Nipah Virus एक बार फिर भारत में सुर्खियों में है। जनवरी 2026 में पश्चिम बंगाल के कोलकाता के पास बारासात के एक प्राइवेट अस्पताल में दो नर्सों में इस वायरस की पुष्टि हुई। अब तक 5 मामले सामने आ चुके हैं, और 100 से ज्यादा लोग क्वारंटाइन में हैं। यह वायरस 40-75% तक मृत्यु दर वाला है, और अभी तक इसकी कोई वैक्सीन या स्पेसिफिक दवा नहीं है।
यह आउटब्रेक इसलिए खास है क्योंकि पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस 2001 के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर दिखा है। पहले यह मुख्य रूप से केरल में देखा जाता था। चूंकि आप कोलकाता में हैं, इसलिए यह जानकारी आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस ब्लॉग में हम विस्तार से बात करेंगे – वायरस क्या है, कैसे फैलता है, लक्षण क्या हैं, बचाव कैसे करें, और सरकार क्या कर रही है।
1. निपाह वायरस क्या है? (What is Nipah Virus?)
निपाह वायरस (NiV) एक जूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। इसका मुख्य होस्ट फ्रूट बैट (पक्षी जैसा चमगादड़) होता है, खासकर प्टेरोपस जीनस के। यह वायरस हेनिपावायरस फैमिली का है, और 1998 में मलेशिया के सुंगाई निपाह गांव में पहली बार सामने आया था।
भारत में यह वायरस पहली बार 2001 में सिलिगुड़ी (पश्चिम बंगाल) में देखा गया था, जहां 66 मामले आए और 45 लोगों की मौत हुई। उसके बाद 2018, 2021, 2023 में केरल में कई बार आउटब्रेक हुए। 2026 में यह वापस पश्चिम बंगाल में लौटा है।
2. 2026 में पश्चिम बंगाल में Nipah Virus Outbreak की ताजा स्थिति
जनवरी 2026 के मध्य में खबर आई कि बारासात के नारायणा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में दो नर्सों में निपाह वायरस पॉजिटिव पाया गया। एक की हालत क्रिटिकल है। अब तक 5 कन्फर्म मामले हैं, और एक डॉक्टर, एक नर्स, एक हेल्थ स्टाफ भी संक्रमित बताए जा रहे हैं।
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क्वारंटाइन: 100 से 180 लोग क्वारंटाइन में हैं।
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टेस्टिंग: 180 से ज्यादा लोगों का टेस्ट किया गया, लेकिन ज्यादातर नेगेटिव आए।
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सरकारी अलर्ट: केंद्र सरकार ने नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम भेजी है। NIV पुणे, AIIMS कल्याणी, और अन्य संस्थान जांच कर रहे हैं।
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इंडेक्स केस: संभावना है कि कोई पेशेंट या कम्युनिटी से वायरस आया हो।
यह आउटब्रेक इसलिए डरावना है क्योंकि हेल्थकेयर वर्कर्स प्रभावित हैं, जिससे हॉस्पिटल में फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
3. निपाह वायरस कैसे फैलता है? (Transmission of Nipah Virus)
निपाह वायरस मुख्य रूप से तीन तरीकों से फैलता है:
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फ्रूट बैट से: बैट के मूत्र, लार या फेकल्स से दूषित फल (जैसे खजूर, अमरूद) खाने से।
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जानवरों से: सूअर या अन्य जानवरों से संपर्क।
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ह्यूमन-टू-ह्यूमन: संक्रमित व्यक्ति के सलाइवा, मूत्र, या शरीर के तरल पदार्थों से। हॉस्पिटल में बिना PPE के संपर्क से।
पश्चिम बंगाल में बैट्स बहुत हैं, और लोग अक्सर कच्चे फल खाते हैं। इसलिए सावधानी जरूरी है।
4. निपाह वायरस के लक्षण (Symptoms of Nipah Virus)
लक्षण 4-14 दिनों में दिखते हैं। शुरुआत में फ्लू जैसा लगता है, लेकिन जल्दी गंभीर हो जाता है।
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प्रारंभिक लक्षण:
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तेज बुखार
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सिरदर्द
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मांसपेशियों में दर्द
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उल्टी, जी मिचलाना
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गंभीर लक्षण:
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मस्तिष्क ज्वर (Encephalitis) – चक्कर, बेहोशी, दौरा
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सांस लेने में तकलीफ
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कोमा
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मृत्यु दर 40-75% है। जो बच जाते हैं, उन्हें न्यूरोलॉजिकल समस्याएं रह सकती हैं।
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5. निदान कैसे होता है? (Diagnosis)
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RT-PCR टेस्ट: नाक, गले या CSF से सैंपल।
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ELISA टेस्ट: एंटीबॉडी चेक।
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वायरस आइसोलेशन: NIV पुणे जैसे लैब में।
शुरुआती स्टेज में टेस्ट जरूरी है।
6. इलाज क्या है? (Treatment of Nipah Virus)
कोई स्पेसिफिक एंटीवायरल दवा नहीं है। इलाज सपोर्टिव है:
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ऑक्सीजन, वेंटिलेटर
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दर्द निवारक
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फ्लूइड थेरेपी
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रेमडेसिविर जैसे एंटीवायरल ट्रायल में हैं।
जल्दी अस्पताल पहुंचना जान बचा सकता है।
7. रोकथाम के तरीके (Prevention Tips)
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फ्रूट बैट से दूरी रखें।
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कच्चे या गिरे हुए फल न खाएं।
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खजूर का रस (ताड़ी) न पिएं।
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हॉस्पिटल में PPE पहनें।
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हाथ धोएं, मास्क लगाएं।
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बैट्स वाले इलाकों में सावधानी।
सरकार ने गाइडलाइंस जारी की हैं – फलों को धोकर खाएं, बैट्स को भगाने के लिए नेट लगाएं।
8. भारत में निपाह वायरस के पिछले आउटब्रेक
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2001: सिलिगुड़ी, पश्चिम बंगाल – 66 मामले, 45 मौतें।
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2018: केरल – 17 मामले, 17 मौतें।
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2021, 2023: केरल में छोटे आउटब्रेक।
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2025: केरल में 4 मामले।
हर बार केरल में बैट्स और फल खाने से जुड़ा।
9. वैक्सीन और रिसर्च की स्थिति
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अभी कोई वैक्सीन नहीं।
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CEPI, WHO, ICMR ट्रायल कर रहे हैं।
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2026 तक कोई वैक्सीन आने की उम्मीद कम है।
रिसर्च जारी है – मॉन्की वैक्सीन ट्रायल सफल हुए हैं।
10. सरकारी और स्वास्थ्य विभाग के प्रयास
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नेशनल अलर्ट जारी।
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क्वारंटाइन, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग।
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हॉस्पिटल में आइसोलेशन वार्ड।
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जन जागरूकता कैंपेन।
पश्चिम बंगाल सरकार ने हाई अलर्ट जारी किया है।
11. आम मिथक और सच्चाई
मिथक: निपाह हवा से फैलता है। सच्चाई: नहीं, मुख्य रूप से संपर्क से।
मिथक: यह ठीक हो जाता है। सच्चाई: इलाज सपोर्टिव है, लेकिन मौत का खतरा बहुत।
12. कोलकाता के लोगों के लिए सलाह
चूंकि आप कोलकाता में हैं, इन बातों का ख्याल रखें:
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गिरे फल न खाएं।
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अगर बुखार आए तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
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अस्पताल जाते समय मास्क लगाएं।
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न्यूज अपडेट रहें।




















