संघ बजट 2026 का अवलोकन
Income Tax Union Budget 2026 : संघ बजट 2026-27, जो 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया, भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह बजट विकास, रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचे और कर सुधारों पर केंद्रित है। विशेष रूप से आयकर (Income Tax) के क्षेत्र में, बजट ने कोई बड़े स्लैब बदलाव नहीं किए, लेकिन कई सुविधाजनक और व्यावहारिक परिवर्तन पेश किए हैं जो करदाताओं की जिंदगी आसान बनाएंगे। Income Tax Union Budget 2026 का मुख्य फोकस नई आयकर अधिनियम 2025 पर है, जो अप्रैल 2026 से लागू होगा।
भारत में आयकर व्यवस्था ब्रिटिश काल से चली आ रही है, लेकिन स्वतंत्रता के बाद इसे आधुनिक रूप दिया गया। 1961 का आयकर अधिनियम अब पुराना हो चुका है, और बजट 2026 इसे बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आइए विस्तार से देखें।

आयकर का इतिहास और विकास: भारत में टैक्स सिस्टम की यात्रा
भारत में आयकर की शुरुआत 1860 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। उस समय यह एक अस्थायी उपाय था, लेकिन 1886 में इसे स्थायी रूप दिया गया। स्वतंत्रता के बाद, 1961 का आयकर अधिनियम लागू हुआ, जो आज तक आधार बना हुआ है। समय-समय पर बजट में बदलाव होते रहे हैं, जैसे 2019 में कॉर्पोरेट टैक्स रेट में कटौती और 2020 में नया टैक्स रेजीम का परिचय।
Income Tax Union Budget 2026 में, सरकार ने घोषणा की कि नया आयकर अधिनियम 2025 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। यह अधिनियम पुराने कानून की जटिलताओं को दूर करेगा, सरल भाषा में लिखा जाएगा और अनुपालन को आसान बनाएगा। यह बदलाव करदाताओं के लिए एक बड़ा राहत है, क्योंकि पुराना अधिनियम 600 से अधिक धाराओं से भरा है, जो अक्सर विवादों का कारण बनता है।
बजट के अनुसार, नए नियम और फॉर्म जल्द ही अधिसूचित किए जाएंगे। यह कदम डिजिटल इंडिया की दिशा में है, जहां ई-फाइलिंग और ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। Income Tax Union Budget 2026 का यह हिस्सा कर प्रणाली को पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने पर जोर देता है।
वर्तमान आयकर स्लैब रेट्स: पुरानी और नई रेजीम की तुलना
संघ बजट 2026 में आयकर स्लैब रेट्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह कई करदाताओं के लिए निराशा का कारण हो सकता है, लेकिन सरकार का कहना है कि पिछले वर्षों में किए गए बदलाव पर्याप्त हैं। आइए पुरानी और नई टैक्स रेजीम की विस्तृत तुलना करें।
नई टैक्स रेजीम (डिफॉल्ट रेजीम)
नई रेजीम में छूट कम हैं, लेकिन स्लैब सरल हैं। FY 2026-27 (AY 2027-28) के लिए स्लैब इस प्रकार हैं:
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0 से 4 लाख रुपये: 0% टैक्स
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4 लाख से 8 लाख रुपये: 5%
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8 लाख से 12 लाख रुपये: 10%
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12 लाख से 16 लाख रुपये: 15%
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16 लाख से 20 लाख रुपये: 20%
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20 लाख से 24 लाख रुपये: 25%
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24 लाख से ऊपर: 30%
इस रेजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन 50,000 रुपये है, लेकिन HRA, LTA जैसी छूट नहीं मिलती। Income Tax Union Budget 2026 में इस रेजीम को और आकर्षक बनाने के लिए कोई नई छूट नहीं जोड़ी गई, लेकिन TCS और TDS में बदलाव से अप्रत्यक्ष लाभ होगा।
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पुरानी रेजीम में अधिक छूट हैं, लेकिन स्लैब थोड़े अलग हैं:
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0 से 2.5 लाख रुपये: 0%
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2.5 लाख से 5 लाख रुपये: 5%
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5 लाख से 10 लाख रुपये: 20%
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10 लाख से ऊपर: 30%
यहां सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख तक की छूट, मेडिकल इंश्योरेंस पर 25,000 रुपये आदि मिलते हैं। बजट 2026 में पुरानी रेजीम को जारी रखा गया है, लेकिन सरकार नई रेजीम को प्रोत्साहित कर रही है।
तुलना से पता चलता है कि कम आय वाले लोगों के लिए नई रेजीम बेहतर है, जबकि उच्च आय वालों के लिए पुरानी रेजीम फायदेमंद हो सकती है यदि वे निवेश करते हैं। Income Tax Union Budget 2026 ने स्लैब में स्थिरता रखकर अनिश्चितता कम की है।
प्रमुख बदलाव: नया आयकर अधिनियम 2025
बजट का सबसे बड़ा हाइलाइट नया आयकर अधिनियम 2025 है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। यह पुराने 1961 अधिनियम की जगह लेगा। मुख्य विशेषताएं:
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सरल भाषा: कानूनी जटिलताएं कम होंगी, सामान्य व्यक्ति आसानी से समझ सकेंगे।
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कम धाराएं: अनावश्यक प्रावधान हटाए जाएंगे।
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डिजिटल अनुपालन: ई-वेरिफिकेशन और ऑटो-असेसमेंट बढ़ेगा।
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पेनाल्टी में राहत: छोटी गलतियों पर कम जुर्माना।
यह बदलाव Income Tax Union Budget 2026 को ऐतिहासिक बनाता है, क्योंकि यह 60 साल पुराने कानून को अपडेट कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विवाद कम होंगे और अनुपालन बढ़ेगा।

TCS और TDS में बदलाव: विदेशी लेनदेन पर राहत
बजट 2026 में टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (TCS) और टैक्स डिडक्शन एट सोर्स (TDS) में कई रेशनलाइजेशन किए गए हैं।
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LRS पर TCS कटौती: शिक्षा और चिकित्सा के लिए विदेशी रेमिटेंस पर TCS दर 5% से घटाकर 2% की गई। अन्य उद्देश्यों के लिए 20% बनी रहेगी।
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ओवरसीज टूर पैकेज: TCS 5%/20% से घटाकर 2%।
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स्क्रैप और मिनरल्स पर TCS: 1% से बढ़ाकर 2%।
ये बदलाव मध्यम वर्ग के लिए राहत हैं, खासकर वे जो बच्चों को विदेश पढ़ाने भेजते हैं। Income Tax Union Budget 2026 ने इससे कैश फ्लो में सुधार किया है।
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TDS में भी बदलाव: अचल संपत्ति की बिक्री पर NRI के लिए PAN का उपयोग, TAN की जरूरत नहीं। इससे लेनदेन आसान होगा।
शेयर बायबैक पर टैक्सेशन: कैपिटल गेन में शिफ्ट
पहले शेयर बायबैक को डिविडेंड माना जाता था, लेकिन अब इसे कैपिटल गेन के रूप में टैक्स किया जाएगा। प्रमोटर्स पर 22% (कंपनी) या 30% (अन्य) प्रभावी दर, जबकि अन्य शेयरधारकों पर सामान्य कैपिटल गेन रेट।
यह बदलाव निवेशकों के लिए मिश्रित है। लॉन्ग-टर्म होल्डर्स को फायदा, लेकिन शॉर्ट-टर्म पर अधिक टैक्स। Income Tax Union Budget 2026 ने इससे टैक्स रेवेन्यू बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
MAT में बदलाव: कॉर्पोरेट्स के लिए राहत
मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (MAT) दर 15% से घटाकर 14%। MAT क्रेडिट कैरी फॉरवर्ड नहीं होगा, लेकिन पास्ट क्रेडिट का 25% सेटऑफ Allowed।
यह कॉर्पोरेट टैक्स रेजीम को आकर्षक बनाता है, खासकर नई रेजीम में। Income Tax Union Budget 2026 ने इससे निवेश को प्रोत्साहित किया है।
स्पेशल इनकम पर टैक्स रेट: 60% से 30%
अनएक्सप्लेन्ड इन्वेस्टमेंट्स या कैश क्रेडिट्स पर टैक्स 60% से घटाकर 30%। यह करदाताओं को ईमानदारी से रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
ITR फाइलिंग में बदलाव: अधिक समय और स्टैगर्ड डेडलाइन
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रिवाइज्ड रिटर्न की डेडलाइन 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च।
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सैलरीड के लिए ITR डेडलाइन 31 जुलाई, नॉन-ऑडिट बिजनेस के लिए 31 अगस्त।
ये बदलाव अनुपालन को आसान बनाते हैं। Income Tax Union Budget 2026 ने इससे देरी के जुर्माने कम किए हैं।
IT सेक्टर के लिए सेफ हार्बर: विकास इंजन
IT सेवाओं के लिए सेफ हार्बर मार्जिन 15.5%, थ्रेशोल्ड 300 करोड़ से 2000 करोड़। यह IT कंपनियों को आकर्षित करेगा।
करदाताओं पर प्रभाव: सैलरीड, बिजनेस और निवेशक
सैलरीड क्लास
कोई स्लैब बदलाव नहीं, लेकिन TCS कटौती से विदेश यात्रा सस्ती। स्टैंडर्ड डिडक्शन अपरिवर्तित।
बिजनेस और कॉर्पोरेट्स
MAT कटौती और सेफ हार्बर से फायदा। नया अधिनियम से अनुपालन आसान।
निवेशक
शेयर बायबैक पर कैपिटल गेन से टैक्स प्लानिंग बदल जाएगी। STT में वृद्धि से F&O ट्रेडिंग प्रभावित।
Income Tax Union Budget 2026 ने मध्यम वर्ग को अप्रत्यक्ष राहत दी है।
टैक्स प्लानिंग टिप्स: बजट 2026 के बाद क्या करें
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रेजीम चुनें: अपनी आय और निवेश के आधार पर पुरानी या नई रेजीम चुनें।
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निवेश: 80C के तहत PPF, ELSS में निवेश करें।
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विदेशी रेमिटेंस: शिक्षा के लिए LRS का उपयोग करें, TCS कम है।
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ITR समय पर फाइल करें: नई डेडलाइन का लाभ लें।
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डिजिटल टूल्स: आयकर पोर्टल का उपयोग करें।




















