ईमान जैनब मزاری-हजीर (Imaan Zainab Mazari-Hazir), जिन्हें आमतौर पर Imaan Mazari कहा जाता है, पाकिस्तान की एक प्रमुख ह्यूमन राइट्स लॉयर और एक्टिविस्ट हैं। वो पाकिस्तान की पूर्व फेडरल मिनिस्टर और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की नेता शिरीन मزاری की बेटी हैं। शिरीन मزاری खुद भारत के खिलाफ कई बार बयान दे चुकी हैं, खासकर कश्मीर मुद्दे पर, लेकिन उनकी बेटी ईमान का रुख थोड़ा अलग है – वो पाकिस्तान की अपनी सरकार और खासकर मिलिट्री एस्टेब्लिशमेंट की खुलकर आलोचना करती हैं।
ईमान ने एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है और प्रो-बोनो (फ्री) वकील के तौर पर काम करती हैं। उन्होंने पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील मामलों को हैंडल किया है, जैसे:
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बलूचिस्तान में एनफोर्स्ड डिसअपीयरेंस (लोगों को गायब करने) के केस
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बलूच एक्टिविस्ट महरंग बलोच का केस
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पत्रकारों, ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट्स और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़े मामले
ईमान को पाकिस्तान में “डिफायंस की प्रतीक” कहा जाता है। वो कभी दबाव में नहीं आईं। सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट्स अक्सर वायरल होती हैं, जहां वो पाक आर्मी की पॉल खोलती हैं।

क्या हुआ था? पूरी घटना का टाइमलाइन (Timeline of Imaan Mazari Case)
ये सब शुरू हुआ अगस्त 2025 में, जब ईमान और उनके पति हादी अली चट्ठा पर प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट (PECA) के तहत केस दर्ज किया गया। आरोप था कि उनकी सोशल मीडिया पोस्ट्स “एंटी-स्टेट” हैं और राज्य व सुरक्षा संस्थाओं को बदनाम करती हैं।
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जनवरी 2026: पाकिस्तान मिलिट्री के स्पोक्सपर्सन लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईमान की एक पोस्ट का जिक्र किया और कहा कि “डेमोक्रेसी और ह्यूमन राइट्स के नाम पर टेररिज्म को बढ़ावा देने वाले छिपे हुए एलिमेंट्स” काम कर रहे हैं।
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जनवरी 2026 (मध्य): कोर्ट में सुनवाई के दौरान ईमान ने मेडिकल ग्राउंड पर छूट मांगी (वो प्रेग्नेंट हैं), लेकिन कोर्ट ने खारिज कर दिया।
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23 जनवरी 2026: ईमान और हादी को इस्लामाबाद में कोर्ट जाते वक्त गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने रिपोर्टर्स के फोन भी छीन लिए।
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24-25 जनवरी 2026: सेशंस कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराया। सजा – कुल 17 साल की कैद (कुछ रिपोर्ट्स में 10 साल प्रत्येक, लेकिन ज्यादातर 17 साल कुल) और भारी जुर्माना।
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26 जनवरी 2026: इस्लामाबाद, कराची में वकीलों और सिविल सोसाइटी ने विरोध प्रदर्शन किए। प्रेस क्लब के बाहर पुलिस ने रास्ते ब्लॉक कर दिए।
ईमान ने कोर्ट में वीडियो लिंक पर कहा, “ये पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान में किसी को गैरकानूनी तरीके से जेल में डाला गया है।” उन्होंने कस्टडी में दुर्व्यवहार का भी आरोप लगाया।

भारत में क्यों ट्रेंड कर रही हैं Imaan Mazari?
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इंडो-पाक कंट्रास्ट: भारत में अभिव्यक्ति की आजादी पर बहस होती रहती है, लेकिन पाकिस्तान में मिलिट्री की आलोचना पर इतनी सख्त कार्रवाई देखकर भारतीय यूजर्स इसे “फ्रीडम ऑफ स्पीच” का मुद्दा मानते हैं।
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शिरीन मزاری का बैकग्राउंड: ईमान की मां शिरीन अक्सर भारत-विरोधी बयान देती हैं। अब उनकी बेटी पाकिस्तान की मिलिट्री के खिलाफ बोलने पर जेल में है – ये आयरनी भारतीयों को पसंद आती है।
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ह्यूमन राइट्स एंगल: अमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी संस्थाओं ने इसे “ज्यूडिशियल हरेसमेंट” कहा है। भारत में भी ह्यूमन राइट्स की चर्चा होती है, तो ये खबर रिलेट करती है।
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सोशल मीडिया वायरल: X (ट्विटर) पर भारतीय यूजर्स #ImaanMazari को ट्रेंड करा रहे हैं। कई मीम्स, वीडियोज और पोस्ट्स वायरल हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और प्रभाव
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अमनेस्टी इंटरनेशनल: पाकिस्तान सरकार से “ज्यूडिशियल हरेसमेंट” खत्म करने की मांग।
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ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान: सजा को “दमन का उदाहरण” बताया।
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वकीलों का विरोध: इस्लामाबाद में 3 दिन की स्ट्राइक, कराची में प्रोटेस्ट।
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ईमान की प्रेग्नेंसी: कई एक्टिविस्ट्स ने कहा कि गर्भवती महिला को इस तरह सजा देना अमानवीय है।
ये मामला पाकिस्तान में PECA कानून की आलोचना को बढ़ावा दे रहा है, जो सोशल मीडिया पर “एंटी-स्टेट” कंटेंट को टारगेट करता है।
ईमान मزاری केस से क्या सीख मिलती है?
ये सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कहानी है। जहां:
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ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स को जेल हो रही है।
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सोशल मीडिया पर आलोचना “एंटी-स्टेट” हो जाती है।
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मिलिट्री की आलोचना सबसे बड़ा “क्राइम” बन जाती है।




















