भारत और UAE के बीच संबंध सदियों पुराने हैं। अगर हम इतिहास की गहराई में जाएं, तो पता चलता है कि प्राचीन काल से ही अरब क्षेत्र के साथ भारत के व्यापारिक संबंध रहे हैं। मसाले, रेशम और सोना-चांदी का आदान-प्रदान तो जैसे दोनों सभ्यताओं की रगों में बहता है। लेकिन आधुनिक दौर में, UAE की स्थापना 1971 में हुई और उसके बाद से भारत के साथ उसके रिश्ते लगातार मजबूत होते गए।
1970 के दशक में जब UAE में तेल की खोज हुई, तो भारतीय मजदूरों और पेशेवरों की बड़ी संख्या वहां गई। आज UAE में करीब 45 लाख भारतीय रहते हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे डॉक्टर, इंजीनियर, व्यापारी और मजदूर के रूप में योगदान दे रहे हैं। UAE भारत का प्रमुख ऊर्जा स्रोत भी है, जहां से कच्चा तेल और गैस आती है।
2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद इन रिश्तों में नई जान आई। मोदी की पहली UAE यात्रा 2015 में हुई, जो 34 साल बाद किसी भारतीय पीएम की पहली यात्रा थी। उसके बाद से कई समझौते हुए, जैसे Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) 2022 में, जिसने व्यापार को बढ़ावा दिया। आज UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, और भारत UAE का दूसरा सबसे बड़ा। लेकिन जनवरी 2026 की यह यात्रा एक नया अध्याय लिख रही है। UAE के राष्ट्रपति की यह यात्रा महज तीन घंटे की थी, लेकिन इसके प्रभाव लंबे समय तक रहेंगे।

UAE राष्ट्रपति की भारत यात्रा: क्या हुआ जनवरी 19, 2026 को?
जनवरी 19, 2026 को UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (जिन्हें MBZ के नाम से जाना जाता है) भारत पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद दिल्ली एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया – एक विशेष इशारा जो दोनों नेताओं की दोस्ती को दर्शाता है। दोनों एक ही गाड़ी में सवार होकर पीएम आवास पहुंचे, जहां द्विपक्षीय वार्ता हुई।
यह यात्रा ऐसे समय हुई जब मध्य पूर्व में तनाव बढ़ रहा है – ईरान-अमेरिका संबंधों में खटास, यमन और सीरिया की अस्थिरता। लेकिन भारत और UAE ने इन चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा चुनी। वार्ता में मुख्य फोकस व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग पर था। दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं।
सबसे बड़ा ऐलान था द्विपक्षीय व्यापार को 2032 तक दोगुना करके 200 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य। वर्तमान में यह करीब 100 बिलियन डॉलर है, जो CEPA के बाद तेजी से बढ़ा है। यह लक्ष्य हासिल करने के लिए नए समझौते साइन किए गए, जैसे LNG सप्लाई का 3 बिलियन डॉलर का डील। इसके तहत UAE भारत को हर साल 0.5 मिलियन टन LNG सप्लाई करेगा, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा। भारत अब UAE का सबसे बड़ा LNG खरीदार बन गया है।
रक्षा क्षेत्र में सामरिक साझेदारी: एक नया मोड़
रक्षा सहयोग इस यात्रा का एक प्रमुख हिस्सा था। दोनों देशों ने ‘स्ट्रैटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप’ के लिए लेटर ऑफ इंटेंट साइन किया। यह क्या意味着? इसका मतलब है कि भारत और UAE अब रक्षा उपकरणों के उत्पादन, संयुक्त अभ्यास और तकनीकी ट्रांसफर में गहराई से जुड़ेंगे। UAE पहले से ही भारत के रक्षा उत्पादों का खरीदार है, जैसे ब्रह्मोस मिसाइल। अब यह साझेदारी AI, साइबर सिक्योरिटी और स्पेस डिफेंस तक फैलेगी।
मध्य पूर्व की अस्थिरता को देखते हुए, यह साझेदारी भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखती है। UAE भारत का गेटवे है खाड़ी क्षेत्र में, और भारत UAE के लिए एशिया में। दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ भी एकजुट हैं। याद कीजिए, 2019 में पुलवामा हमले के बाद UAE ने भारत का साथ दिया था। अब यह साझेदारी और मजबूत होगी, जिसमें नौसेना अभ्यास और इंटेलिजेंस शेयरिंग शामिल हो सकती है।
ऊर्जा और पर्यावरण सहयोग: LNG डील से आगे
ऊर्जा क्षेत्र में LNG डील के अलावा, सिविल न्यूक्लियर एनर्जी में सहयोग पर बात हुई। UAE में बारakah न्यूक्लियर प्लांट है, जो एशिया का पहला, और भारत अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को बढ़ा रहा है। दोनों देश क्लीन एनर्जी पर फोकस कर रहे हैं। UAE 2026 के अंत में UN वॉटर कॉन्फ्रेंस होस्ट कर रहा है, और भारत ने इसका समर्थन किया। जल संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और रिन्यूएबल एनर्जी में सहयोग बढ़ेगा।
भारत के लिए UAE से आने वाली गैस महत्वपूर्ण है, क्योंकि हमारी ऊर्जा जरूरतें बढ़ रही हैं। यह डील न केवल आर्थिक है, बल्कि पर्यावरणीय भी – LNG क्लीनर फ्यूल है कोयले की तुलना में। दोनों देश सोलर एनर्जी में भी पार्टनर हैं, जैसे इंटरनेशनल सोलर एलायंस।

शिक्षा और डिजिटल फाइनेंस: युवा पीढ़ी के लिए अवसर
यात्रा में शिक्षा पर भी जोर दिया गया। UAE में भारतीय विश्वविद्यालयों के ऑफशोर कैंपस खोलने की योजना है। IIT दिल्ली का अबू धाबी कैंपस पहले से चल रहा है, और अब और विस्तार होगा। छात्रों के आदान-प्रदान, जॉइंट रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट पर फोकस है। UAE में रहने वाले भारतीय छात्रों के लिए यह अच्छी खबर है।
डिजिटल फाइनेंस में, UPI और UAE के सिस्टम को लिंक करने की बात हुई। पहले से ही RuPay कार्ड UAE में स्वीकार होता है। अब AI और फिनटेक में सहयोग बढ़ेगा, जो स्टार्टअप्स के लिए नए दरवाजे खोलेगा।
आर्थिक प्रभाव: 200 बिलियन डॉलर का लक्ष्य कैसे हासिल होगा?
अब सवाल है, 200 बिलियन डॉलर का व्यापार लक्ष्य कैसे पूरा होगा? CEPA ने पहले ही टैरिफ घटाए हैं, जिससे निर्यात बढ़ा। भारत UAE को ज्वेलरी, फार्मा, टेक्सटाइल और फूड प्रोडक्ट्स निर्यात करता है, जबकि UAE से तेल, गैस और केमिकल्स आते हैं। नए समझौतों से निवेश बढ़ेगा – UAE के सॉवरेन वेल्थ फंड भारत में 100 बिलियन डॉलर निवेश करने को तैयार हैं।
यह लक्ष्य नौकरियां पैदा करेगा, खासकर युवाओं के लिए। UAE में भारतीयों की रेमिटेंस भारत की अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करती है। लेकिन चुनौतियां भी हैं, जैसे वैश्विक मंदी या भू-राजनीतिक तनाव। फिर भी, दोनों देशों की प्रतिबद्धता से यह संभव लगता है।
सामाजिक और सांस्कृतिक आयाम: लोग-से-लोग संपर्क
रिश्ते सिर्फ सरकारों के बीच नहीं, लोगों के बीच भी हैं। UAE में भारतीय त्योहार जैसे दीवाली और होली मनाए जाते हैं। अबू धाबी में BAPS हिंदू मंदिर खुला है, जो सांस्कृतिक पुल है। यात्रा में सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर भी बात हुई।
UAE में भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और कल्याण हमेशा प्राथमिकता है। मोदी सरकार ने उनके लिए कई योजनाएं चलाई हैं। यह यात्रा उन प्रवासियों के लिए भी प्रेरणा है जो दोनों देशों को जोड़ते हैं।
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