Umar Khalid का जन्म 1987 में दिल्ली में हुआ था। वे एक मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जहां उनके पिता एस.क्यू.आर. इलियास एक डॉक्टर हैं और पूर्व में स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) से जुड़े रहे हैं, जो एक प्रतिबंधित संगठन है। हालांकि, उमर खालिद खुद को एक सेकुलर एक्टिविस्ट के रूप में पेश करते हैं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से इतिहास में एमए और एमफिल किया, और बाद में पीएचडी की पढ़ाई शुरू की। JNU में वे छात्र राजनीति में सक्रिय थे और लेफ्ट-ओरिएंटेड ग्रुप्स से जुड़े रहे।
उमर खालिद का नाम पहली बार 2016 में चर्चा में आया, जब JNU में अफजल गुरु की फांसी के विरोध में एक कार्यक्रम हुआ। इस दौरान “भारत तेरे टुकड़े होंगे” जैसे नारे लगाने के आरोप में उन्हें देशद्रोह का केस झेलना पड़ा। हालांकि, बाद में यह केस कमजोर साबित हुआ, लेकिन इसने उन्हें एक विवादास्पद फिगर बना दिया। उमर खालिद खुद को सामाजिक न्याय, दलित-मुस्लिम एकता और सीएए-एनआरसी विरोधी आंदोलन का चेहरा बताते हैं। उनके समर्थक उन्हें एक विचारक और कार्यकर्ता मानते हैं, जबकि विरोधी उन्हें दंगे भड़काने वाला मानते हैं। “Umar Khalid” की सर्च आज भारत में लाखों बार हो रही है, खासकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर।
दुनिया की बड़ी राजनीतिक घटनाएँ
उनकी जिंदगी में टर्निंग पॉइंट आया 2020 में, जब दिल्ली दंगों के बाद उन्हें यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत गिरफ्तार किया गया। यह कानून आतंकवाद और देशद्रोह जैसे मामलों में इस्तेमाल होता है, और इसमें जमानत मिलना बेहद मुश्किल होता है। उमर खालिद पर आरोप है कि उन्होंने दंगों की साजिश रची, भड़काऊ भाषण दिए और हिंसा को बढ़ावा दिया। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में उनका नाम कई अन्य कार्यकर्ताओं जैसे शरजील इमाम और देवांगना कलिता के साथ जुड़ा है।
दिल्ली दंगे 2020: क्या हुआ था और उमर खालिद की भूमिका
फरवरी 2020 में दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों में हुए दंगे भारत के इतिहास में एक काला अध्याय हैं। इन दंगों में 53 लोग मारे गए, सैकड़ों घायल हुए और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ। दंगे सीएए (Citizenship Amendment Act) और एनआरसी (National Register of Citizens) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़के। प्रदर्शनकारी मानते थे कि ये कानून मुस्लिमों के खिलाफ हैं, जबकि सरकार का कहना था कि यह शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान है।
उमर खालिद पर आरोप है कि उन्होंने ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान दंगे भड़काने की साजिश रची, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब हो। पुलिस का दावा है कि उनके भाषणों में “चक्का जाम” और “क्रांति” जैसे शब्द थे, जो हिंसा को उकसाने वाले थे। हालांकि, उनके वकीलों का कहना है कि ये आरोप बेबुनियाद हैं और उमर खालिद सिर्फ शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे। हाई कोर्ट ने 2022 में उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोप प्रथम दृष्टया सही लगते हैं।
यह मामला आज भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उमर खालिद ने कई बार जमानत मांगी, लेकिन हर बार असफल रहे। दिसंबर 2025 में उन्हें अपनी बहन की शादी के लिए 7 दिनों की अंतरिम जमानत मिली, लेकिन 29 दिसंबर को वे फिर तिहाड़ जेल लौट गए। यह घटना “Umar Khalid” को ट्रेंडिंग बना रही है, क्योंकि सोशल मीडिया पर उनके समर्थक #FreeUmarKhalid चला रहे हैं, जबकि विरोधी #JusticeForDelhiRiotsVictims हैशटैग इस्तेमाल कर रहे हैं।
ताजा घटनाक्रम: अमेरिकी सांसदों और मेयर की अपील
जनवरी 2026 की शुरुआत में उमर खालिद का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छा गया। आठ अमेरिकी सांसदों, जिनमें जिम मैकगवर्न, जेमी रास्किन, इल्हान ओमार, रशीदा तलिब और प्रमिला जयपाल शामिल हैं, ने भारत के राजदूत को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने उमर खालिद को जमानत देने और निष्पक्ष सुनवाई की मांग की, साथ ही अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला दिया। सांसदों का कहना है कि पांच साल से ज्यादा समय तक बिना ट्रायल के जेल में रखना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने उमर खालिद के माता-पिता से दिसंबर 2025 में मिलने का जिक्र भी किया।





















