गाज़ा सिटी एक बार फिर दुनिया की नज़रों में है। इज़रायली सैनिक शहर के अंदर तक पहुँच चुके हैं और अब हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। लगातार हो रहे हमलों और जमीनी कार्रवाइयों की वजह से फ़िलिस्तीनी नागरिक बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार मौत का आंकड़ा 65,000 से ऊपर पहुँच चुका है, जो इस संघर्ष की भयावहता को दर्शाता है।
गाज़ा की सड़कों पर खामोशी है, लेकिन यह खामोशी गोलियों और धमाकों की आवाज़ के बीच छुपी हुई है। अस्पतालों में भीड़ है, ज़रूरी सामान की कमी है और लोगों में अनिश्चितता बढ़ रही है। इस स्थिति ने पूरी दुनिया का ध्यान एक बार फिर इज़रायल-फ़िलिस्तीन संघर्ष की ओर खींच लिया है।
गाज़ा सिटी की मौजूदा स्थिति
गाज़ा सिटी के अलग-अलग इलाकों में इज़रायली सेना की पैठ तेज़ी से बढ़ रही है। शहर के कई हिस्सों में सैन्य वाहनों और टैंकों की तैनाती हो चुकी है। भारी गोलीबारी और हवाई हमलों ने नागरिकों के लिए हालात और कठिन बना दिए हैं।
हज़ारों लोग अपने घर छोड़कर भागने पर मजबूर हैं। कई परिवारों ने रातों-रात शहर छोड़ दिया है ताकि अपने बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित जगह पहुंचा सकें। रिपोर्ट्स के अनुसार, जिन इलाकों में सेना का कब्ज़ा है वहां अब भी कई लोग फंसे हुए हैं और बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है।
शहर में बिजली और पानी की आपूर्ति लगभग ठप हो चुकी है। दवाइयों और खाने-पीने की वस्तुओं की कमी ने संकट को और गहरा दिया है। गाज़ा के कई हिस्सों में अब केवल जीवन बचाना ही सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।
The Palestinian death toll in the Israel-Hamas war surpassed 65,000, according to Gaza’s Health Ministry, as Israeli troops and tanks pushed deeper into Gaza City and residents fled the devastated area.https://t.co/PgNcXXUezm
— The Hindu (@the_hindu) September 17, 2025
मानवीय संकट
गाज़ा में मानवीय संकट दिन-प्रतिदिन भयावह होता जा रहा है। अस्पताल क्षमता से कई गुना अधिक मरीजों से भर गए हैं। डॉक्टरों और नर्सों को ज़रूरी दवाइयों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। कई अस्पतालों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईंधन की आपूर्ति नहीं हुई तो जनरेटर बंद हो जाएंगे और मरीजों की जान खतरे में पड़ जाएगी।
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी चेतावनी जारी की है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले कुछ दिनों में गाज़ा में भोजन, पानी और ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह खत्म हो सकती है। हजारों लोग सुरक्षित आश्रय की तलाश में हैं लेकिन कहीं भी जगह नहीं बची है।
बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कई परिवार खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं। मदद पहुंचाने वाले संगठनों का कहना है कि मानवीय गलियारे (Humanitarian Corridors) खोलना अब बेहद ज़रूरी है ताकि कम से कम नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा सके और ज़रूरी सहायता पहुंचाई जा सके।
सैन्य अभियान की झलक
इज़रायल की सेना ने दावा किया है कि वह गाज़ा सिटी में “आतंकी नेटवर्क” को खत्म करने के लिए अभियान चला रही है। सैनिकों की टुकड़ियाँ शहर के अलग-अलग हिस्सों में प्रवेश कर चुकी हैं। टैंकों और बख्तरबंद वाहनों की मदद से कई इलाकों पर नियंत्रण भी किया गया है।
हवाई हमले लगातार जारी हैं। जिन इलाकों पर सेना ने कब्ज़ा किया है, वहां घर, स्कूल और दुकानें खंडहर बन चुके हैं। इज़रायली अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक कि “खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता।”
विश्लेषकों का मानना है कि यह अब तक का सबसे बड़ा जमीनी हमला (Ground Offensive) है। सेना ने गाज़ा सिटी को चारों ओर से घेर लिया है, ताकि नागरिकों के साथ-साथ लड़ाकों को भी बाहर निकलने का कोई रास्ता न मिले।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रतिक्रियाएँ
इस संघर्ष पर पूरी दुनिया की नज़र है। संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और अमेरिका ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। कई देशों ने मानवीय संकट पर चिंता जताई है और तुरंत युद्धविराम की मांग की है।
यहाँ यह भी समझना ज़रूरी है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे आर्थिक और व्यापारिक फैसले भी वैश्विक तनाव को प्रभावित करते हैं। इसी संदर्भ में आप हमारे आर्टिकल अमेरिका के टैरिफ दबाव और भारत-रूस व्यापार को पढ़ सकते हैं, जिसमें विस्तार से बताया गया है कि किस तरह आर्थिक नीतियाँ राजनीतिक हालात को दिशा देती हैं।
पड़ोसी अरब देशों ने भी बयान जारी किए हैं कि अगर यह संघर्ष और लंबा खिंचता है तो इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है। मिस्र और जॉर्डन ने राहत सामग्री भेजने की पेशकश की है, लेकिन सीमा बंद होने के कारण सप्लाई में मुश्किलें आ रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। वे लगातार अपील कर रहे हैं कि अस्पतालों और रिहायशी इलाकों को निशाना न बनाया जाए।
इतिहास और पृष्ठभूमि
इज़रायल और फ़िलिस्तीन के बीच यह संघर्ष नया नहीं है। गाज़ा पट्टी लंबे समय से विवाद का केंद्र रही है। इससे पहले भी कई बार इज़रायली सेना ने गाज़ा पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं, लेकिन इस बार का हमला कहीं ज्यादा गहरा और व्यापक बताया जा रहा है।
पिछले दशकों में हजारों लोगों की जानें इस संघर्ष में जा चुकी हैं। हर बार युद्धविराम की कोशिशें होती हैं लेकिन संघर्ष फिर से भड़क उठता है। मौजूदा हालात ने यह साफ कर दिया है कि समाधान सिर्फ सैन्य कार्रवाई से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और बातचीत की ज़रूरत है।
भविष्य की संभावनाएँ
अगर हालात पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया तो गाज़ा सिटी पूरी तरह तबाह हो सकती है। मानवीय संकट गहराता जाएगा और क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों पक्ष अगर बातचीत की मेज़ पर नहीं आते तो यह संघर्ष आने वाले महीनों में और भी खतरनाक रूप ले सकता है। वहीं, अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय सक्रिय भूमिका निभाता है तो शायद मानवीय गलियारों के ज़रिए राहत पहुंचाई जा सके और नागरिकों की जानें बचाई जा सकें।
निष्कर्ष
गाज़ा सिटी इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां हर तरफ केवल अनिश्चितता और भय दिखाई दे रहा है। इज़रायली सैनिकों की बढ़त, लगातार हमले और नागरिकों का पलायन इस संघर्ष की भयावहता को और उजागर कर रहे हैं।
पाठकों, इस पूरे हालात पर आपका क्या विचार है? क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव से स्थिति सुधर सकती है, या संघर्ष और गहराएगा? अपनी राय हमें कमेंट में ज़रूर बताइए।




















