Rajpal Yadav बॉलीवुड के सबसे पॉपुलर कॉमेडियंस में से एक हैं। उनकी हंसी और अनोखी एक्टिंग ने लाखों लोगों को मनोरंजन दिया है। लेकिन फरवरी 2026 में एक गंभीर खबर ने सबको चौंका दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के पुराने मामलों में उन्हें कोई राहत नहीं दी और सरेंडर का आदेश दिया। इसके बाद 5 फरवरी 2026 को शाम 4 बजे राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया।
राजपाल यादव का जन्म 16 मार्च 1971 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हुआ। साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं, पिता किसान थे। बचपन से एक्टिंग का शौक था। उन्होंने लखनऊ के भारतेंदु नाट्य अकादमी से ट्रेनिंग ली। बॉलीवुड में 1999 में एंट्री हुई, लेकिन असली नाम ‘हंगामा’, ‘चुप चुप के’, ‘भूल भुलैया’ जैसी फिल्मों से मिला। उनकी कॉमेडी इतनी नैचुरल है कि दर्शक हंसते-हंसते लोट-पोट हो जाते हैं। लेकिन अब Rajpal Yadav तिहाड़ जेल में हैं, यह सुनकर फैंस सदमे में हैं।
राजपाल यादव का करियर: संघर्ष से स्टारडम तक का सफर
राजपाल यादव का सफर आसान नहीं रहा। थिएटर से शुरूआत की, छोटे-छोटे रोल्स किए। 2000 के आसपास ‘जंग’ जैसी फिल्मों में नजर आए, लेकिन ब्रेकथ्रू 2003 की ‘हंगामा’ से मिला। प्रियदर्शन की फिल्मों में वे चमके – ‘हंगामा’, ‘मालामाल वीकली’, ‘भूल भुलैया’। ‘भूल भुलैया’ में उनका चोटी वाला किरदार आज भी याद किया जाता है।
उन्होंने 200 से ज्यादा फिल्में की हैं। ‘चुप चुप के’ में गांधीजी का रोल, ‘पार्टनर’ में चुटकुले, ‘धमाल’ में कॉमिक टाइमिंग – सब कुछ कमाल का। टेलीविजन पर भी ‘खिचड़ी’ जैसे शोज में काम किया। कई अवॉर्ड नॉमिनेशंस मिले। लेकिन पर्सनल लाइफ में मुश्किलें आईं। 2013 में भी एक लोन मामले में जेल गए थे। Rajpal Yadav की नेट वर्थ करोड़ों में बताई जाती है, लेकिन फाइनेंशियल मैनेजमेंट की समस्या रही। फिल्में फ्लॉप होने पर लोन चुकाना मुश्किल हो जाता है।
हाल की फिल्मों में ‘भूल भुलैया 3’ और अन्य प्रोजेक्ट्स में वे नजर आए। उनकी एनर्जी अभी भी वैसी ही है। लेकिन यह चेक बाउंस का केस 2010 से चल रहा है, जो अब सजा में बदल गया।
चेक बाउंस मामला: शुरुआत से अब तक की पूरी डिटेल्स
यह मामला 2010 का है। राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का लोन लिया। फिल्म फ्लॉप हो गई, पैसा नहीं लौटा पाए। लोन चुकाने के लिए चेक दिए, लेकिन वे बाउंस हो गए। कंपनी ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के सेक्शन 138 के तहत केस किया।
2019 में सेशंस कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया। सजा 6 महीने की जेल और जुर्माना थी। राजपाल यादव ने अपील की। 2024 में हाईकोर्ट ने सजा बरकरार रखी। उन्होंने कुछ पैसे चुकाए – कुल 9 करोड़ के आसपास दावा था, लेकिन सिर्फ 50 लाख तक दिए। कोर्ट ने कहा कि इंडस्ट्री से होने के बावजूद स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं मिलेगा।
फरवरी 2026 में कोर्ट ने सरेंडर की डेडलाइन दी। 2 फरवरी को आदेश आया कि 4 फरवरी तक सरेंडर करें। वे नहीं आए, एक्सटेंशन मांगा। 5 फरवरी को कोर्ट ने सख्ती दिखाई, कहा कि पहले सरेंडर करो, फिर सुनेंगे। जस्टिस स्वरना कांता शर्मा ने कहा, “कानून सबके लिए बराबर है। अवमानना करने वालों को राहत नहीं मिलेगी।” शाम 4 बजे राजपाल यादव तिहाड़ पहुंचे और सरेंडर कर दिया।
कोर्ट प्रोसीडिंग्स: स्टेप बाय स्टेप क्या हुआ?
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2010: लोन लिया, चेक बाउंस।
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2018-2019: कंप्लेंट और सेशंस कोर्ट में दोषसिद्धि।
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2024: हाईकोर्ट ने अपील खारिज की, सजा कन्फर्म।
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जनवरी-फरवरी 2026: कुछ पैसे दिए, लेकिन बाकी बकाया।
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2 फरवरी 2026: सरेंडर का आदेश, 4 फरवरी तक समय।
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4 फरवरी: नहीं आए, एक्सटेंशन मांगा।
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5 फरवरी: कोर्ट ने खारिज किया, इमीडिएट सरेंडर ऑर्डर।
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5 फरवरी शाम 4 बजे: तिहाड़ में सरेंडर।




















