भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo इन दिनों हर जगह चर्चा में है। जनवरी 2026 में Directorate General of Civil Aviation (DGCA) ने IndiGo पर ₹22.20 करोड़ का रिकॉर्ड जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना दिसंबर 2025 में हुई बड़े पैमाने पर उड़ान रद्दीकरण और देरी के कारण है, जिसने लाखों यात्रियों को परेशान किया।
IndiGo, जो भारत में 60% से ज्यादा मार्केट शेयर रखती है, ने दिसंबर की शुरुआत में हजारों फ्लाइट्स कैंसल कर दीं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे एयरपोर्ट्स पर सामान का ढेर लग गया, पैसेंजर्स घंटों फंसे रहे। यह घटना इतनी गंभीर थी कि इसे “ऑपरेशनल मेल्टडाउन” कहा जा रहा है।
इस ब्लॉग में हम indigo की इस ट्रेंडिंग न्यूज को विस्तार से समझेंगे – क्या हुआ, क्यों हुआ, DGCA का एक्शन क्या है, IndiGo की प्रतिक्रिया और भविष्य में क्या हो सकता है। सब कुछ सरल हिंदी में, ताकि हर कोई समझ सके।
दिसंबर 2025 का उड़ान संकट: पूरी घटना क्या थी?
दिसंबर 2025 में, खासकर 3 से 5 दिसंबर के बीच, IndiGo ने बड़े पैमाने पर फ्लाइट्स प्रभावित कीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, सिर्फ तीन दिनों में 2,507 फ्लाइट्स कैंसल हुईं और 1,852 फ्लाइट्स में लंबी देरी हुई। कुल मिलाकर 3 से 10 दिसंबर तक 3 लाख से ज्यादा पैसेंजर्स प्रभावित हुए।
यह संकट अचानक नहीं आया। DGCA की जांच में पाया गया कि मुख्य कारण था नए Flight Duty Time Limitation (FDTL) नियमों का ठीक से लागू न होना। ये नियम पायलट्स और क्रू मेंबर्स की ड्यूटी टाइम को सीमित करते हैं ताकि थकान से दुर्घटना न हो। IndiGo ने इन नियमों को लागू करने में तैयारी नहीं की, जिससे पायलट्स की रोस्टरिंग में गड़बड़ी आई।
एक फ्लाइट कैंसल होने से दूसरी प्रभावित हुई – यह चेन रिएक्शन बन गया। घने कोहरे और क्रू की कमी ने स्थिति और खराब कर दी। एयरपोर्ट्स पर सामान का ढेर, पैसेंजर्स की परेशानी, सोशल मीडिया पर गुस्से की तस्वीरें – सब वायरल हो गया। IndiGo की इमेज को बड़ा नुकसान पहुंचा।

FDTL नियम क्या हैं और IndiGo ने कहां चूक की?
Flight Duty Time Limitation (FDTL) नियम DGCA द्वारा बनाए गए हैं, जो पायलट्स की अधिकतम ड्यूटी घंटे, रेस्ट पीरियड और फ्लाइट्स की संख्या तय करते हैं। 2025 में DGCA ने इन नियमों को और सख्त किया – पायलट्स को ज्यादा रेस्ट मिले, थकान कम हो, सुरक्षा बढ़े।
IndiGo को इन नए नियमों को लागू करने का समय मिला था, लेकिन एयरलाइन ने रोस्टर को “ओवर-ऑप्टिमाइज” किया। यानी ज्यादा फ्लाइट्स शेड्यूल कर लीं, लेकिन पर्याप्त पायलट्स नहीं रखे। जब नियम लागू होने का समय आया, तो IndiGo तैयार नहीं थी।
DGCA की 40 पेज की रिपोर्ट में कहा गया कि IndiGo में प्लानिंग की कमी, सॉफ्टवेयर सपोर्ट में कमी, मैनेजमेंट ओवरसाइट की कमी और कमर्शियल प्रेशर को क्रू फटीग से बैलेंस न करना – ये सब कारण थे। एयरलाइन ने रिकवरी बफर्स नहीं रखे, जिससे छोटी समस्या बड़ी हो गई।
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DGCA का सख्त एक्शन: जुर्माना, वार्निंग और बैंक गारंटी
17 जनवरी 2026 को DGCA ने IndiGo पर ₹22.20 करोड़ का जुर्माना लगाया – भारतीय एविएशन इतिहास का सबसे बड़ा। इसमें:
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₹1.80 करोड़ का एकमुश्त जुर्माना – 6 अलग-अलग CAR (Civil Aviation Requirements) उल्लंघनों के लिए।
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₹20.40 करोड़ का जुर्माना – 5 दिसंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 तक 68 दिनों की FDTL नॉन-कंप्लायंस के लिए (रोजाना ₹30 लाख)।
DGCA ने IndiGo को ₹50 करोड़ की बैंक गारंटी जमा करने को कहा है, जो सिस्टेमिक सुधारों से जुड़ी है। यदि IndiGo नियम फॉलो नहीं करती, तो गारंटी जब्त हो सकती है।
सीनियर मैनेजमेंट पर भी एक्शन:
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CEO Pieter Elbers को फ्लाइट ओवरसाइट और क्राइसिस मैनेजमेंट में कमी के लिए कैशन्ड किया गया।
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COO Isidre Porqueras को FDTL इम्पैक्ट आकलन न करने के लिए वार्निंग।
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SVP ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर को उनकी पोजिशन से हटाने और कोई अकाउंटेबल रोल न देने का निर्देश।
यह एक्शन दिखाता है कि DGCA अब सख्त हो गया है – ऑपरेशनल कैओस की कीमत चुकानी पड़ेगी।
IndiGo की प्रतिक्रिया: क्या कह रही है एयरलाइन?
IndiGo ने DGCA के ऑर्डर को स्वीकार किया है और कहा है कि वे पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं। एयरलाइन ने प्रभावित पैसेंजर्स के सभी रिफंड प्रोसेस कर दिए हैं।
IndiGo ने सुधार के कदम उठाए:
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पायलट अलाउंसेस बढ़ाए गए।
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रोस्टर प्लानिंग में बदलाव।
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विंटर शेड्यूल के अंत तक फ्लाइट्स कम की गईं।
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फरवरी 10, 2026 के बाद नए FDTL नियमों के तहत 2000+ फ्लाइट्स चलाने की क्षमता पर DGCA को रिपोर्ट देनी है।




















