पंजाब और हरियाणा की सीमा पर स्थित शंभू हाईवे और खनौरी बॉर्डर पर पिछले 13 महीनों से किसानों का आंदोलन जारी था। किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी सहित कई मांगों को लेकर डटे हुए थे।
हाल ही में, पुलिस कार्रवाई के बाद इस हाईवे को खोल दिया गया है। पंजाब और हरियाणा पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर बैरिकेड्स हटाए और रास्ता साफ किया। इस फैसले से जहां एक ओर आम नागरिकों और व्यापारियों को राहत मिली है, वहीं किसानों में नाराज़गी भी देखी जा रही है।
हाईवे खुलने की प्रक्रिया
पंजाब और हरियाणा पुलिस ने बुधवार रात से ही हाईवे को साफ करने का अभियान शुरू किया था। जेसीबी मशीनों की मदद से बैरिकेड्स हटाए गए, और किसानों के अस्थायी ढांचों को पुलिस ने ज़ब्त कर लिया। गुरुवार सुबह तक शंभू-अंबाला हाईवे पूरी तरह यातायात के लिए खोल दिया गया।
हरियाणा पुलिस ने अपने क्षेत्र में सीमेंट के अवरोधकों, लोहे की कीलें और तारों को हटाया। वहीं, पंजाब पुलिस ने खनौरी बॉर्डर से किसानों के अस्थायी ढांचे हटाकर रास्ता साफ करना शुरू किया। हालांकि, कई किसान नेता इस कार्रवाई के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं।
#BREAKING: After 13 months Shambhu Border opens for the commuters. pic.twitter.com/77Y87b9SmW
— Akashdeep Thind (@thind_akashdeep) March 20, 2025
किसानों की मांगें और आंदोलन की पृष्ठभूमि
किसानों का यह आंदोलन मुख्य रूप से केंद्र सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर था। इसके अलावा, उन्होंने बीमा योजनाओं, कर्ज माफी और अन्य कृषि नीतियों में सुधार की मांग भी रखी।
यह आंदोलन फरवरी 2024 में तब शुरू हुआ जब किसानों ने दिल्ली कूच की योजना बनाई, लेकिन पुलिस ने उन्हें पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर ही रोक दिया। इसके बाद, किसान लंबे समय तक हाईवे पर डटे रहे और वहां अस्थायी ढांचे बना लिए।
पुलिस कार्रवाई और विरोध प्रदर्शन
बुधवार को पंजाब पुलिस ने शंभू बॉर्डर से प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए बड़े पैमाने पर कार्रवाई की। इस दौरान करीब 1300 किसानों को हिरासत में लिया गया। इनमें से कई को बाद में छोड़ दिया गया, लेकिन कुछ प्रमुख किसान नेताओं को अब भी जेल में रखा गया है।
मोगा, फरीदकोट, तरनतारन और अन्य जिलों में पुलिस और किसानों के बीच झड़पें हुईं। कई जगहों पर किसानों ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ धरना दिया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने किसानों से सहानुभूति जताई लेकिन हाईवे खोलने को ज़रूरी बताया। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को इस बंद से भारी नुकसान हो रहा था।
वहीं, विपक्षी दलों ने सरकार पर किसानों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया। बीजेपी सरकार पर भी यह सवाल उठे कि वे MSP पर ठोस निर्णय क्यों नहीं ले रही।
सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। कुछ लोग पुलिस की कार्रवाई को सही ठहरा रहे हैं, जबकि कई लोग किसानों के समर्थन में खड़े हैं।
#ShambhuBorder और #FarmersProtest फिर से ट्विटर पर ट्रेंड करने लगे। कई वायरल वीडियो और पोस्ट में पुलिस की कार्रवाई को लेकर बहस हो रही है।
निष्कर्ष
शंभू हाईवे खुलने के बावजूद, किसान आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। किसानों ने अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखने की बात कही है। वहीं, सरकार ने दोबारा बातचीत करने का संकेत दिया है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह आंदोलन किस दिशा में जाता है और क्या सरकार और किसान किसी समझौते पर पहुँच पाते हैं।