भारतीय सिनेमा की जानी-मानी और प्रतिष्ठित अभिनेत्री बी. सरोजा देवी का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। रविवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली, जिससे न केवल दक्षिण भारतीय सिनेमा बल्कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।
उनके निधन की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर फिल्मी गलियारों तक एक भावुक माहौल बन गया। परिवार, फैंस और फिल्मी हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया।
87 वर्ष की उम्र में बी. सरोजा देवी ने दुनिया को कहा अलविदा।
इस दुखद समाचार के बीच एक और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा जगत से जुड़ी घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया।
B. Saroja Devi, a prominent figure in South Indian cinema, has passed away at 87. Known for her extensive career in over 200 films, she was a celebrated actress and received numerous accolades, including the Padma Shri and Padma Bhushan. Her legacy continues to inspire future… pic.twitter.com/SnfnAZiqrm
— Madhuri Adnal (@madhuriadnal) July 14, 2025
जूलियन मैकमोहन जैसे हॉलीवुड कलाकार की मृत्यु भी हाल ही में हुई, जिसने ग्लोबल स्तर पर फिल्म इंडस्ट्री को गहरे सदमे में डाल दिया।
🟪 प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि
बी. सरोजा देवी का जन्म 7 जनवरी 1938 को बेंगलुरु, कर्नाटक में हुआ था। उनका परिवार मध्यमवर्गीय था। उनके पिता एक पुलिस अधिकारी थे और मां एक संगीतप्रेमी। सरोजा देवी को बचपन से ही नृत्य और गायन में रुचि थी, जिसे उन्होंने धीरे-धीरे अभिनय की दिशा में बदल दिया।
🟪 करियर की शुरुआत और शुरुआती फिल्में
सरोजा देवी ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1955 में की थी। उन्होंने तमिल फिल्म Mahadevi में एक छोटी सी भूमिका निभाई, लेकिन जल्द ही उनकी प्रतिभा को पहचाना गया और उन्हें बड़ी भूमिकाएं मिलने लगीं।
1959 में आई Kalyana Parisu उनकी पहली बड़ी हिट साबित हुई, जिसने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
🟪 बुलंदियां और सुपरहिट फिल्में
उनका फिल्मी करियर 6 दशकों तक चला, जिसमें उन्होंने 200 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने न केवल तमिल, तेलुगू और कन्नड़ सिनेमा में बल्कि हिंदी फिल्मों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।
उनकी चर्चित फिल्मों में शामिल हैं:
- Kalyana Parisu
- Enga Veettu Pillai
- Anuradha
- Bhaaga Pirivinai
- Sasural
- Arzoo
4 भाषाओं में 200 से अधिक फिल्मों में अभिनय करने वाली सरोजा देवी बहुभाषी अभिनय प्रतिभा की प्रतीक थीं।
🟪 ‘अभिनय सरस्वती’ की उपाधि और लोकप्रियता
सरोजा देवी को दक्षिण भारत में ‘Abhinaya Saraswati’ यानी ‘अभिनय की सरस्वती’ कहा जाता था। यह उपाधि उन्हें उनकी भावनात्मक अभिव्यक्ति, संवाद अदायगी और स्क्रीन प्रेजेंस के लिए दी गई थी।
सरोजा देवी को जनता ने ‘अभिनय सरस्वती’ का दर्जा दिया – उनका अभिनय हर दिल को छू गया।
End of an era in cinema! Eminent actress B Saroja Devi no more! She was 87.
Acted in hundreds of movies in Telugu, Kannada, Tamil and Hindi!
Was fortunate to interview her earlier this year for something totally different!
Atma Shanti! 🙏🏼🙏🏼🙏🏼 pic.twitter.com/ir3w3DQFZG
— मङ्गलम् (@veejaysai) July 14, 2025
🟪 निजी जीवन और पारिवारिक पहलू
उन्होंने श्री हरणाथ से विवाह किया था जो एक सिविल इंजीनियर थे। उनका विवाह जीवन सरल लेकिन प्रेरणादायक रहा। वे अपने निजी जीवन को हमेशा कैमरे से दूर रखती थीं। उनका मानना था कि अभिनय के बाद परिवार ही सबसे महत्वपूर्ण है।
🟪 पुरस्कार और सम्मान
सरोजा देवी को भारत सरकार ने पद्मश्री (1969) और पद्म भूषण (1992) से सम्मानित किया था। इसके अलावा उन्हें कई राज्य स्तरीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी मिले।
उन्होंने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की निर्णायक समिति में भी योगदान दिया और कला के क्षेत्र में नए चेहरों को प्रेरित किया।
🟪 इंडस्ट्री और नेताओं की श्रद्धांजलि
उनकी मृत्यु के बाद तमिलनाडु और कर्नाटक सरकारों ने सार्वजनिक रूप से श्रद्धांजलि दी। कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कहा कि “सरोजा देवी राज्य का गौरव थीं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्विटर पर लिखा,
“बी. सरोजा देवी जी का निधन भारतीय सिनेमा के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने कला के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया है।”
साउथ सुपरस्टार रजनीकांत और कमल हासन ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनकी फिल्मों ने आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता बनाया।
PM मोदी और रजनीकांत सहित कई सितारों ने दी श्रद्धांजलि
🟪 सरोजा देवी की विरासत
सरोजा देवी सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं थीं, वो एक युग थीं। उन्होंने पारंपरिक स्त्री पात्रों को सशक्त छवि दी। उनकी फिल्मों ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने की ताकत रखी।
उनकी शैली आज भी नए कलाकारों के लिए प्रेरणास्त्रोत है। उनका जीवन यह दर्शाता है कि लगन, कला और मूल्य एक साथ चल सकते हैं।
🟪एक सदी का सितारा अस्त
बी. सरोजा देवी का जाना भारतीय सिनेमा के एक स्वर्णिम अध्याय का समाप्त होना है। उन्होंने जो मिसाल कायम की, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
उनकी स्मृतियाँ सदा जीवित रहेंगी।
उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।




















