Sir odisha की शुरुआत और जरूरत क्यों पड़ी?
हमारे देश में चुनावी लिस्ट कभी-कभी पुरानी हो जाती है। कुछ नाम मृतकों के रह जाते हैं, कुछ लोग दूसरे राज्यों में चले जाते हैं लेकिन नाम यहां रह जाता है, और कुछ लोग कई जगहों पर नाम दर्ज करवा लेते हैं। इन्हें घोस्ट वोटर्स कहते हैं। इन्हीं को साफ करने के लिए चुनाव आयोग ने कई राज्यों में SIR अभियान चलाया। ओडिशा भी इसमें शामिल था।
30 मई से 28 जून 2026 तक चले इस अभियान में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर गए। enumeration forms भरवाए। राज्य के लगभग 98 प्रतिशत वोटर्स तक यह फॉर्म पहुंचा। यह अभियान इतना बड़ा था कि 45 हजार से ज्यादा पोलिंग बूथों पर काम हुआ।
SIR से पहले ओडिशा में कुल वोटर्स की संख्या करीब 3 करोड़ 33 लाख 99 हजार थी। ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद यह घटकर 3 करोड़ 13 लाख 87 हजार रह गई। यानी 20 लाख 12 हजार नाम हटाए गए। यह संख्या कोई छोटी नहीं है।
इनमें 8 लाख 32 हजार मृतक वोटर्स थे, 10 लाख 7 हजार वे लोग जो कहीं और शिफ्ट हो गए या लंबे समय से गायब थे, 1 लाख 58 हजार डुप्लिकेट एंट्रीज थीं और बाकी अन्य कारणों से हटाए गए। यह सफाई चुनाव को और निष्पक्ष बनाने के लिए की गई।
जिलेवार प्रभाव और खास बातें
ओडिशा के विभिन्न जिलों में deletions की संख्या अलग-अलग रही। मलकानगिरी जिले में सबसे ज्यादा 27 हजार 653 नाम हटे। गंजाम जिले में 2 लाख 7 हजार से ज्यादा, क्योंकि यहां से बहुत से लोग माइग्रेंट मजदूरी के लिए बाहर जाते हैं। कटक में 1 लाख 55 हजार के आसपास।
ये आंकड़े बताते हैं कि माइग्रेशन और शहरीकरण का वोटर लिस्ट पर कितना असर पड़ता है। कई परिवार सालों तक गांव में नाम छोड़कर शहर या दूसरे राज्य चले जाते हैं। SIR ने इन्हें पकड़ा।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं – विवाद की बात
बीजू जनता दल (BJD) ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनके नेताओं का कहना है कि असल में 27 लाख नाम हटे हैं, न कि 20 लाख। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटी-मोटी गलतियों या जटिल फॉर्म भरने की वजह से कई योग्य वोटर्स का नाम कट गया। BJD ने कहा कि आंकड़ों में असंगति है – पहले 3.40 करोड़ बताया गया, फिर 3.33 करोड़, अब 3.13 करोड़।
दूसरी तरफ भाजपा ने इसका बचाव किया। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट इस प्रक्रिया से संतुष्ट है और यह पारदर्शी तरीके से हो रही है। विपक्ष राजनीतिक मकसद से विरोध कर रहा है। कांग्रेस ने भी चिंता जताई कि किसी योग्य वोटर को बाहर नहीं होना चाहिए।
यह विवाद सामान्य है। हर बड़े बदलाव पर राजनीतिक बहस होती है। लेकिन असल बात यह है कि दावे और आपत्तियों का समय दिया गया है।
दावे-आपत्ति कैसे करें? स्टेप बाय स्टेप गाइड
7 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक दावे और आपत्तियां ली जा रही हैं। अगर आपका नाम गलती से हट गया है या कोई अयोग्य नाम लिस्ट में है तो आप शिकायत कर सकते हैं।
- आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और ड्राफ्ट रोल चेक करें।
- Form 6 से नए नाम जोड़ सकते हैं, खासकर 18 साल पूरे कर चुके युवा।
- 147 इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारी और 994 असिस्टेंट अधिकारी इन मामलों की जांच करेंगे।
- फाइनल वोटर लिस्ट 6 सितंबर 2026 को जारी होगी।
विशेष कैंप भी लगाए जा रहे हैं ताकि युवा वोटर्स आसानी से नाम जुड़ा सकें।
SIR का आम लोगों और लोकतंत्र पर असर
सकारात्मक पहलू:
- लिस्ट साफ होने से वोट प्रतिशत ज्यादा सही होगा।
- फर्जी वोटिंग कम होगी।
- नए युवा वोटर्स को मौका मिलेगा।
- चुनावी प्रक्रिया मजबूत होगी।
चुनौतियां:
- माइग्रेंट परिवारों को परेशानी हो सकती है।
- बुजुर्गों या कम पढ़े-लिखे लोगों को फॉर्म भरने में दिक्कत।
- जागरूकता की जरूरत।
फिर भी, कुल मिलाकर यह कदम लोकतंत्र को स्वस्थ बनाने वाला है। हर वोटर को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए – नाम चेक करवाना, सही जानकारी देना।
SIR की व्यापक पृष्ठभूमि और अन्य राज्यों से तुलना
SIR सिर्फ ओडिशा तक सीमित नहीं। कई अन्य राज्यों में भी यह चल रहा है। जहां माइग्रेशन ज्यादा है, वहां deletions की संख्या स्वाभाविक रूप से अधिक होती है। ओडिशा में माइनिंग, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों के कारण लोग घूमते रहते हैं।
पिछले चुनावों में भी वोटर लिस्ट सुधार के प्रयास हुए, लेकिन SIR इतना इंटेंसिव था कि घर-घर सर्वे हुआ। BLOs की मेहनत सराहनीय है।
युवा वोटर्स और भविष्य की तैयारी
18 साल पूरे करने वाले युवाओं के लिए अच्छा मौका है। विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं। Form 6 भरकर और जरूरी दस्तावेज जमा करके नाम जुड़वा सकते हैं। युवा वोटर्स बढ़ेंगे तो राजनीति भी युवा मुद्दों पर ज्यादा फोकस करेगी – शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य आदि।
साफ लिस्ट, मजबूत लोकतंत्र
SIR ओडिशा की पूरी बात यही है कि यह सफाई का अभियान है। 20 लाख नाम हटना बड़ी संख्या है, लेकिन जरूरी भी। विपक्ष की चिंताएं सुननी चाहिए और दावे-आपत्ति के जरिए सुलझानी चाहिए। कोई योग्य वोटर बाहर नहीं रहना चाहिए और कोई अयोग्य अंदर नहीं रहना चाहिए।
आप भी आज ही अपना और परिवार का नाम चेक करें। अगर समस्या हो तो तुरंत शिकायत करें। लोकतंत्र हम सबकी जिम्मेदारी है। स्वच्छ चुनाव के लिए यह कदम सराहनीय है।


















