Hezbollah की स्थापना 1982 में हुई, जब Israel ने लेबनान पर आक्रमण किया था। ईरान की इस्लामी क्रांति के प्रभाव से यह संगठन उभरा। शुरू में यह इजराइल के खिलाफ प्रतिरोध के रूप में जाना गया। 1980-90 के दशक में गुरिल्ला युद्ध लड़ा और 2000 में Israel को दक्षिणी लेबनान से पीछे हटने पर मजबूर किया।
2006 का Hezbollah-Israel युद्ध सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था। Hezbollah ने हजारों रॉकेट दागे और Israel को भारी नुकसान पहुंचाया। ईरान से मिलने वाले हथियार, प्रशिक्षण और फंडिंग ने इसे मजबूत बनाया। आज Hezbollah के पास हजारों उन्नत रॉकेट्स, ड्रोन और मिसाइलें हैं। लेबनान की राजनीति में यह एक प्रमुख पार्टी है, संसद में सीटें रखती है, लेकिन कई देशों में इसे आतंकवादी संगठन माना जाता है।
ईरान-Hezbollah का रिश्ता इतना गहरा है कि इसे ईरान का “विस्तार” कहा जाता है। ईरान सालाना अरबों डॉलर की मदद देता है। बदले में Hezbollah सीरिया में असद सरकार की मदद करता है और क्षेत्र में ईरान के हितों की रक्षा करता है। Khamenei की मौत ने इस रिश्ते को सबसे बड़े संकट में डाल दिया। Hezbollah ने वादा किया कि वे अमेरिका और Israel के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे, चाहे कितनी भी कुर्बानी क्यों न दें।

Khamenei की मौत और संघर्ष की शुरुआत
फरवरी के अंत में अमेरिका और Israel ने ईरान पर बड़े हमले किए। इनमें सुप्रीम लीडर Khamenei सहित कई वरिष्ठ नेता मारे गए। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। ईरान ने जवाब में मिसाइलें दागीं, और अब Hezbollah ने मोर्चा खोल दिया।
1 मार्च को Hezbollah ने कहा कि Khamenei की मौत का बदला लेने के लिए उन्होंने Haifa के पास सैन्य ठिकाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया। Israel ने इसे सीजफायर का उल्लंघन बताया और तुरंत Beirut के दक्षिणी इलाकों, जहां Hezbollah का गढ़ है, पर हमले शुरू कर दिए। Israel ने वीडियो जारी कर दावा किया कि वे सटीक हमले कर रहे हैं और हथियार डिपो नष्ट कर रहे हैं।
लेबनान में बड़े पैमाने पर तबाही हुई। दक्षिणी लेबनान और Beirut के उपनगरों में विस्फोटों की आवाजें गूंजीं। Israel ने 50 से ज्यादा गांवों के लोगों को निकासी की चेतावनी दी। Hezbollah ने कहा कि वे और हमले करेंगे। Israel के सेना प्रमुख ने कहा कि यह लड़ाई कई दिनों तक चल सकती है।



















