आज की डिजिटल दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हर जगह छाया हुआ है। चाहे सोशल मीडिया हो, बिजनेस हो या रोजमर्रा की जिंदगी, AI हमें हर कदम पर मदद कर रहा है। लेकिन हाल ही में एक ऐसी खबर आई है जो भारत में खूब ट्रेंड कर रही है – Meta का Manus AI को अधिग्रहण। जी हां, फेसबुक की पैरेंट कंपनी Meta ने चीनी मूल की AI स्टार्टअप Manus को 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा की डील में खरीद लिया है। यह खबर न सिर्फ टेक जगत में हलचल मचा रही है, बल्कि भारत जैसे उभरते बाजार में AI के भविष्य पर भी गहरा असर डाल सकती है।
Manus AI क्या है? एक नजर में समझिए
Manus AI को समझने से पहले थोड़ा पीछे चलते हैं। आज की दुनिया में AI सिर्फ चैटबॉट्स तक सीमित नहीं है; यह अब ‘एजेंट्स’ की शक्ल ले चुका है, जो खुद से काम कर सकते हैं। Manus AI ऐसी ही एक कंपनी है जो जनरल-पर्पस AI एजेंट बनाती है। यह स्टार्टअप मूल रूप से चीन में Butterfly Effect या Monica.Im के नाम से शुरू हुई थी, लेकिन 2025 में जुलाई में यूएस-चाइना टेंशन के चलते अपना ऑपरेशन सिंगापुर, टोक्यो और कैलिफोर्निया के सैन माटेओ में शिफ्ट कर लिया। दिलचस्प बात यह है कि Manus AI अब चीन में अपने प्रोडक्ट्स नहीं बेचती, जो इसे ग्लोबल प्लेयर बनाती है।
तो, Manus AI क्या करता है? सरल शब्दों में कहें तो यह एक डिजिटल एम्प्लॉयी की तरह काम करता है। यूजर को बस नैचुरल लैंग्वेज में प्रॉम्प्ट देना होता है, और यह AI एजेंट वेब पर नेविगेट करके टास्क पूरा कर देता है। उदाहरण के लिए:
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मार्केट रिसर्च: कोई बिजनेस आइडिया चेक करना हो, तो यह डेटा इकट्ठा करके रिपोर्ट बना देता है।
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कोडिंग: प्रोग्रामर्स के लिए कोड लिखना या डीबग करना।
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डेटा एनालिसिस: बड़े डेटासेट्स को एनालाइज करके इनसाइट्स देना।
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ट्रिप प्लानिंग: छुट्टियों के लिए इटिनरी बनाना।
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प्रेजेंटेशन: रेंटल प्रॉपर्टी के लिए कस्टमाइज्ड स्लाइड्स तैयार करना।
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ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन: सिक्योर सैंडबॉक्स में टेस्टिंग।
Manus AI की खासियतें क्या हैं? यह हर सेशन के लिए एक डेडिकेटेड क्लाउड-बेस्ड वर्चुअल मशीन इस्तेमाल करता है, जो ट्यूरिंग-कम्पलीट है – मतलब यह किसी भी कॉम्प्लेक्स टास्क को क्रिएटिव तरीके से हैंडल कर सकता है। कंपनी ने 147 ट्रिलियन से ज्यादा टोकन्स प्रोसेस किए हैं और 80 मिलियन से ज्यादा क्लाउड वर्चुअल कंप्यूटर्स चलाए हैं। इसका ‘Wide Research’ टूल OpenAI के DeepResearch से बेहतर परफॉर्मेंस क्लेम करता है। इसके अलावा, Manus AI का अपना AI वीडियो जेनरेटर है और मार्च 2025 में Alibaba के Qwen AI के साथ पार्टनरशिप की थी। अक्टूबर 2025 में माइक्रोसॉफ्ट ने इसे विंडोज 11 पीसी में टेस्ट किया, जहां यह लोकल फाइल्स से वेबसाइट्स क्रिएट कर सकता है।
Manus AI का यूजर बेस मिलियन्स में है, जो सब्सक्रिप्शन सर्विस से चलता है। लॉन्च के 8 महीनों में ही इसका एनुअलाइज्ड रेवेन्यू 100 मिलियन डॉलर से ऊपर पहुंच गया, और रन रेट 125 मिलियन डॉलर से ज्यादा है। कंपनी ने बेंचमार्क की लीड में 75 मिलियन डॉलर की सीरीज बी फंडिंग रेज की थी, जिसमें Tencent, HSG (पहले Sequoia China) और ZhenFund जैसे इन्वेस्टर्स शामिल थे। कुल मिलाकर, Manus AI DeepSeek जैसे चाइनीज AI स्टार्टअप्स की नई वेव का हिस्सा है, जो इंडिपेंडेंट थिंकिंग और एक्शन पर फोकस करती है।
यह सब पढ़कर लगता है न कि Manus AI कोई साधारण स्टार्टअप नहीं, बल्कि AI की अगली पीढ़ी का प्रतीक है? भारत में जहां AI स्टार्टअप्स जैसे Perplexity या Krutrim उभर रहे हैं, वहां Manus AI का उदाहरण हमें बताता है कि ग्लोबल कॉम्पिटिशन कितना तेज है।
Meta का Manus AI अधिग्रहण: डिटेल्स और बैकग्राउंड
अब आते हैं मुख्य खबर पर। 29 दिसंबर 2025 को Meta ने Manus AI के अधिग्रहण की घोषणा की। डील की वैल्यू ऑफिशियली अनडिस्क्लोज्ड है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक यह 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा की है। Reuters ने इसे कन्फर्म किया है। यह अधिग्रहण Meta की 2025 में की गई कई डील्स का हिस्सा है, जैसे Limitless (Rewind) का अधिग्रहण, जो AI-पावर्ड पेंडेंट्स बनाती है।
क्या शर्तें हैं? Manus AI की सब्सक्रिप्शन सर्विस बिना किसी डिसरप्शन के चलती रहेगी, और पेड कस्टमर्स को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। Manus के करीब 100 एम्प्लॉयीज Meta की टीम्स में इंटीग्रेट होंगे, ज्यादातर सिंगापुर से। Meta का कहना है कि यह डील बिजनेस इनोवेशन को स्पीड अप करेगी और एडवांस्ड ऑटोमेशन को Meta AI जैसे प्रोडक्ट्स में इंटीग्रेट करेगी। Manus AI के CEO Xiao Hong ने कहा, “Meta से जुड़ना हमें मजबूत फाउंडेशन देगा, बिना ऑपरेशंस या डिसीजन-मेकिंग में बदलाव के।”
यह अधिग्रहण ‘एक्वी-हायर’ का उदाहरण है, जहां बड़ी कंपनियां टैलेंट और एसेट्स को खरीदती हैं। Meta ने पहले भी OpenAI और Google से टैलेंट पोक किया है। 2025 में ऐसी डील्स की बाढ़ आई है – Google ने Character AI, Amazon ने Adept, Microsoft ने Inflection AI को खरीदा। Manus AI का मामला खास है क्योंकि यह चाइनीज ओरिजिन का है, लेकिन सिंगापुर बेस्ड होने से रेगुलेटरी हर्डल्स कम हैं।
भारत में यह खबर क्यों ट्रेंड कर रही है? क्योंकि भारत AI का बड़ाマーケット है। यहां 800 मिलियन से ज्यादा इंटरनेट यूजर्स हैं, और Meta के प्रोडक्ट्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर AI फीचर्स का सीधा असर पड़ेगा। उदाहरण के लिए, Manus AI की टेक्नोलॉजी से Meta AI ज्यादा स्मार्ट हो सकता है, जो इंडियन यूजर्स के लिए लोकल लैंग्वेजेस में टास्क हैंडल करे।
Meta की AI रणनीति: Manus AI कैसे फिट होता है?
Meta, जो पहले फेसबुक के नाम से जानी जाती थी, AI में पीछे नहीं रहना चाहती। CEO Mark Zuckerberg का विजन है ‘पर्सनल सुपरइंटेलिजेंस’ – ऐसे AI सिस्टम्स जो ह्यूमन कैपेबिलिटी से आगे निकलकर यूजर्स के पर्सनल गोल्स अचीव करें। इसके लिए Meta ने Meta Superintelligence Labs (MSL) बनाई है। Manus AI का अधिग्रहण इसी में फिट होता है।
Meta की AI जर्नी देखें तो 2025 में उन्होंने Scale AI में 14.3 बिलियन डॉलर इन्वेस्ट किया और इसके को-फाउंडर Alexandr Wang को MSL में हायर किया। Limitless का अधिग्रहण AI वियरेबल्स के लिए था। Manus AI एजेंटिक AI लाता है, जो ऑटोनॉमस टास्क्स के लिए परफेक्ट है। Meta का स्टेटमेंट है: “Manus मिलियन्स यूजर्स और बिजनेसेस की डेली नीड्स सर्व कर रहा है… हम इसे और स्केल करेंगे।”
ग्लोबल कॉम्पिटिशन में Meta OpenAI, Google और Microsoft से मुकाबला कर रही है। Manus AI की टेक्नोलॉजी से Meta AI ज्यादा प्रैक्टिकल बनेगा – जैसे रियल-वर्ल्ड टास्क्स के लिए। भारत में जहां AI एडॉप्शन तेजी से बढ़ रहा है (NASSCOM रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में AI मार्केट 17 बिलियन डॉलर का), यह अधिग्रहण इंडियन स्टार्टअप्स को इंस्पायर करेगा। लेकिन चुनौती भी है – क्या इंडियन AI फर्म्स जैसे Sarvam AI या Bhashini ग्लोबल प्लेयर्स से मुकाबला कर पाएंगी?
भारत पर Manus AI अधिग्रहण का प्रभाव: ट्रेंडिंग क्यों?
भारत में AI न्यूज हमेशा ट्रेंड करती है क्योंकि यहां युवा पॉपुलेशन टेक-सेवी है। Manus AI का अधिग्रहण भारतीय मीडिया में इसलिए चर्चा में है क्योंकि Meta इंडिया का बड़ा प्लेयर है। फेसबुक पर 300 मिलियन से ज्यादा एक्टिव यूजर्स हैं, और AI इंटीग्रेशन से यूजर एक्सपीरियंस बेहतर होगा। उदाहरण के लिए, Manus AI की कैपेबिलिटी से व्हाट्सएप पर AI एजेंट्स आ सकते हैं जो बिजनेस कस्टमर्स के लिए ऑटोमेटेड सर्विस दें।
इम्प्लिकेशंस क्या हैं?
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इकोनॉमिक: भारत AI हब बन रहा है। 2025 में AI जॉब्स 1 मिलियन से ऊपर पहुंची हैं। यह अधिग्रहण इंडियन टैलेंट को अट्रैक्ट करेगा, लेकिन चाइनीज ओरिजिन से रेगुलेटरी स्क्रूटिनी बढ़ सकती है।
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टेक्नोलॉजिकल: इंडियन स्टार्टअप्स जैसे Krutrim (Bhavish Aggarwal की) या Tech Mahindra के AI प्रोजेक्ट्स को कॉम्पिटिशन मिलेगा। लेकिन यह इनोवेशन को बूस्ट करेगा।
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सोशल: AI एजेंट्स से प्राइवेसी इश्यूज बढ़ सकते हैं। भारत में डेटा प्रोटेक्शन लॉ (DPDP Act) लागू है, तो Meta को कंप्लाय करना पड़ेगा।
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ग्लोबल कनेक्शन: Manus AI की Alibaba पार्टनरशिप से इंडिया-चाइना टेक टाइज पर असर। लेकिन सिंगापुर बेस से यह न्यूट्रल है।
ट्रेंडिंग होने का कारण? सोशल मीडिया पर #ManusAI और #MetaAcquisition हैशटैग्स वायरल हैं। इंडियन टेक एंथूजिएस्ट्स डिस्कस कर रहे हैं कि यह AI रेस में Meta को आगे ले जाएगा।
AI की दुनिया में भविष्य: Manus AI से क्या बदलाव आएंगे?
AI का भविष्य एजेंटिक है – जहां AI सिर्फ जवाब नहीं देता, बल्कि ऐक्शन लेता है। Manus AI जैसी टेक्नोलॉजी से हम देख सकते हैं:
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बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन: SMEs के लिए AI एजेंट्स वर्कफ्लो ऑटोमेट करेंगे।
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एजुकेशन: स्टूडेंट्स के लिए पर्सनलाइज्ड लर्निंग।
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हेल्थकेयर: डेटा एनालिसिस से डायग्नोसिस।
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एंटरटेनमेंट: AI वीडियो जेनरेटर्स से कंटेंट क्रिएशन।




















