Earthquake in India : 5 जनवरी 2026 की सुबह, जब पूरा देश नए साल की शुरुआत में व्यस्त था, असम में अचानक धरती कांप उठी। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) और जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (जीएफजेड) ने इसकी तीव्रता 5.2 मापी, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में इसे 5.1 बताया गया। epicenter मॉरिगांव जिले के पास था, जो गुवाहाटी से करीब 100 किलोमीटर दूर है। झटके इतने तेज थे कि गुवाहाटी, शिलांग, और उत्तर-पूर्व के अन्य हिस्सों में लोग घरों से बाहर निकल आए। सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने अनुभव शेयर किए – कोई कह रहा था कि बिस्तर हिल रहा था, तो कोई चीखते हुए जागा।
एनडीटीवी और टाइम्स ऑफ इंडिया जैसी न्यूज एजेंसियों ने रिपोर्ट किया कि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन यह घटना भारत के सिस्मिक जोन 5 में होने के कारण चिंताजनक है। असम, जो हिमालयन आर्क का हिस्सा है, पहले भी कई बड़े भूकंप झेल चुका है। इस बार की गहराई कम होने से झटके ज्यादा महसूस हुए, लेकिन सतह पर कोई क्रैक या बिल्डिंग डैमेज नहीं रिपोर्ट हुआ। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत अलर्ट जारी किया और लोगों से सतर्क रहने को कहा।

भूकंप के कारण: वैज्ञानिक दृष्टिकोण
भूकंप क्यों आते हैं? सरल शब्दों में, धरती की प्लेट्स जब एक-दूसरे से टकराती या सरकती हैं, तो ऊर्जा निकलती है, जो भूकंप का रूप लेती है। भारत में, इंडियन टेक्टॉनिक प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है, जिससे हिमालय ऊंचा होता जा रहा है। लेकिन हाल की स्टडीज, जैसे कि टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट, बताती हैं कि इंडियन प्लेट अंदर से टूट रही है। यह प्रक्रिया दक्षिण एशिया में भूकंप, सुनामी, और लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ा रही है।
असम का क्षेत्र जोन 5 में आता है, जहां 8 से ज्यादा तीव्रता के भूकंप का खतरा है। 2025 के अंत में जारी नई सिस्मिक मैप ने पूरे हिमालय को हाई-रिस्क जोन में डाल दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह भूकंप (Earthquake in India) एक वॉर्निंग है। अगर बड़ा भूकंप आया, तो 9.5 या उससे ज्यादा तीव्रता का हो सकता है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं – यह प्रकृति का हिस्सा है, और तैयारी से हम नुकसान कम कर सकते हैं।
भारत में भूकंप का इतिहास: सबक और कहानियां
भारत का भूकंप इतिहास दर्दनाक है। याद कीजिए 2001 का गुजरात भूकंप, जहां 20,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे। या 2004 का इंडियन ओशन सुनामी, जिसने 2 लाख से ज्यादा जानें लीं। असम में ही 1950 का भूकंप 8.6 तीव्रता का था, जिसने पूरा लैंडस्केप बदल दिया। हाल ही में, दिसंबर 2025 में गुजरात के कच्छ में 4.4 का भूकंप आया, और सिक्किम में 3.9 का।
ये घटनाएं बताती हैं कि भारत में भूकंप (Earthquake in India) कोई नई बात नहीं। लेकिन हर बार हम सीखते हैं। जैसे, भूकंप-प्रूफ बिल्डिंग्स बनाना, या इमरजेंसी किट रखना। मैंने एक बार एक असम के दोस्त से सुना था कि वहां बच्चे स्कूल में ही भूकंप ड्रिल सीखते हैं। यह इतिहास हमें सतर्क करता है कि तैयारी कितनी जरूरी है।
प्रभाव और नुकसान: इस बार क्या हुआ?
इस 2026 के असम भूकंप में, शुक्र है, कोई बड़ा नुकसान नहीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ घरों में दरारें आईं, लेकिन कोई मौत या घायल नहीं। ट्रांसपोर्टेशन, बिजली, और पानी की सप्लाई सामान्य रही। लेकिन मनोवैज्ञानिक प्रभाव बड़ा है – लोग डरे हुए हैं। सोशल मीडिया पर #AssamEarthquake ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग अपने अनुभव शेयर कर रहे हैं।
बड़े पैमाने पर देखें, तो ऐसे भूकंप अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं। अगर बड़ा आया, तो इंफ्रास्ट्रक्चर डैमेज से करोड़ों का नुकसान हो सकता है। लेकिन इस बार, यह एक छोटा झटका था, जो हमें तैयार रहने की याद दिलाता है।
तैयारी और सुरक्षा टिप्स: खुद को कैसे बचाएं
भूकंप (Earthquake in India) से बचाव के लिए तैयारी सबसे महत्वपूर्ण है। यहां कुछ टिप्स:
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घर में तैयारी: फर्नीचर को दीवार से बांधें, हेवी आइटम्स नीचे रखें। इमरजेंसी किट में पानी, दवाएं, टॉर्च, और रेडियो रखें।
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ड्रिल प्रैक्टिस: परिवार के साथ ‘ड्रॉप, कवर, होल्ड ऑन’ प्रैक्टिस करें। भूकंप आने पर टेबल के नीचे छिपें।
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बिल्डिंग चेक: अगर आप हाई-रिस्क एरिया में हैं, तो घर को भूकंप-प्रूफ बनवाएं। सरकार की गाइडलाइंस फॉलो करें।
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ऐप्स और अलर्ट: एनडीएमए ऐप डाउनलोड करें, जो रियल-टाइम अलर्ट देता है।
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आफ्टरशॉक से सावधान: भूकंप के बाद छोटे झटके आ सकते हैं, बाहर खुले में रहें।




















