India US Trade Deal 2026: मोदी-ट्रंप फोन कॉल के बाद ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू – टैरिफ कट, रूस तेल पर रोक और भारत की नई ट्रेड स्ट्रैटेजी
2 फरवरी 2026 की शाम को जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Truth Social पर पोस्ट किया कि भारत के साथ ट्रेड डील फाइनल हो गई है, तो भारत में खुशी और उत्साह की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब “Made in India” प्रोडक्ट्स अमेरिका में सिर्फ 18% टैरिफ के साथ पहुंचेंगे। यह India US Trade Deal न केवल पिछले कई महीनों से चली आ रही टैरिफ अनिश्चितता को खत्म करता है, बल्कि भारत को चीन, वियतनाम, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों पर स्पष्ट टैरिफ एडवांटेज देता है।
3 फरवरी को Nifty 50 ने ओपनिंग में ही 5% से ज्यादा की तेजी दिखाई। Reliance Industries, gems & jewellery कंपनियां, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग गुड्स से जुड़े स्टॉक्स में भारी खरीदारी देखी गई। यह डील अभी “इनिशियल” या “मिनी” ट्रेड एग्रीमेंट के रूप में है, लेकिन इसका आर्थिक, राजनीतिक और जियोपॉलिटिकल प्रभाव बहुत गहरा है।

2025 की टैरिफ वॉर से 2026 के ब्रेकथ्रू तक
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड रिलेशनशिप लंबे समय से मजबूत रही है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है, जहां भारत का लगभग 18% कुल निर्यात जाता है। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे टर्म (जनवरी 2025 से शुरू) में स्थिति बदल गई। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण भारत ने रूसी तेल बड़े पैमाने पर खरीदा, जिससे अमेरिका नाराज हुआ। अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारत पर reciprocal टैरिफ 25% लगा दिए और रूसी तेल आयात के लिए अतिरिक्त 25% पेनल्टी थोप दी। कुल मिलाकर कई भारतीय प्रोडक्ट्स पर 50% तक टैरिफ लग गए।
इसका सबसे ज्यादा नुकसान टेक्सटाइल, गारमेंट्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर प्रोडक्ट्स, मरीन प्रोडक्ट्स, केमिकल्स और कुछ इंजीनियरिंग गुड्स को हुआ – ये सेक्टर भारत के कुल एक्सपोर्ट का करीब 55% हिस्सा हैं। कई शहरों में टर्नओवर 30-50% तक गिर गया। हालांकि फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर (जिन्हें टैरिफ से छूट मिली) ने निर्यात में 21% YoY ग्रोथ दिखाई।
भारत ने बैकअप प्लान बनाया और जनवरी 2026 में यूरोपियन यूनियन के साथ “मदर ऑफ ऑल डील्स” साइन की। इसके बाद अमेरिका के साथ लंबी नेगोशिएशंस चलीं। आखिरकार 2 फरवरी 2026 को ट्रंप-मोदी के बीच फोन कॉल के बाद ब्रेकथ्रू हुआ। भारत ने रूसी तेल आयात को धीरे-धीरे खत्म करने का वादा किया और बदले में अमेरिका ने टैरिफ घटाए।

डील की मुख्य शर्तें क्या हैं?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पोस्ट में मुख्य बातें बताईं:
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अमेरिका द्वारा भारत पर लगाया गया reciprocal टैरिफ 25% से घटाकर 18% किया गया (कुल प्रभावी टैरिफ 50% से घटकर 18% हुआ)।
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भारत अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर लगे टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स को शून्य करेगा।
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भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा और अमेरिका (और संभवतः वेनेजुएला) से तेल, कोयला और अन्य एनर्जी प्रोडक्ट्स खरीदेगा।
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भारत अमेरिका से $500 बिलियन से ज्यादा के एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी, एनर्जी और कोल प्रोडक्ट्स की खरीद करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्य रूप से टैरिफ कट पर जोर दिया और कहा कि यह “Make in India” को बहुत बड़ा बूस्ट देगा। व्हाइट हाउस ने भी पुष्टि की कि पेनल्टी 25% भी हट रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि $500 बिलियन की खरीद का आंकड़ा काफी महत्वाकांक्षी है, क्योंकि भारत की कुल सालाना इम्पोर्ट्स करीब $700-750 बिलियन हैं। लेकिन एनर्जी सेक्टर में शिफ्ट वास्तविक और संभव है।
विभिन्न सेक्टर्स पर प्रभाव
सकारात्मक प्रभाव (एक्सपोर्टर्स के लिए राहत):
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टेक्सटाइल, अपैरल, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर, फुटवियर, ऑटो कंपोनेंट्स, इंजीनियरिंग गुड्स: 18% टैरिफ से लागत में कमी आएगी। चीन (जिस पर अभी भी उच्च टैरिफ हैं) के मुकाबले भारत को बड़ा फायदा होगा। इससे वॉल्यूम में तेजी आएगी और लाखों जॉब्स बढ़ेंगी।
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फार्मास्यूटिकल्स: पहले से मजबूत स्थिति और अब और बेहतर एक्सेस।
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प्रोसेस्ड फूड्स और फूड प्रोसेसिंग: अमेरिकी मार्केट में नई संभावनाएं।
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स्टॉक मार्केट: Nifty में 5%+ उछाल, रुपये में तेजी, FPI इनफ्लो में रिकवरी।
चुनौतियां और नकारात्मक प्रभाव:
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कृषि और डेयरी: अमेरिकी फार्म प्रोडक्ट्स (डेयरी, चिकन, GM क्रॉप्स आदि) पर जीरो टैरिफ से भारतीय किसानों और डेयरी उद्योग पर दबाव बढ़ेगा। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि “किसानों की सुरक्षा कैसे होगी?”
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मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर: अमेरिकी इम्पोर्ट्स से घरेलू कंपनियों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
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एनर्जी डिपेंडेंसी: रूस से शिफ्ट होने पर लागत बढ़ सकती है और सप्लाई चेन में अस्थिरता आ सकती है।
कुल मिलाकर लेबर-इंटेंसिव एक्सपोर्ट सेक्टर, जो 2025 में सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे, अब रिकवरी की राह पर हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: NDA vs विपक्ष
NDA सरकार: इसे “ऐतिहासिक” और “Make in India” के लिए गेम-चेंजर बता रही है। विदेश मंत्री एस जयशंकर, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने स्वागत किया। गोयल ने कहा कि इससे किसान, स्किल्ड वर्कर्स और एक्सपोर्टर्स को बड़ा फायदा होगा।
कांग्रेस और विपक्ष: इसे “कैपिटुलेशन” बता रहे हैं। राहुल गांधी ने सवाल उठाए – “रूस तेल क्यों छोड़ा? डील की पूरी डिटेल्स क्यों नहीं बताई जा रही? कृषि क्षेत्र को कैसे बचाएंगे?” कई विपक्षी नेता इसे किसान-विरोधी बता रहे हैं।
जियोपॉलिटिकल नजरिया
यह डील अमेरिका को रूस पर आर्थिक दबाव बनाने में मदद करती है (रूसी तेल राजस्व कम होगा)। भारत को QUAD और इंडो-पैसिफिक में मजबूत स्थिति मिलती है। चीन के मुकाबले भारत को टैरिफ में एडवांटेज मिलता है। लेकिन भारत की रूस के साथ पुरानी दोस्ती (S-400, तेल, हथियार) को बैलेंस करना बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
विशेषज्ञों की राय
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कई ब्रोकरेज हाउस (DBS, Edelweiss, Saxo) का मानना है कि इससे एक्सपोर्ट अर्निंग्स, निवेशक सेंटिमेंट और FPI फ्लो में सुधार होगा।
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कुछ अंतरराष्ट्रीय थिंक-टैंक (Atlantic Council, CSIS) कहते हैं कि $500 बिलियन का आंकड़ा अतिरंजित है, लेकिन अनिश्चितता खत्म होने से बाजार को राहत मिली।
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ट्रेड एक्सपर्ट्स इसे अमेरिका की “स्ट्रैटेजिक प्ले” मानते हैं – रूस को कमजोर करना और भारत को अपना मार्केट बनाना।
भारतीय बिजनेस के लिए अवसर
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एक्सपोर्टर्स को अमेरिकी मार्केट में तेजी से एंट्री करनी चाहिए, क्वालिटी और सर्टिफिकेशन पर फोकस करना चाहिए।
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SMEs को सप्लाई चेन (खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो) में शामिल होना चाहिए।
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निवेशकों के लिए एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड स्टॉक्स, फार्मा, FMCG में अच्छी पोजिशनिंग के मौके।
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किसानों को वैल्यू एडिशन (प्रोसेसिंग, पैकेजिंग) पर ध्यान देना चाहिए।
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एनर्जी कंपनियों को अमेरिकी LNG और कोयला इम्पोर्ट प्लान तैयार करना चाहिए।
चुनौतियां और जोखिम
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कृषि संवेदनशीलता: MSP, सब्सिडी और किसान आंदोलन का खतरा।
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पुराने मुद्दे जैसे IP प्रोटेक्शन, डेटा लोकलाइजेशन अभी भी अनसुलझे।
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अमेरिकी नीति में बदलाव (ट्रंप की अनप्रेडिक्टेबल पॉलिसी)।
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डील का क्रियान्वयन: डिटेल्ड एग्रीमेंट और फेज्ड रोलआउट कब होगा?




















