ईरान का इतिहास क्रांतियों और राजनीतिक उथल-पुथल से भरा पड़ा है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्ला खुमैनी की सत्ता स्थापित हुई, जिसने ईरान को एक इस्लामिक गणराज्य बना दिया। लेकिन पिछले कुछ दशकों में, आर्थिक प्रतिबंधों, युद्धों और आंतरिक नीतियों के कारण देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। 2022 में महसा अमिनी की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों ने दुनिया का ध्यान खींचा था, लेकिन 2026 के Iran Protests इससे भी बड़े लग रहे हैं।
जनवरी 2026 की शुरुआत में, ईरान की मुद्रा रियाल का मूल्य डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया – लगभग 1.45 मिलियन रियाल प्रति डॉलर। महंगाई दर 40% से ऊपर चली गई, और पानी की कमी, बेरोजगारी जैसी समस्याएं बढ़ गईं। लोग सड़कों पर उतर आए, और नारे लगाने लगे जैसे “खामनेई को मौत”, “गाजा नहीं, लेबनान नहीं – मेरा जीवन ईरान के लिए” और “शाह की जय”। ये नारे निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के समर्थन में हैं, जो अमेरिका में रहते हैं और सत्ता परिवर्तन की अपील कर रहे हैं।
Iran Protests की शुरुआत छोटे शहरों से हुई, लेकिन जल्दी ही यह तेहरान तक पहुंच गई। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी भवनों, पुलिस स्टेशनों और मीडिया कार्यालयों पर हमला किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कम से कम 39 लोगों की मौत हो चुकी है, और सैकड़ों घायल हैं। सरकार ने इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं बंद कर दीं, ताकि जानकारी बाहर न फैले। लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जो प्रदर्शनों की तीव्रता दिखाती हैं।

Iran Protests की मुख्य वजहें: आर्थिक और राजनीतिक संकट
ईरान के इन विरोध प्रदर्शनों (Iran Protests) को समझने के लिए हमें इसकी जड़ों में जाना होगा। सबसे बड़ी वजह आर्थिक संकट है। अमेरिका और इजराइल के साथ लंबे समय से चल रहे तनाव ने ईरान पर प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे निर्यात प्रभावित हुआ है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और कोरोना महामारी के बाद की रिकवरी न होने से महंगाई बढ़ी। पानी की कमी एक बड़ी समस्या है – कई इलाकों में सूखा पड़ा है, और किसान प्रभावित हैं।
राजनीतिक रूप से, लोग इस्लामिक शासन से थक चुके हैं। महिलाओं पर सख्त नियम, समलैंगिकों पर दमन, और विरोधियों पर अत्याचार की खबरें आम हैं। 2025 में ईरान में 1200 से ज्यादा फांसी दी गईं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। प्रदर्शनकारी अब “इस्लामिक शासन छोड़ो” जैसे नारे लगा रहे हैं, और पूर्व शाही शासन की वापसी की मांग कर रहे हैं। रेजा पहलवी ने अपील की कि लोग घरों से बाहर निकलें और क्रांति करें।
Iran Protests में युवाओं और महिलाओं की भूमिका प्रमुख है। वे सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर प्रदर्शनों को फैला रहे हैं, भले ही इंटरनेट ब्लैकआउट हो। सुरक्षा बलों (IRGC और बसीज) के साथ झड़पें हो रही हैं, और कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने हथियार छीन लिए हैं। यह 1979 की क्रांति जैसा लग रहा है, लेकिन इस बार लक्ष्य इस्लामिक शासन का अंत है।
वैश्विक राजनीतिक अपडेट
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं: ट्रंप की धमकी से भारत की एडवाइजरी तक
Iran Protests ने दुनिया का ध्यान खींचा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों पर दमन करेगा, तो अमेरिका कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा, “हम तैयार हैं, लॉक एंड लोडेड।” ट्रंप रेजा पहलवी से मिलने वाले हैं, जो सत्ता परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम है। इजराइल और अमेरिका को ईरान सरकार “आतंकवादी एजेंट” बता रही है, लेकिन प्रदर्शनकारी इसे घरेलू मुद्दा मानते हैं।
भारत में यह मुद्दा ट्रेंडिंग है क्योंकि ईरान भारत का महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट और तेल आयात के कारण संबंध मजबूत हैं। लेकिन विरोध प्रदर्शनों के कारण भारत सरकार ने 5 जनवरी 2026 को ट्रैवल एडवाइजरी जारी की, जिसमें भारतीय नागरिकों से गैर-जरूरी यात्रा टालने और प्रदर्शन क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई है। ईरान में रहने वाले भारतीयों को भारतीय दूतावास से संपर्क करने को कहा गया है।
यूरोपीय देशों और संयुक्त राष्ट्र ने मानवाधिकार उल्लंघन पर चिंता जताई है। रूस और चीन ईरान के समर्थन में हैं, लेकिन वे भी आर्थिक संकट से चिंतित हैं। Iran Protests अगर बढ़े, तो मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ सकती है, जो तेल कीमतों को प्रभावित करेगा – भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता की बात।

भारत में Iran Protests की ट्रेंडिंग: मीडिया और सोशल मीडिया की भूमिका
भारत में Iran Protests क्यों ट्रेंडिंग है? क्योंकि भारतीय मीडिया जैसे एनडीटीवी, आजतक, न्यूज24 और हिंदुस्तान टाइम्स ने इसे प्रमुखता से कवर किया है। सोशल मीडिया पर हिंदी में पोस्ट वायरल हो रहे हैं, जैसे “ईरान में क्रांति” या “खामनेई के खिलाफ बगावत”। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर #IranProtests और #IranRevolution हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
भारतीय यूजर्स ईरान के प्रदर्शनों को अपनी राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं – कुछ इसे लोकतंत्र की जीत मानते हैं, तो कुछ धार्मिक दमन से जोड़ते हैं। कोलकाता जैसे शहरों में, जहां यूजर की लोकेशन है, यह खबर लोकल न्यूज में भी चर्चा का विषय बनी है। Iran Protests की कवरेज ने भारत-ईरान संबंधों पर बहस छेड़ दी है, खासकर जब भारत मध्य पूर्व में संतुलन बनाए रखना चाहता है।
Iran Protests का प्रभाव: अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और भविष्य
Iran Protests अगर जारी रहे, तो ईरान की अर्थव्यवस्था और बिगड़ सकती है। पहले से ही स्टॉक मार्केट गिर रहा है, और विदेशी निवेश रुक गया है। अगर सत्ता परिवर्तन होता है, तो नया शासन अमेरिका के साथ संबंध सुधार सकता है, जिससे प्रतिबंध हटेंगे। लेकिन अगर सरकार दमन करती है, तो और हिंसा होगी।
सुरक्षा के लिहाज से, मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ेगी। ईरान के समर्थित ग्रुप जैसे हिजबुल्लाह या हूती विद्रोही प्रभावित होंगे। भारत के लिए, तेल कीमतें बढ़ सकती हैं, जो महंगाई बढ़ाएगी। साथ ही, ईरान में फंसे भारतीयों की सुरक्षा चिंता है।
भविष्य में, अगर रेजा पहलवी की वापसी होती है, तो ईरान एक धर्मनिरपेक्ष देश बन सकता है। लेकिन फिलहाल, स्थिति अनिश्चित है। Iran Protests 2026 को एक नई क्रांति के रूप में देखा जा रहा है, जो 1979 की घटनाओं को दोहरा सकती है।
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