Bhandup Bus Accident : 29 दिसंबर 2025, रात करीब 10:05 बजे। जगह थी भांडुप रेलवे स्टेशन के बाहर स्टेशन रोड। यहां रोजाना हजारों लोग ट्रेन से उतरकर घर की ओर जाते हैं। उस दिन भी सड़क पर भीड़ थी। एक BEST बस, रूट नंबर 606 पर चल रही थी। यह एक एयर-कंडीशंड मिडी बस थी, जो वेट लीज मॉडल पर चलाई जा रही थी।
बस ड्राइवर बस को डिपो में ले जाने के लिए यू-टर्न ले रहा था। अचानक बस पीछे की ओर तेजी से बढ़ने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ड्राइवर ने ब्रेक की जगह एक्सीलरेटर दबा दिया। बस सड़क किनारे खड़े पैदल यात्रियों पर चढ़ गई। लोग चीखते-चिल्लाते भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बस ने एक के बाद एक कई लोगों को कुचल दिया। कुछ ही सेकंड में सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। खून से लथपथ लोग जमीन पर पड़े थे। आसपास के दुकानदार और राहगीर दौड़े, घायलों को उठाया और एंबुलेंस बुलाई।
यह दृश्य दिल दहला देने वाला था। Bhandup Bus Accident ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मुंबई की व्यस्त सड़कों पर पैदल यात्रियों की जान हमेशा खतरे में रहती है।
पीड़ितों की कहानी: नाम जो अब सिर्फ यादें बन गए
इस हादसे में चार लोगों ने अपनी जान गंवाई। तीन महिलाएं और एक पुरुष। नौ लोग घायल हुए, जिनमें एक 12 साल की मासूम बच्ची भी शामिल है। ये सभी साधारण मुंबईकर थे – कोई ऑफिस से लौट रहा था, कोई घर जा रहा था।

मृतक:
-
प्रणिता संदीप रसम (35 वर्ष) – एक मां, जिनकी 12 साल की बेटी भी इस हादसे में घायल हुई।
-
वर्षा सावंत (25 वर्ष) – युवा उम्र में जिंदगी खत्म हो गई।
-
मानसी मेघश्याम गुरव (49 वर्ष) – परिवार की जिम्मेदारी उठाने वाली महिला।
-
प्रशांत शिंदे (53 वर्ष) – घर लौटते समय यह हादसा हुआ।
घायल:
-
नारायण भीकाजी कांबले (59 वर्ष)
-
मंगेश मुकुंद धुखांडे (45 वर्ष)
-
ज्योति विष्णु शिर्के (55 वर्ष)
-
शीतल प्रकाश हडवे (39 वर्ष)
-
रामदास शंकर रूपे (59 वर्ष)
-
प्रताप गोपाल कोरपे (60 वर्ष)
-
रवींद्र सेवाराम घड़ीगांवकर (56 वर्ष)
-
दिनेश विनायक सावंत (49 वर्ष)
-
पूर्वा संदीप रसम (12 वर्ष) – प्रणिता रसम की बेटी।
ये नाम पढ़कर लगता है कि ये हमारे आसपास के ही लोग थे। एक मां और उसकी बेटी का साथ में हादसे का शिकार होना सबसे दर्दनाक है। पूर्वा अब अपनी मां के बिना कैसे बड़े होगी? Bhandup Bus Accident ने कई परिवारों को हमेशा के लिए तोड़ दिया।

हादसे के कारण: सिर्फ ड्राइवर की गलती या कुछ और?
जांच अभी चल रही है, लेकिन शुरुआती जानकारी से कई बातें सामने आई हैं। सबसे बड़ा कारण लगता है ड्राइवर की लापरवाही – यू-टर्न लेते समय ब्रेक की जगह एक्सीलरेटर दब जाना। ड्राइवर 52 साल का था और उसे तुरंत हिरासत में ले लिया गया।
लेकिन क्या सिर्फ ड्राइवर ही जिम्मेदार है? बिल्कुल नहीं। भांडुप स्टेशन रोड पर हॉकरों ने फुटपाथ पर पूरी तरह कब्जा कर रखा था। पैदल यात्री मजबूरन सड़क पर चल रहे थे। मिडी बसों का टर्निंग रेडियस कम होता है, जो ऐसे संकरे और भीड़भाड़ वाले इलाकों में खतरनाक साबित होता है।
मुंबई में BEST बसों के हादसे नई बात नहीं हैं। पिछले साल कुर्ला में एक बस ने कई लोगों की जान ली थी। बार-बार यही सवाल उठता है – क्या ड्राइवरों को पर्याप्त ट्रेनिंग मिल रही है? क्या बसों का रखरखाव ठीक है? क्या ट्रैफिक पुलिस हॉकरों पर कार्रवाई करती है? Bhandup Bus Accident इन सारी कमियों को उजागर कर रहा है।
सरकारी प्रतिक्रिया और मदद का ऐलान
हादसे के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे बेहद दुखद बताया और मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक व्यक्त किया और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की।
पुलिस ने ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। BEST प्रबंधन ने कहा कि बस वेट लीज पर थी और पूरी जांच की जाएगी। घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह आर्थिक मदद पर्याप्त है? परिवारों को लंबे समय तक सपोर्ट की जरूरत होगी।
जनता का गुस्सा: सोशल मीडिया पर छाई उदासी और आक्रोश
Bhandup Bus Accident सोशल मीडिया पर लगातार ट्रेंड कर रहा है। लोग दुख व्यक्त कर रहे हैं, तो कुछ BEST प्रबंधन और प्रशासन पर गुस्सा निकाल रहे हैं। कई लोग कह रहे हैं कि ड्राइवरों की ट्रेनिंग बढ़ाई जाए। हॉकरों को फुटपाथ से हटाने की मांग जोर पकड़ रही है।
कुछ लोगों ने लिखा कि मुंबई में पैदल चलना भी अब खतरे से खाली नहीं रहा। यह हादसा हमें याद दिलाता है कि सड़क सुरक्षा सिर्फ सरकार की नहीं, हम सबकी जिम्मेदारी है।
मुंबई में BEST बस हादसे: एक पुरानी समस्या
यह कोई पहला मौका नहीं है जब BEST बस हादसे में शामिल हुई हो। पिछले कुछ सालों में कई बड़े हादसे हो चुके हैं:
-
दिसंबर 2024 में कुर्ला में एक बस बेकाबू होकर कई लोगों को कुचल गई थी।
-
2023 में भी कई हादसे हुए, जहां ड्राइवर की लापरवाही या तकनीकी खराबी कारण बनी।
हर बार जांच होती है, रिपोर्ट आती है, लेकिन अमल कम होता है। Bhandup Bus Accident फिर वही पुरानी कहानी दोहरा रहा है। BEST अब इलेक्ट्रिक बसों की ओर बढ़ रही है, लेकिन सुरक्षा के मानक अभी भी पीछे हैं।
देशभर की ताज़ा ब्रेकिंग न्यूज़
सड़क सुरक्षा के लिए क्या किया जाए?
ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे:
-
ड्राइवरों के लिए नियमित ट्रेनिंग और मेंटल हेल्थ चेक।
-
भीड़भाड़ वाले इलाकों में हॉकरों को व्यवस्थित करना या हटाना।
-
बसों में ऑटोमैटिक ब्रेकिंग सिस्टम और कैमरे लगाना।
-
पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित फुटपाथ और जेब्रा क्रॉसिंग।
-
ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन।




















