उठाया। अजित ने पार्टी को ग्राउंड लेवल पर मजबूत किया। 2023 स्प्लिट बड़ा था। अब मौत ने पुरानी यादें ताजा कर दीं।
भविष्य की संभावनाएं
-
अगर मर्जर हुआ: एनसीपी मजबूत, महायुति अजेय।
-
नहीं हुआ: फैक्शनल फाइट, सुनेत्रा की चुनौती।
-
सुनेत्रा का रोल: पार्टी को एकजुट रखना।
-
2027 चुनाव: बड़ा फैक्टर।


















