Pawan Khera Congress का आरोप: क्या कहा था प्रेस कॉन्फ्रेंस में?
5 अप्रैल 2026 को पवन खेड़ा ने दो प्रेस कॉन्फ्रेंस किए – एक दिल्ली में और दूसरा गुवाहाटी में। उन्होंने दावा किया कि रिनिकी भुयान शर्मा के पास भारत के अलावा यूएई, मिस्र और एंटीगुआ एंड बारबुडा के पासपोर्ट हैं। साथ ही उन्होंने कुछ दस्तावेज दिखाए, जिनमें दुबई की प्रॉपर्टी और अमेरिका (वायोमिंग) में रजिस्टर्ड कंपनी का जिक्र था। खेड़ा ने कहा, “यह जानकारी चुनावी हलफनामे में नहीं दी गई है। यह सार्वजनिक हित का मुद्दा है। हम जल्द ही और सबूत पेश करेंगे।”
Pawan Khera Congress के इस बयान ने तुरंत वायरल होकर पूरे देश में हलचल मचा दी। कांग्रेस ने इसे “भ्रष्टाचार का पर्दाफाश” बताया। पवन खेड़ा ने कहा कि यह सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग की कहानी है। उन्होंने चुनौती दी – “अगर गलत है तो मुकदमा करें, लेकिन जवाब तो दीजिए।”
लेकिन आरोपों के साथ-साथ दस्तावेजों की सच्चाई पर सवाल भी उठने लगे। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि मिस्र का पासपोर्ट फर्जी लगता है – फॉन्ट गलत, नंबर पैटर्न मैच नहीं कर रहा। बाद में मिस्र दूतावास ने भी स्पष्ट किया कि वह दस्तावेज जाली है। फिर भी Pawan Khera Congress ने अपना स्टैंड मजबूत रखा।
रिनिकी भुयान शर्मा का पलटवार और एफआईआर
आरोप लगने के कुछ घंटों बाद ही रिनिकी भुयान शर्मा ने गुवाहाटी के क्राइम ब्रांच थाने में एफआईआर दर्ज कराई। उन्होंने आरोपों को “पूरी तरह झूठा, एआई जेनरेटेड और फोटोशॉप्ड” बताया। एफआईआर में पवन खेड़ा समेत अन्य पर धारा 14 के तहत केस दर्ज हुआ – फॉर्जरी, डिफेमेशन, क्रिमिनल कॉन्स्पिरेसी आदि।
रिनिकी ने कहा, “मैंने कभी तीन पासपोर्ट नहीं रखे। सबूत पेश करो या अदालत में मिलेंगे।” हिमंता सरमा ने भी तीखा हमला बोलते हुए कहा, “कल तक ‘अरेस्ट करो’ कह रहे थे, आज पुलिस गई तो हैदराबाद भाग गए।” उन्होंने “पेड़ा बना दूंगा” और “पाताल से भी निकाल लेंगे” जैसी बातें कहीं, जो वायरल हो गईं।
7 अप्रैल 2026: असम-दिल्ली पुलिस का छापा और खेड़ा का ‘गायब’ होना
7 अप्रैल को असम पुलिस की चार सदस्यीय टीम दिल्ली पहुंची। निजामुद्दीन ईस्ट स्थित पवन खेड़ा के घर पर छापा पड़ा। लेकिन खेड़ा घर पर नहीं थे। पुलिस ने कुछ “इनक्रिमिनेटिंग मटेरियल” जब्त किया, लेकिन डिटेल्स नहीं बताईं। असम पुलिस के डीसीपी ने कहा, “हम उन्हें ट्रेस कर रहे हैं।”
Pawan Khera Congress की तरफ से जयराम रamesh ने इसे “राज्य तंत्र का दुरुपयोग” बताया। उन्होंने ट्वीट किया, “हिमंता सरमा डिस्टर्ब्ड, डेस्परेट और रैटल्ड हैं। विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश है।” मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी केंद्र से जांच की मांग की।
दूसरी तरफ, खबरें आईं कि पवन खेड़ा हैदराबाद चले गए थे। रिपब्लिक टीवी के कैमरे में कैद हुआ वीडियो वायरल हुआ, जिसमें खेड़ा अपनी पत्नी के साथ कार में लेटे हुए दिखे, जैसे पुलिस से बचने की कोशिश कर रहे हों। असम सीएम ने कहा, “वे हैदराबाद भाग गए।” अब हैदराबाद में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
दोनों पक्षों की राजनीतिक प्रतिक्रिया: कांग्रेस vs बीजेपी
कांग्रेस का पक्ष (Pawan Khera Congress स्टैंड): पार्टी ने इसे “जनहित का सवाल” बताया। सुप्रिया श्रीनाते ने कहा, “हिमंता को जवाब देना चाहिए, न कि पुलिस भेजना।” कांग्रेस का आरोप है कि असम पुलिस का इस्तेमाल चुनावी हथियार के रूप में किया जा रहा है। पार्टी ने कहा कि अगर सबूत गलत हैं तो अदालत फैसला करेगी, लेकिन सवाल पूछने का अधिकार किसी से छीना नहीं जा सकता।
बीजेपी और हिमंता सरमा का पक्ष: हिमंता सरमा ने इसे “कांग्रेस की हताशा” करार दिया। उन्होंने कहा कि असम चुनाव 2026 में कांग्रेस के पास कोई एजेंडा नहीं है, इसलिए व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं। रिनिकी ने कहा, “मैड डॉग ने उन्हें काट लिया है।” बीजेपी ने आरोपों को “फेक न्यूज़ और AI फॉर्जरी” बताया।
2026 असम विधानसभा चुनाव का बैकग्राउंड और इस विवाद का असर
असम में 2026 के चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं। हिमंता सरमा बीजेपी के चेहरे हैं और विकास, सांप्रदायिक सद्भाव, CAA आदि पर उनका रिकॉर्ड पार्टी का बड़ा हथियार है। कांग्रेस विपक्ष में है और राहुल गांधी-प्रियंका की यात्राओं के बावजूद असम में मजबूत नहीं दिख रही। Pawan Khera Congress का यह विवाद ठीक चुनाव प्रचार के आखिरी चरण में आया है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला:
- कांग्रेस को “फेक न्यूज़” फैलाने का तमगा दे सकता है।
- हिमंता सरमा को सहानुभूति दिला सकता है – “परिवार पर हमला”।
- लेकिन अगर कोई सच्चाई निकली तो बीजेपी को नुकसान भी हो सकता है।
सोशल मीडिया पर #PawanKheraCongress, #PassportRow, #HimantaVsKhera ट्रेंड कर रहे हैं। कुछ यूजर्स खेड़ा को “हीरो” बता रहे हैं, तो कुछ “फरार” कह रहे हैं।
पवन खेड़ा का राजनीतिक बैकग्राउंड: कांग्रेस का आक्रामक चेहरा
पवन खेड़ा कांग्रेस के सबसे मुखर प्रवक्ताओं में से एक हैं। वे अक्सर बीजेपी पर तीखे हमले करते हैं। पहले वे एनसीपी में थे, फिर कांग्रेस जॉइन किए। उनकी स्टाइल आक्रामक है – प्रेस कॉन्फ्रेंस, ट्वीट्स और टीवी डिबेट में कभी पीछे नहीं हटते। इस बार भी उन्होंने कहा था, “सबूत आने वाले हैं।” लेकिन अब तक और सबूत नहीं आए, जिससे पार्टी पर दबाव बढ़ गया है।
क्या यह राजनीतिक vendetta है या genuine मुद्दा?
निष्पक्ष विश्लेषण करें तो:
- दस्तावेजों में फॉर्जरी के सबूत मिले हैं (फॉन्ट, नंबरिंग)।
- मिस्र दूतावास ने जाली पासपोर्ट कहा।
- लेकिन सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता जरूरी है। अगर हलफनामे में गलती हुई तो कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
- दूसरी तरफ, पुलिस कार्रवाई की टाइमिंग संदिग्ध है – चुनाव से पहले।
Pawan Khera Congress को यह सबक मिल सकता है कि आरोप लगाने से पहले 100% वेरिफिकेशन जरूरी है।
पब्लिक ओपिनियन और सोशल मीडिया रिएक्शन
X (ट्विटर) पर हजारों पोस्ट हैं। एक यूजर ने लिखा, “पवन खेड़ा अब पाताल में भी नहीं बचेगा।” दूसरा बोला, “कांग्रेस फिर फेक न्यूज़ पर फंस गई।” कुछ ने कहा, “परिवार पर हमला गलत है, लेकिन जवाब जरूर दो।” युवा वोटर्स इसे “ड्रामा” बता रहे हैं, जबकि असम के स्थानीय लोग हिमंता सरमा के साथ खड़े दिख रहे हैं।
Pawan Khera Congress विवाद क्या सिखाता है?
यह मामला भारतीय राजनीति की दो सच्चाइयां उजागर करता है – एक, विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश; दूसरी, बिना सबूत के आरोप लगाने का खतरा। Pawan Khera Congress अब कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर फंस चुके हैं। असम चुनाव 2026 का नतीजा इस विवाद से भी प्रभावित होगा।


















