जनवरी 2026 में Punjab and Haryana High Court का सबसे चर्चित फैसला अमृतपाल सिंह से जुड़ा है। खडूर साहिब लोकसभा सांसद अमृतपाल सिंह ने अपनी तीसरी NSA हिरासत को चुनौती दी है। 13 जनवरी 2026 को कोर्ट ने पंजाब सरकार को मूल फाइलें पेश करने का निर्देश दिया और एक सप्ताह में पैरा-वाइज जवाब मांगा। अगली सुनवाई 20 जनवरी को तय हुई है।
अमृतपाल सिंह, जो वारिस पंजाब दे संगठन के प्रमुख हैं, अप्रैल 2023 से NSA के तहत हिरासत में हैं। NSA एक ऐसा कानून है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले व्यक्तियों को बिना ट्रायल के हिरासत में रखने की अनुमति देता है। सिंह की याचिका में दावा किया गया है कि उनकी हिरासत मनमानी है और संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और 22 (हिरासत से सुरक्षा) का उल्लंघन करती है। वे कहते हैं कि कोई विश्वसनीय सबूत नहीं है जो उन्हें राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों से जोड़ता हो।
बैकग्राउंड में देखें तो अमृतपाल सिंह 2022 में राजनीति में आए थे। उन्होंने ड्रग्स के खिलाफ अभियान चलाया, युवाओं को नशे से दूर रहने की सलाह दी और सिख संस्कृति को बढ़ावा दिया। लेकिन 2023 में असम पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया, जब वे अमृतसर में एक पुलिस स्टेशन पर हमले से जुड़े थे। तब से तीन बार NSA लगाया गया है। Punjab and Haryana High Court में चीफ जस्टिस शील नागु की बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के 6 सप्ताह के डेडलाइन को ध्यान में रखते हुए तेजी दिखाई है।
इस फैसले का प्रभाव क्या है? राजनीतिक रूप से, यह पंजाब में खालिस्तान मुद्दे को फिर से जिंदा कर सकता है। अमृतपाल सिंह एक सांसद हैं, इसलिए उनकी हिरासत लोकतंत्र पर सवाल उठाती है। समाज में, यह NSA जैसे सख्त कानूनों के दुरुपयोग पर बहस छेड़ती है। Punjab and Haryana High Court का यह स्टैंड न्यायिक सक्रियता का उदाहरण है, जहां कोर्ट सरकार से सबूत मांगता है। यदि सिंह की याचिका स्वीकार हुई, तो यह अन्य NSA मामलों के लिए मिसाल बनेगी।
आगे विस्तार से बात करें तो NSA 1980 का कानून है, जो ब्रिटिश काल के डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स से प्रेरित है। इसमें अधिकतम 12 महीने की हिरासत संभव है, लेकिन बार-बार एक्सटेंशन दिए जाते हैं। अमृतपाल के केस में, याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उनके भाषण सिख मूल्यों पर थे, न कि अलगाववाद पर। कोई हिंसा या षड्यंत्र का सबूत नहीं। Punjab and Haryana High Court ने केंद्र और राज्य दोनों को नोटिस जारी किया है, जो मामले की गंभीरता दिखाता है।





















