Sheikh Hasina बांग्लादेश की सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रह चुकी नेता हैं। उनका जन्म 28 सितंबर 1947 को हुआ था। वे बांग्लादेश के संस्थापक और राष्ट्रीय नायक शेख मुजीबुर रहमान की सबसे बड़ी बेटी हैं। 1971 के मुक्ति संग्राम में भारत ने बांग्लादेश की मदद की थी, और शेख हसीना हमेशा इसे याद रखती हैं। इसी वजह से उनके शासनकाल में भारत-बांग्लादेश के रिश्ते काफी मजबूत रहे।
1975 में एक सैन्य तख्तापलट में उनके पिता, मां और भाई-बहनों की हत्या कर दी गई। शेख हसीना उस समय विदेश में थीं, इसलिए बच गईं। 1981 में निर्वासन से लौटकर उन्होंने अवामी लीग की कमान संभाली। 1996-2001 और फिर 2009 से 2024 तक वे प्रधानमंत्री रहीं। उनके समय में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी – जीडीपी ग्रोथ 7% से ज्यादा रही, गरीबी घटी, महिलाओं की शिक्षा और नौकरियां बढ़ीं। उन्होंने ‘डिजिटल बांग्लादेश’ का सपना दिखाया और इंटरनेट, टेक्नोलॉजी को विकास का हथियार बनाया।

लेकिन उनकी आलोचना भी कम नहीं हुई। विपक्षी पार्टियां जैसे बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी पर दमन के आरोप लगे। मानवाधिकार संगठनों ने हजारों लोगों की गिरफ्तारी, गायब होने और अन्यायपूर्ण सजाओं की बात कही। 2018 और 2024 के चुनावों को कई लोगों ने ‘धांधलीपूर्ण’ कहा। शेख हसीना को समर्थक ‘मां’ कहते हैं, जबकि विरोधी ‘तानाशाह’। भारत में उन्हें इसलिए पसंद किया जाता है क्योंकि उन्होंने सीमा विवाद सुलझाए, व्यापार बढ़ाया और आतंकवाद पर सहयोग किया।
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2024 का बड़ा विद्रोह: सत्ता से कैसे बेदखल हुईं शेख हसीना?
2024 बांग्लादेश के लिए बहुत भयानक साल था। सब कुछ सरकारी नौकरियों में कोटा (आरक्षण) के खिलाफ छात्रों के छोटे प्रदर्शन से शुरू हुआ। लेकिन जल्द ही यह शेख हसीना सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन बन गया। जुलाई-अगस्त 2024 में सड़कों पर लाखों लोग उतरे। सेना ने हस्तक्षेप किया, और शेख हसीना को इस्तीफा देना पड़ा। इस दौरान 1400 से ज्यादा लोग मारे गए। शेख हसीना पर ‘जनसंहार’ के आरोप लगे।
विद्रोह के बाद नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस की अगुवाई में अंतरिम सरकार बनी। शेख हसीना भारत भाग आईं और दिल्ली में रहने लगीं। नवंबर 2024 में बांग्लादेश की एक अदालत ने उन्हें अनुपस्थिति में फांसी की सजा सुनाई। अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा, उसके कई नेता जेल में हैं। भारत ने प्रत्यर्पण की मांग को अब तक नहीं माना। यह सब भारत के लिए मुश्किल स्थिति थी – एक तरफ पुरानी दोस्त शेख हसीना, दूसरी तरफ नई सरकार के साथ रिश्ते बनाए रखने की जरूरत।

23 जनवरी 2026: दिल्ली से पहला सार्वजनिक संदेश – क्या कहा शेख हसीना ने?
23 जनवरी 2026 को दिल्ली के फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब (या इसी तरह के प्रेस क्लब) में एक कार्यक्रम हुआ। वहां शेख हसीना का प्री-रिकॉर्डेड ऑडियो संदेश चलाया गया। यह उनका निर्वासन के बाद पहला सार्वजनिक बयान था। लाखों लोगों ने इसे ऑनलाइन सुना।
भाषण में शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश अब “खून से लथपथ” है और “गर्त में गिर रहा है”। उन्होंने अंतरिम सरकार को “फासीवादी”, “हत्यारा”, “भ्रष्ट” और “सत्ता-लोलुप” बताया। खासकर मुहम्मद यूनुस पर जमकर हमला किया – उन्हें “सूदखोर”, “मनी लॉन्डरर”, “लुटेरा” और “गद्दार” कहा।
उन्होंने दावा किया कि 2024 का विद्रोह एक “साजिश” था। अब बांग्लादेश में लोकतंत्र खत्म हो गया है, मानवाधिकार कुचले जा रहे हैं, प्रेस की आजादी गई, महिलाओं पर यौन हमले हो रहे हैं, धार्मिक अल्पसंख्यकों (खासकर हिंदुओं) पर अत्याचार हो रहा है, और कानून-व्यवस्था ध्वस्त है।
शेख हसीना ने बांग्लादेश के लोगों से अपील की – “उठ खड़े हो जाओ, संविधान की रक्षा करो।” संयुक्त राष्ट्र से निष्पक्ष जांच की मांग की। यह भाषण 12 फरवरी 2026 को होने वाले चुनावों से ठीक पहले आया, जब अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोका गया है। उनके शब्दों ने समर्थकों में जोश भरा, लेकिन विरोधियों को और गुस्सा दिलाया।
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बांग्लादेश सरकार की तीखी प्रतिक्रिया: ‘शॉक्ड’, ‘सरप्राइज्ड’ और कड़ी चेतावनी
25 जनवरी 2026 को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी किया। कहा गया कि वे “आश्चर्यचकित” और “स्तब्ध” हैं कि भारत ने शेख हसीना को दिल्ली में ऐसा भाषण देने की इजाजत दी। इसे “हेट स्पीच” और “आतंकवाद को बढ़ावा” बताया।
मंत्रालय ने कहा कि शेख हसीना ने अंतरिम सरकार को हटाने की खुली अपील की और अपने समर्थकों को उकसाया। यह बांग्लादेश की संप्रभुता पर हमला है। भारत को “खतरनाक मिसाल” कायम करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि इससे द्विपक्षीय संबंध “गंभीर रूप से प्रभावित” हो सकते हैं।
बांग्लादेश ने फिर से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई, लेकिन भारत की तरफ से अभी कोई जवाब नहीं आया। ढाका में विरोध प्रदर्शन हुए, जहां लोग भारत विरोधी नारे लगा रहे थे। यह सब भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नई दरार डाल सकता है।
भारत पर क्या असर पड़ रहा है? ट्रेंडिंग क्यों है Sheikh Hasina?
भारत में Sheikh Hasina इसलिए ट्रेंडिंग हैं क्योंकि:
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वे भारत की धरती से बोल रही हैं, जो पड़ोसी देश की सरकार को चुनौती दे रहा है।
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भारत ने हमेशा शेख हसीना को समर्थन दिया, लेकिन अब नई सरकार के साथ बैलेंस बनाना पड़ रहा है।
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बांग्लादेश से हिंदू अल्पसंख्यक भारत आ रहे हैं, और शेख हसीना ने भाषण में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।
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सोशल मीडिया पर #SheikhHasina, #DelhiSpeech जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। कुछ लोग उन्हें सपोर्ट करते हैं, कुछ कहते हैं कि भारत को तटस्थ रहना चाहिए।
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आर्थिक रूप से दोनों देशों का व्यापार बड़ा है (10 अरब डॉलर से ज्यादा), लेकिन राजनीतिक तनाव से नुकसान हो सकता है। सीमा पर तनाव बढ़ने का डर है।




















