HPV Vaccination : HPV यानी Human Papillomavirus – यह एक वायरस है जो बहुत आम है। दुनिया भर में ज्यादातर लोग जीवन में कभी न कभी इससे संक्रमित हो जाते हैं, खासकर यौन संपर्क या त्वचा के संपर्क से। HPV के 200+ प्रकार हैं, लेकिन उनमें से कुछ (खासकर प्रकार 16 और 18) कैंसर पैदा कर सकते हैं। भारत में सर्वाइकल कैंसर के 80-85% मामले इन्हीं दो प्रकारों से होते हैं।
वायरस कैसे कैंसर बनाता है? HPV संक्रमण ज्यादातर खुद-ब-खुद ठीक हो जाता है (इम्यून सिस्टम इसे हटा देता है)। लेकिन अगर यह लंबे समय तक (वर्षों तक) बने रहे, तो वायरस कोशिकाओं के DNA में बदलाव लाता है। यह E6 और E7 प्रोटीन बनाता है जो हमारे p53 और Rb जैसे ट्यूमर सप्रेसर जीन को निष्क्रिय कर देता है। नतीजा – कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, प्रीकैंसरस लेसियन बनते हैं और फिर कैंसर।
HPV Vaccination कैसे काम करता है? यह वैक्सीन असली वायरस नहीं है! इसमें Virus-Like Particles (VLPs) होते हैं – यानी वायरस की बाहरी प्रोटीन शेल जैसा दिखता है, लेकिन अंदर कोई जेनेटिक मटेरियल नहीं। जब टीका लगता है, शरीर इसे खतरा समझकर एंटीबॉडीज बनाता है। बाद में असली HPV आए तो ये एंटीबॉडीज उसे तुरंत बेअसर कर देती हैं। इन्फेक्शन ही नहीं होता, तो कैंसर का रास्ता ही बंद हो जाता है।
भारत में इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन Gardasil 4 है (Merck & Co द्वारा बनाई गई) – यह quadrivalent है, यानी HPV प्रकार 6, 11, 16 और 18 से बचाव करती है। 6 और 11 जननांग वॉर्ट्स (genital warts) का कारण बनते हैं, जबकि 16 और 18 कैंसर के मुख्य जिम्मेदार।
क्यों 14 साल की उम्र? WHO की सिफारिश है कि 9-14 साल की लड़कियों में सिंगल डोज सबसे प्रभावी होती है। इस उम्र में इम्यून रिस्पॉन्स बहुत मजबूत होता है और ज्यादातर लड़कियां यौन सक्रियता से पहले होती हैं। वैक्सीनेशन से पहले एक्सपोजर नहीं हुआ तो सुरक्षा 93-100% तक पहुंच जाती है।
भारत में सर्वाइकल कैंसर की वर्तमान स्थिति – क्यों इतना जरूरी है HPV Vaccination
भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं का दूसरा सबसे आम कैंसर है (स्तन कैंसर के बाद)। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार:
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हर साल लगभग 1,25,000 नए मामले (कुछ रिपोर्ट्स में 80,000-1,27,000 तक)
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42,000 से 80,000 मौतें सालाना
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वैश्विक बोझ का एक बड़ा हिस्सा भारत पर – दुनिया के एक-तिहाई मामले यहां
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ग्रामीण इलाकों में स्थिति बदतर क्योंकि स्क्रीनिंग बहुत कम (केवल 1-2% महिलाओं का नियमित चेकअप)
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आर्थिक बोझ भी भारी – इलाज महंगा, परिवार टूटते हैं
लेकिन अच्छी खबर: यह बीमारी ज्यादातर रोकी जा सकती है। ऑस्ट्रेलिया में 2007 से HPV वैक्सीनेशन शुरू होने के बाद युवा महिलाओं में HPV इन्फेक्शन 22% से घटकर 1-2% रह गया। स्वीडन में 88% तक कैंसर रिस्क कम हुआ। भारत भी अब इसी राह पर है।
HPV Vaccination न सिर्फ सर्वाइकल कैंसर, बल्कि अन्य HPV-संबंधित कैंसर (एनल, ओरल, थ्रोट) से भी बचाव करता है। लड़कियों को वैक्सीनेट करने से समाज में वायरस का प्रसार कम होता है – लड़कों को भी अप्रत्यक्ष फायदा।
2026 का लेटेस्ट ब्रेकिंग न्यूज: फ्री HPV Vaccination ड्राइव की पूरी डिटेल
फरवरी 2025-26 में केंद्र सरकार (Union Health Ministry) ने ऐलान किया – मार्च 2026 से 90-दिन का विशेष अभियान शुरू। मुख्य बिंदु:
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टारगेट: 14 साल की लड़कियां (जो हर साल 14 साल की हो रही हैं)
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वार्षिक कवरेज: 1.15-1.2 करोड़ लड़कियां
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वैक्सीन: Gardasil 4 (quadrivalent)
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डोज: सिर्फ एक (सिंगल डोज रेजिमेंट, WHO-अनुमोदित)
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कहां: सरकारी स्वास्थ्य केंद्र, PHC, CHC, Ayushman Arogya Mandir आदि पर
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कैसे बुक: U-WIN पोर्टल/ऐप पर (CoWIN जैसा)
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कॉस्ट: पूरी तरह फ्री और वॉलंटरी
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सपोर्ट: GAVI से 2.6 करोड़ डोज, 1.5 करोड़ पहले से पहुंचे
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ट्रैकिंग: U-WIN डिजिटल प्लेटफॉर्म से हर लड़की का रिकॉर्ड
यह Universal Immunisation Programme का हिस्सा नहीं, बल्कि स्पेशल कैंपेन है। लेकिन भविष्य में Cervavac (भारतीय, Serum Institute) पर शिफ्ट हो सकता है।
राज्यों में तैयारी: तेलंगाना ने 4.6 लाख डोज खरीदे, फरवरी अंत या मार्च शुरुआत में शुरू। सिक्किम, पंजाब जैसे राज्य पहले से पायलट कर चुके हैं जहां कवरेज 95%+ रहा।
HPV Vaccination के बहुआयामी फायदे
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स्वास्थ्य: 90%+ सर्वाइकल कैंसर रोका जा सकता है। लंबे समय तक सुरक्षा (13-15 साल तक कोई कमजोरी नहीं दिखी)।
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आर्थिक: इलाज पर हजारों करोड़ बचेंगे। महिलाएं स्वस्थ रहकर काम, शिक्षा में योगदान देंगी।
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सामाजिक: महिलाओं का सशक्तिकरण – कैंसर फ्री जीवन = बेहतर करियर, परिवार।
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WHO 90-70-90 लक्ष्य: 90% लड़कियां 15 साल तक वैक्सीनेटेड, 70% स्क्रीनिंग, 90% ट्रीटमेंट।
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जनरेशनल इम्पैक्ट: 2040-50 तक भारत में सर्वाइकल कैंसर दुर्लभ हो सकता है।
PM मोदी ने Quad Cancer Moonshot में भी इस पर जोर दिया। यह “Swastha Nari” मिशन का हिस्सा है।
आम मिथक और सच्चाई – HPV Vaccination पर स्पष्ट जवाब
मिथक 1: वैक्सीन से बांझपन या गंभीर बीमारी होती है। सच्चाई: 500 मिलियन+ डोज दुनिया में लगीं। कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं। CDC, WHO, ICMR – सभी सुरक्षित मानते हैं।
मिथक 2: पुराने ट्रायल में मौतें हुईं (2009-10 केस)। सच्चाई: जांच में वैक्सीन से संबंध नहीं पाया गया। अब AEFI मॉनिटरिंग सख्त है – डॉक्टर मौजूद रहेंगे, 30 मिनट ऑब्जर्वेशन।
मिथक 3: 14 साल बाद फायदा नहीं। सच्चाई: सिंगल डोज 20 साल तक अच्छी सुरक्षा देती है, लेकिन पहले जितनी बेहतर।
मिथक 4: सिर्फ लड़कियों के लिए। सच्चाई: प्राथमिकता लड़कियों को क्योंकि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में ज्यादा, लेकिन लड़के भी प्राइवेट में लगवा सकते हैं।
साइड इफेक्ट्स: ज्यादातर हल्के – इंजेक्शन वाली जगह दर्द, हल्का बुखार, थकान। 1-2 दिन में ठीक। गंभीर बहुत दुर्लभ।
HPV Vaccination कैसे लगवाएं? स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
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बेटी की उम्र चेक करें – 14 साल की हो या हो रही हो।
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नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जाएं।
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U-WIN ऐप/वेबसाइट पर रजिस्टर करें (आधार/मोबाइल से)।
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डॉक्टर से काउंसलिंग लें, सहमति फॉर्म भरें।
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सिंगल डोज लगवाएं, 30 मिनट बैठकर देखें।
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सर्टिफिकेट लें, रिकॉर्ड रखें।
प्राइवेट में Cervavac या Gardasil उपलब्ध (₹2000-4000 प्रति डोज), लेकिन सरकारी फ्री है तो पहले वही चुनें।
राज्य-स्तरीय अपडेट और सफल मॉडल
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तेलंगाना: 4.6 लाख डोज तैयार, मार्च शुरुआत संभावित।
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सिक्किम: 2018 से पायलट, 95%+ कवरेज।
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पंजाब, दिल्ली: पहले प्रयास सफल।
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अन्य राज्य: ट्रेनिंग, स्टॉकिंग चल रही।



















