India Republic Day 2026: एक ऐतिहासिक अवलोकन
गणतंत्र दिवस का इतिहास 26 जनवरी 1950 से जुड़ा है, जब भारत का संविधान लागू हुआ। डॉ. भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता वाली संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान अपनाया, लेकिन इसे 26 जनवरी को लागू किया गया क्योंकि 1930 में इसी दिन कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी। भारत एक संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
India Republic Day हर साल दिल्ली के कर्तव्य पथ (पहले राजपथ) पर भव्य परेड के साथ मनाया जाता है। राष्ट्रपति देश का राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं, प्रधानमंत्री शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि देते हैं, और फिर परेड शुरू होती है। इस वर्ष, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुबह 10 बजे ध्वज फहराया। परेड लगभग 90 मिनट चली, जिसमें सैन्य टुकड़ियां, झांकियां, फ्लाईपास्ट और सांस्कृतिक प्रदर्शन शामिल थे।
इस साल की थीम “150 Years of Vande Mataram” है, जो राष्ट्रीय गान की विरासत को सम्मानित करती है। साथ ही, आत्मनिर्भर भारत और सैन्य आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया। परेड में पहली बार ‘बैटल ऐरे फॉर्मेट’ में सेना की टुकड़ियां शामिल हुईं, जो युद्ध की तैयारियों को दर्शाती हैं।

मुख्य अतिथि: यूरोपीय संघ के नेता
2026 में मुख्य अतिथि दो हैं – यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन। यह भारत-यूरोपीय संघ के मजबूत संबंधों का संकेत है। दोनों नेताओं ने परेड में भाग लिया, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया। यह पहली बार है जब EU के दो शीर्ष नेता एक साथ मुख्य अतिथि बने।
यह चुनाव भारत की विदेश नीति को दर्शाता है – यूरोप के साथ व्यापार, प्रौद्योगिकी और रक्षा सहयोग बढ़ाना। मुख्य अतिथियों की परंपरा 1950 से चली आ रही है, जब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो पहले मुख्य अतिथि थे।
परेड की प्रमुख हाइलाइट्स
कर्तव्य पथ पर परेड की शुरुआत सैन्य बैंड से हुई। भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की टुकड़ियां मार्च पास्ट में शामिल हुईं। विशेष आकर्षण रहा ट्राई-सर्विस टेब्लो ‘ऑपरेशन सिंदूर’, जिसमें अपाचे हेलीकॉप्टर, ब्रह्मोस मिसाइल और धनुष गन सिस्टम दिखाए गए। यह टेब्लो भारत की सैन्य क्षमता और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (काल्पनिक अभियान) को प्रदर्शित करता है।
वायुसेना का फ्लाईपास्ट शानदार रहा – राफेल, सुखोई-30, तेजस और हेलीकॉप्टरों ने आकाश में तिरंगा बनाया। लगभग 29 विमानों ने हिस्सा लिया।
सांस्कृतिक भाग में 100 से अधिक कलाकारों ने “विविधता में एकता” पर प्रदर्शन किया। बैक्ट्रियन ऊंट, कुत्ते और पतंगों वाली पशु टुकड़ी ने भी आकर्षित किया। दर्शक दीर्घाओं के नाम देश की प्रमुख नदियों – गंगा, गोदावरी आदि – पर रखे गए, जो भारत की सभ्यता को समर्पित है।
झांकियां इस बार 30 से अधिक थीं – 16 राज्यों की, 9 केंद्रीय मंत्रालयों की। उत्तर प्रदेश की झांकी राम मंदिर और सांस्कृतिक विरासत पर केंद्रित थी, जबकि अन्य राज्यों ने लोक कला, पर्यावरण और डिजिटल इंडिया दिखाया। वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर दुर्लभ कलाकृतियां और पेंटिंग्स प्रदर्शित की गईं।




















