18 जनवरी 2026, शाम लगभग 7:45 बजे। मलागा से मैड्रिड जा रही एक प्राइवेट हाई-स्पीड ट्रेन (इरियो कंपनी की) में करीब 300 यात्री सवार थे। यह ट्रेन सामान्य गति से चल रही थी – लगभग 190-200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार। दूसरी तरफ, मैड्रिड से हुल्वा जा रही रेनफे (स्पेन की सरकारी रेल कंपनी) की ट्रेन में लगभग 187 यात्री थे।
एडमुज के पास एक स्ट्रेट ट्रैक पर अचानक इरियो ट्रेन की आखिरी कुछ बोगियां पटरी से उतर गईं। ये बोगियां दूसरी दिशा वाली पटरी पर जा पहुंचीं, जहां से रेनफे ट्रेन आ रही थी। दोनों ट्रेनें एक-दूसरे की ओर तेज गति से बढ़ रही थीं। टक्कर इतनी भयानक थी कि रेनफे ट्रेन की पहली दो बोगियां पटरी से नीचे 10-12 फुट गहरी खाई में जा गिरीं।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के कई गांवों तक गूंज गई। लोग बाहर निकले तो देखा कि धुआं उठ रहा है, शीशे बिखरे पड़े हैं, और चीख-पुकार मची हुई है। कई यात्रियों ने कहा, “एक पल में सब कुछ अंधेरा हो गया। हमने सोचा कि अब जिंदगी खत्म।”
शुरुआत में मौतों की संख्या 21 बताई गई, लेकिन अगले 24 घंटों में मलबे से और शव मिलते गए। अब तक की आधिकारिक जानकारी के अनुसार 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। 122 से अधिक लोग घायल हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। इनमें बच्चे, बुजुर्ग और युवा – सभी शामिल हैं।

संभावित कारण – अभी तक क्या सामने आया?
जांच अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण बातें सामने आ चुकी हैं:
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ट्रैक में खराबी शुरुआती जांच में एक ब्रोकेन रेल जॉइंट (फिशप्लेट) को मुख्य कारण माना जा रहा है। यह जॉइंट पिछले कई महीनों से कमजोर था। ट्रेन ड्राइवरों की यूनियन ने पिछले साल ही चेतावनी दी थी कि ट्रैक पर “गंभीर घिसावट” है। लेकिन क्या इस चेतावनी पर ध्यान दिया गया? यह सवाल अभी अनुत्तरित है।
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स्पीड और सिग्नलिंग सिस्टम दोनों ट्रेनें निर्धारित स्पीड लिमिट (250 किमी/घंटा) से काफी कम स्पीड पर चल रही थीं। ऑटोमैटिक ट्रेन कंट्रोल सिस्टम भी एक्टिव था। फिर भी टक्कर कैसे हुई? विशेषज्ञों का कहना है कि जब इरियो ट्रेन की बोगियां डिरेल हुईं, तो सिग्नलिंग सिस्टम को अलर्ट मिलने में देरी हो सकती है।
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मेंटेनेंस और प्राइवेटाइजेशन का असर स्पेन की हाई-स्पीड रेल नेटवर्क दुनिया की सबसे बेहतरीन मानी जाती है, लेकिन हाल के वर्षों में प्राइवेट कंपनियों के आने और सरकारी बजट में कटौती से मेंटेनेंस पर असर पड़ा है। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ट्रैक की नियमित जांच में कमी आई है।
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ह्यूमन एरर की संभावना कम ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने कहा कि ड्राइवर की गलती की संभावना बहुत कम है। दोनों ड्राइवर अनुभवी थे और सिस्टम पूरी तरह ऑटोमैटिक था।
जांच में ब्लैक बॉक्स, सीसीटीवी फुटेज, ट्रैक के मेंटेनेंस रिकॉर्ड और गवाहों के बयान शामिल किए जा रहे हैं। स्पेन सरकार ने वादा किया है कि सच्चाई सामने लाई जाएगी, चाहे कितने भी बड़े नाम सामने आएं।
बचाव कार्य – रात भर की जंग
दुर्घटना के कुछ मिनटों के भीतर ही फायर ब्रिगेड, पुलिस, एम्बुलेंस और हेलीकॉप्टर मौके पर पहुंच गए। बचाव दल ने रात भर काम किया। मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए क्रेन, कटर मशीन और डॉग स्क्वॉड का इस्तेमाल किया गया।
एक फायरफाइटर ने बताया, “हमने अंधेरे में बच्चों की आवाज सुनी। हमने मलबा हटाया और उन्हें बाहर निकाला। उस पल में हमें लगा कि हमारी मेहनत रंग लाई।”
कई यात्रियों ने खुद को बचाने के लिए एक-दूसरे की मदद की। एक बुजुर्ग महिला ने कहा, “मेरे बगल वाला लड़का घायल था, फिर भी उसने मुझे बाहर निकाला।”
अब तक 48 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें 5 बच्चे शामिल हैं। स्पेन के किंग और क्वीन ने अस्पताल जाकर पीड़ितों से मुलाकात की। तीन दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। पूरा देश स्तब्ध है।

पीड़ितों की कहानियां – दिल दहला देने वाली सच्चाई
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एक 6 साल की बच्ची ने अपनी पूरी फैमिली खो दी – मां, पिता, बड़ा भाई और चचेरे भाई।
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एक युवक ने बताया कि उसकी पत्नी की मौत हो गई, लेकिन दो छोटे बच्चे बच गए। वह अभी भी सदमे में है।
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रेनफे ट्रेन का 27 साल का ड्राइवर भी इस हादसे में नहीं बचा। उसकी मां ने कहा, “वह हमेशा कहता था कि यात्रियों की सुरक्षा सबसे पहले।”
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कई परिवार ऐसे हैं जिनके सदस्य अभी भी लापता हैं।
ये कहानियां सिर्फ आंकड़े नहीं हैं। ये जिंदगियां हैं, सपने हैं, जो एक पल में खत्म हो गए।
वैश्विक अपडेट
भारत में ट्रेन हादसे कोई नई बात नहीं हैं। बालासोर, कन्नूर, फिरोजाबाद – ऐसे कई हादसे हमारे सामने आए हैं। लोग सोच रहे हैं:
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अगर स्पेन जैसी उन्नत तकनीक वाली रेलवे में भी ऐसा हो सकता है, तो भारत में स्थिति क्या होगी?
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क्या हमारी रेलवे सिस्टम में सुधार की जरूरत नहीं है?
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सिग्नलिंग, ट्रैक मेंटेनेंस, हाई-स्पीड ट्रेनों की सुरक्षा – इन पर कितना ध्यान दिया जा रहा है?
सोशल मीडिया पर लोग अपनी राय दे रहे हैं। कई लोग कह रहे हैं कि Spain train crash से भारत को सबक लेना चाहिए।
इससे मिलने वाले सबक
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ट्रैक मेंटेनेंस को प्राथमिकता – हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए ट्रैक की नियमित और सख्त जांच जरूरी है।
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रीयल-टाइम मॉनिटरिंग – सेंसर और AI आधारित सिस्टम से ट्रैक की खराबी पहले ही पकड़ी जा सकती है।
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प्राइवेट और सरकारी कंपनियों में एकरूपता – अलग-अलग कंपनियों के अलग स्टैंडर्ड नहीं होने चाहिए।
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तेज बचाव व्यवस्था – हादसे के बाद पहला घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है।
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यात्रियों की मानसिक मदद – ऐसे हादसों के बाद पीड़ितों और परिवारों को काउंसलिंग की जरूरत होती है।




















