Punjab and Haryana High Court भारत की न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कोर्ट पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के मामलों के अलावा कई सामाजिक और कानूनी मुद्दों पर फैसले सुनाकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बनता है। जनवरी 2026 के अंत तक, इस कोर्ट ने कई ट्रेंडिंग मामलों पर ध्यान केंद्रित किया, जिनमें अपराध नियंत्रण, महिलाओं के अधिकार, साइबर क्राइम, पशु क्रूरता और प्रशासनिक सुधार प्रमुख हैं। सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है पंजाब में बढ़ती “एक्सटॉर्शन इंडस्ट्री” पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी। इस ब्लॉग में हम इन प्रमुख मुद्दों को विस्तार से समझेंगे, तथ्यों के साथ विश्लेषण देंगे और देखेंगे कि ये फैसले समाज पर क्या प्रभाव डाल सकते हैं। फोकस कीवर्ड Punjab and Haryana High Court को स्वाभाविक रूप से शामिल किया गया है।
पंजाब में “नई एक्सटॉर्शन इंडस्ट्री” पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जनवरी 2026 के अंत में Punjab and Haryana High Court ने पंजाब में लक्षित हत्याओं और एक्सटॉर्शन रैकेट्स को “नई एक्सटॉर्शन इंडस्ट्री” का नाम दिया। कोर्ट ने मोहाली में कबड्डी प्रमोटर राणा बालाचौरिया की हत्या के मामले में स्वत: संज्ञान लिया, जहां शूटर्स ने दिनदहाड़े गोली मारी और भाग गए। कोर्ट ने पंजाब पुलिस से 7 दिनों के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी, जिसमें 2023 से अब तक की शूटिंग घटनाएं, गिरफ्तारियां, फरार आरोपियों की जानकारी, एक्सटॉर्शन रकम का ट्रेल और सोशल मीडिया पर अपराधों की महिमामंडन रोकने के कदम शामिल हैं।
कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई कि अपराधी भीड़ और पुलिस के सामने हत्याएं करते हैं, सीसीटीवी और मोबाइल वीडियो उपलब्ध होने के बावजूद पकड़े नहीं जाते। डीजीपी पंजाब को एफिडेविट दाखिल करने का आदेश दिया गया, जिसमें एक्सटॉर्शन के पैसे की वसूली, निवेश और सीसीटीवी कवरेज बढ़ाने की योजना हो।
यह मुद्दा ट्रेंडिंग क्यों है? पंजाब में गैंगवार, ड्रग्स और विदेशी गैंगस्टरों के नाम पर एक्सटॉर्शन का डर व्यापारियों और आम लोगों में फैला है। हाल के महीनों में कई व्यापारियों की हत्याएं एक्सटॉर्शन मना करने पर हुईं। कोर्ट की यह टिप्पणी पुलिस और राज्य सरकार पर दबाव डालती है कि कानून व्यवस्था मजबूत करें। यदि रिपोर्ट संतोषजनक नहीं आई, तो आगे सख्त कदम जैसे केंद्र की मदद मांग सकते हैं। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन रहा है।
साइबर फ्रॉड मामलों में सख्ती: सार्वजनिक विश्वास को नुकसान
Punjab and Haryana High Court ने साइबर फ्रॉड को “डिजिटल युग का बढ़ता खतरा” बताया और कई मामलों में बेल या समझौते से FIR क्वाश करने से इनकार किया। एक मामले में कोर्ट ने कहा कि साइबर क्राइम सार्वजनिक विश्वास और डिजिटल अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए इन्हें निजी विवाद की तरह नहीं देखा जा सकता।
उदाहरण के लिए, सोनीपत साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR में 14.8 लाख रुपये की ठगी के मामले में कोर्ट ने समझौते पर FIR खारिज करने से मना कर दिया। आरोपी पर फर्जी ट्रांसफर और बैंक खातों के दुरुपयोग का आरोप था। कोर्ट की यह सख्ती पुलिस को मजबूत जांच के लिए प्रेरित करेगी और लोगों को सतर्क बनाएगी। भारत में साइबर फ्रॉड बढ़ रहे हैं, ऐसे फैसले सुरक्षा बढ़ाने में मदद करेंगे।
विधवाओं के संपत्ति अधिकार: पुरानी रिवाजों पर संवैधानिक चोट
एक लैंडमार्क फैसले में Punjab and Haryana High Court ने विधवाओं को गैर-पूर्वज संपत्ति बेचने का पूरा अधिकार दिया। जस्टिस विरिंदर अग्रवाल ने 44 साल पुराने मामले में निचली अदालतों के फैसलों को पलट दिया और कहा कि लिंग आधारित पुरानी रिवाज (जैसे रिवाज-ए-आम) संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ हैं।
मेव समुदाय के एक मामले में विधवा ने पति की संपत्ति बेची, लेकिन रिश्तेदारों ने विरोध किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गैर-पूर्वज संपत्ति पर विधवा का पूरा अधिकार है और कोई रिवाज उसे रोक नहीं सकता। यह फैसला महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां पुरानी परंपराएं बाधा बनती हैं। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत समान अधिकारों को मजबूती मिली।
पशु क्रूरता पर स्वत: संज्ञान: गौशाला में मृत गायों का मामला
कोर्ट ने चंडीगढ़ की रायपुर कलां गौशाला में लगभग 50 गायों की मौत और शवों से खुर-सींग गायब होने पर स्वत: संज्ञान लिया। मीडिया रिपोर्ट्स में क्रूरता, लापरवाही और अवैध शव निपटान का जिक्र था। पोस्टमॉर्टम में पेट में प्लास्टिक और पॉलीथीन मिला। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की बेंच ने यूटी प्रशासन से जवाब मांगा।
यह फैसला पशु अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण पर महत्वपूर्ण है। पंजाब-हरियाणा में गौशालाओं की समस्या आम है, कोर्ट की निगरानी नीतिगत बदलाव ला सकती है।
अन्य प्रमुख फैसले और ट्रेंडिंग मुद्दे
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ब्यूरोक्रेटिक सुस्ती पर फटकार: कोर्ट ने कहा, “राज्य की देरी कोई दिव्य अधिकार नहीं है।” एक आपराधिक रिवीजन में देरी माफ करने से इनकार किया। सरकारी अधिकारियों को समय पर कार्रवाई की याद दिलाई।
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मनोवैज्ञानिक भर्ती पर स्टे: ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर्स के लिए 343 मनोवैज्ञानिकों की आउटसोर्सिंग पर स्टे मार्च 2026 तक बढ़ाया। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए।
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मॉडिफाइड वाहनों पर रोक: कोर्ट ने फ्रिवोलस याचिका को खारिज किया और भारी जुर्माने की चेतावनी दी।
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पंजाब केसरी प्रिंटिंग प्रेस मामला: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर एनजीटी जाने को कहा, लेकिन प्रिंटिंग प्रेस को काम करने की अनुमति दी।


















