सूर्य का गुस्सा और sun solar flares का तूफान
सूर्य, जो हमारी दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा स्रोत है, कभी-कभी अपनी ही शक्ति से हमें डराता भी है। फरवरी 2026 की शुरुआत में, सूर्य ने इतनी तेजी से sun solar flares छोड़ीं कि पूरी दुनिया, खासकर भारत में, यह खबर ट्रेंडिंग हो गई। 1 फरवरी से शुरू हुई यह गतिविधि अब तक की सबसे शक्तिशाली फ्लेयर्स में से एक है। ISRO ने चेतावनी जारी की है कि ये फ्लेयर्स रेडियो ब्लैकआउट का कारण बन सकती हैं, जिससे संचार, नेविगेशन और सैटेलाइट सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं।
सूर्य की सतह पर सनस्पॉट्स नाम के काले धब्बे बनते हैं, जहां चुंबकीय क्षेत्र बहुत मजबूत होते हैं। जब ये क्षेत्र टूटते या जुड़ते हैं, तो भारी मात्रा में ऊर्जा बाहर निकलती है – इसे sun solar flares कहते हैं। ये फ्लेयर्स X-रे, अल्ट्रावायलेट किरणें और चार्ज्ड कण छोड़ती हैं।
फरवरी 2026 में एक्टिव रीजन AR4366 (कभी-कभी 14366 भी कहा जाता है) ने कमाल कर दिया। इसने 1 फरवरी को X8.1 क्लास फ्लेयर छोड़ी, जो 2026 की अब तक की सबसे ताकतवर फ्लेयर है। इसके बाद 4 फरवरी को X4.2 क्लास फ्लेयर आई। इनसे पृथ्वी के वायुमंडल में बदलाव आया, और रेडियो सिग्नल प्रभावित हुए।
भारत में ISRO ने तुरंत अलर्ट जारी किया। उन्होंने बताया कि 50 से ज्यादा भारतीय सैटेलाइट्स पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि ये फ्लेयर्स कम्युनिकेशन और पेलोड्स को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

Sun Solar Flares क्या हैं? सरल भाषा में समझिए
Sun solar flares सूर्य की सतह पर होने वाले बड़े विस्फोट हैं। ये चुंबकीय ऊर्जा के अचानक रिलीज से होते हैं। सूर्य पर सनस्पॉट्स होते हैं – ये ठंडे और काले दिखते हैं क्योंकि वहां चुंबकीय क्षेत्र मजबूत होता है। जब ये क्षेत्र एक-दूसरे से टकराते या जुड़ते हैं, तो ऊर्जा फूट पड़ती है।
फ्लेयर्स की क्लासिफिकेशन:
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A, B, C: बहुत कमजोर
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M: मध्यम
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X: सबसे शक्तिशाली (X1 से X20 तक, संख्या जितनी बड़ी उतनी ताकत ज्यादा)
उदाहरण: X8.1 फ्लेयर X1 से 8 गुना ज्यादा शक्तिशाली होती है। फरवरी 2026 में AR4366 ने X8.1, X2.8, X1.6 और X4.2 जैसी फ्लेयर्स दीं।
ये फ्लेयर्स पृथ्वी तक पहुंचने में कुछ मिनट लगाते हैं। इससे आयनोस्फियर प्रभावित होता है, और HF रेडियो सिग्नल ब्लॉक हो जाते हैं – इसे रेडियो ब्लैकआउट कहते हैं। अगर कोरोनल मास इजेक्शन (CME) साथ आए, तो जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म्स होते हैं, जो ऑरोरा दिखाते हैं लेकिन पावर ग्रिड और सैटेलाइट्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

फरवरी 2026 की सबसे बड़ी घटनाएं: क्या हुआ?
1 फरवरी 2026 को सूर्य ने कमाल दिखाया। AR4366 से X1.0, फिर X8.1 (सबसे बड़ी), X2.8 और X1.6 फ्लेयर्स निकलीं। X8.1 शाम 6:37 PM ET (भारतीय समयानुसार लगभग 5 फरवरी की सुबह) पर पीक हुई। NASA के सोलर डायनामिक्स ऑब्जर्वेटरी ने इसे कैद किया।
इसके बाद 2 फरवरी को और फ्लेयर्स आईं, और 4 फरवरी को X4.2 क्लास फ्लेयर ने सबको चौंका दिया। कुल मिलाकर 24 घंटे में 18+ M-क्लास और कई X-क्लास फ्लेयर्स।
भारत में CESSI (IISER कोलकाता) ने SEVERE अलर्ट जारी किया। उन्होंने कहा कि X8.1 फ्लेयर से R3 लेवल रेडियो ब्लैकआउट हुआ, जो साउथ पैसिफिक में दिखा।
ISRO ने 50+ सैटेलाइट्स को मॉनिटर करने की बात कही। संचार, GPS, एविएशन और मिलिट्री ऑपरेशंस प्रभावित हो सकते हैं।
ISRO की चेतावनी और भारत पर असर
ISRO ने स्पष्ट कहा: सूर्य की यह गतिविधि रेडियो ब्लैकआउट का खतरा बढ़ा रही है। 50 से ज्यादा सैटेलाइट्स पर लगातार नजर रखी जा रही है। अगर CME पृथ्वी की ओर आए, तो पावर ग्रिड में इंडक्शन करंट्स से ब्लैकआउट हो सकता है।
भारत में प्रभाव:
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संचार: HF रेडियो, शॉर्टवेव सिग्नल ब्लॉक हो सकते हैं।
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GPS और नेविगेशन: एयरलाइंस, शिपिंग और ट्रांसपोर्ट प्रभावित।
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सैटेलाइट्स: ISRO के मिशन जैसे नेविगेशन, रिमोट सेंसिंग प्रभावित हो सकते हैं।
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पावर ग्रिड: बड़े स्टॉर्म से ट्रांसफॉर्मर डैमेज का खतरा।
लेकिन अच्छी बात: ISRO तैयार है। Aditya-L1 मिशन से सूर्य की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग हो रही है।
सूर्य की गतिविधि का इतिहास और साइकल
सूर्य का 11 साल का साइकल होता है। सोलर मैक्सिमम में सनस्पॉट्स और फ्लेयर्स ज्यादा होते हैं। सोलर साइकल 25 2019 में शुरू हुआ, 2025-2026 में पीक पर है।
पिछली बड़ी घटना: 1859 का कैरिंगटन इवेंट – टेलीग्राफ जल गए। 1989 में क्यूबेक में ब्लैकआउट। 2026 की फ्लेयर्स उससे छोटी हैं लेकिन मॉडर्न टेक्नोलॉजी के लिए खतरनाक।
आगे क्या? भविष्यवाणियां और सुरक्षा
NOAA और NASA का अनुमान: AR4366 अभी भी एक्टिव है, और और फ्लेयर्स आ सकती हैं। 5-6 फरवरी तक माइनर स्टॉर्म्स संभव।
सुरक्षा उपाय:
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सैटेलाइट्स को प्रोटेक्ट मोड में रखना।
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ग्रिड ऑपरेटर्स को अलर्ट।
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बैकअप कम्युनिकेशन सिस्टम।
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आम लोग: ज्यादा चिंता न करें, लेकिन रेडियो/इंटरनेट बैकअप रखें।




















