अगस्त 2026 की शुरुआत में भारतीय युवा राजनीति और नागरिक आंदोलनों के परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपनी पहली राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन किया और संस्थापक Abhijeet Dipke को राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया। यह फैसला महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में दीपके के निवास पर दो दिवसीय कोर टीम बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषित किया गया। CJP ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह फिलहाल किसी राजनीतिक दल के रूप में चुनाव नहीं लड़ेगी, बल्कि एक जन दबाव समूह (public pressure group) के रूप में काम करेगी। साथ ही सितंबर से ‘क्या बोलती पब्लिक’ नामक राष्ट्रव्यापी आउटरीच अभियान शुरू करने की भी घोषणा की गई।
यह विकास सिर्फ एक संगठनात्मक घोषणा नहीं है। यह उस युवा ऊर्जा का संस्थागत रूप है जो मई 2026 में एक व्यंग्यात्मक ट्वीट से शुरू हुई थी और कुछ ही हफ्तों में जंतर मंतर पर 37 दिन के आंदोलन में तब्दील हो गई। उस आंदोलन का नतीजा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा था। अब CJP उसी ऊर्जा को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
CJP की शुरुआत कैसे हुई?
15 मई 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक सुनवाई के दौरान कुछ टिप्पणियाँ कीं, जिन्हें कई युवाओं ने बेरोजगार युवाओं और सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं की तुलना कॉकरोच से करने के रूप में समझा। मुख्य न्यायाधीश ने बाद में कहा कि उनकी बातों का गलत अर्थ निकाला गया। लेकिन अभिजीत दीपके, जो उस समय अमेरिका में बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस की पढ़ाई कर रहे थे, ने अगले दिन एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट किया – “What if all cockroaches come together?” यह पोस्ट वायरल हो गया।
Abhijeet Dipke ने कॉकरोच जनता पार्टी नाम से एक व्यंग्यात्मक प्लेटफॉर्म लॉन्च किया। वेबसाइट बनी, सदस्यता फॉर्म खुले और इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स तेजी से बढ़े। कुछ ही दिनों में सैकड़ों हजार रजिस्ट्रेशन हो गए। आंदोलन बेरोजगारी, महंगाई, परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और युवा आकांक्षाओं जैसे मुद्दों पर केंद्रित था। जून में दीपके भारत लौटे और जंतर मंतर पर प्रदर्शन शुरू हुआ। NEET यूजी पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्याओं के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग मुख्य थी। 37 दिनों के आंदोलन, भूख हड़ताल और व्यापक समर्थन के बाद जुलाई के अंत में प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई न करने का आश्वासन भी दिया।
इस सफलता ने CJP को सिर्फ एक सोशल मीडिया घटना से आगे बढ़ा दिया। यह युवा असंतोष का प्रतीक बन गया। दीपके ने बार-बार कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और CJP के पास लंबा रास्ता बाकी है।
राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन और नेतृत्व सूची
6 अगस्त 2026 को छत्रपति संभाजीनगर में हुई बैठक के बाद CJP ने अपनी पहली राष्ट्रीय कार्यसमिति की घोषणा की। आधिकारिक बयान में कहा गया कि अगले छह महीनों में राज्य समन्वय समितियाँ, लोकसभा स्तरीय इकाइयाँ और शहर स्तर की टीमें पूरे देश में बनाई जाएँगी। केवल घोषित नाम ही पदाधिकारी हैं।
मुख्य पद इस प्रकार हैं:
- Abhijeet Dipke (30) – संस्थापक एवं राष्ट्रीय संयोजक
- सौरव दास (27) – सह-संयोजक
- आशुतोष रांका (30) – सह-संयोजक
- अजिंक्य शिंदे (35) – राष्ट्रीय संगठन प्रभारी
- दीपक बालियान (26) – संगठन सह-प्रभारी एवं उत्तर क्षेत्र प्रमुख
- आफरीन नवाज (34) – राष्ट्रीय सचिव
- विजय रेड्डी मल्लंगी (30) – मीडिया लीड एवं दक्षिण क्षेत्र
- रत्ना सिंह (31) – कानूनी मामलों की प्रमुख
- वैष्णवी गौर (29) – रिसर्च एंड पॉलिसी लीड
- रोहन देशपांडे (31) – टेक्नोलॉजी लीड
- योगेश इंगले (33) – वित्त प्रमुख एवं पश्चिम क्षेत्र
- अंकित भारद्वाज (35) – पूर्व एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र प्रमुख
यह टीम युवाओं से भरी हुई है। ज्यादातर सदस्य 25 से 35 वर्ष की आयु के हैं। दीपके ने खुद को एकमात्र सर्वोच्च नेता के रूप में पेश करने के बजाय सामूहिक नेतृत्व पर जोर दिया है। सौरव दास और आशुतोष रांका पहले से ही मुख्य प्रवक्ता की भूमिका निभा रहे थे। रत्ना सिंह कानूनी मामलों में सक्रिय रहीं, जबकि अन्य सदस्य संगठन, मीडिया, टेक्नोलॉजी और वित्त जैसे क्षेत्रों को संभाल रहे हैं।
संगठन ने स्पष्ट किया कि वह कोई फंड नहीं जमा कर रहा। सदस्यता ड्राइव वेबसाइट के जरिए चलाई जा रही है और छात्रों, युवा पेशेवरों तथा कामगारों को शामिल होने का आह्वान किया गया है। किसी भी व्यक्ति को नकदी भेजने से सावधान रहने की सलाह दी गई है।

दबाव समूह बने रहने का फैसला
CJP के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या यह राजनीतिक दल बनेगा। कई लोगों ने इसकी तुलना अन्ना हजारे आंदोलन और आम आदमी पार्टी के उदय से की। लेकिन दीपके और टीम ने साफ कहा कि फिलहाल भारत को एक और राजनीतिक पार्टी की नहीं, बल्कि मजबूत जन दबाव समूह की जरूरत है। सौरव दास ने कहा कि ऊर्जा को चुनावी राजनीति में खर्च करने के बजाय जमीनी स्तर पर काम करना ज्यादा उपयोगी है। जागरूकता वहीं पैदा होती है।
यह फैसला रणनीतिक लगता है। चुनावी राजनीति में प्रवेश करने से संसाधन, संगठन और कानूनी जटिलताएँ बढ़ती हैं। दबाव समूह के रूप में CJP मुद्दे-आधारित काम जारी रख सकता है, जवाबदेही माँग सकता है और युवा आवाज को मजबूत कर सकता है। दीपके ने पहले भी कहा था कि वे किसी पार्टी से जुड़े नहीं हैं और CJP स्वतंत्र युवा आंदोलन है।
‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान
बैठक के बाद दीपके ने सितंबर से शुरू होने वाले राष्ट्रव्यापी अभियान ‘क्या बोलती पब्लिक’ की घोषणा की। इसका उद्देश्य सीधे नागरिकों से मिलना, उनकी आकांक्षाएँ, अपेक्षाएँ और समस्याएँ सुनना है। दीपके का कहना है कि देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है, फिर भी उनकी चिंताएँ मुख्यधारा की राजनीति में जगह नहीं पातीं। उन्होंने बेरोजगारी का मुद्दा उठाया और दावा किया कि डिग्री लेने के बावजूद बड़ी संख्या में युवा बेरोजगार हैं।
अभियान की पहली प्राथमिकता शिक्षा सुधार होगी। दीपके ने कहा कि शिक्षा महंगी हो गई है। कक्षा एक से ही सालाना फीस एक से दो लाख रुपये तक पहुँच रही है, डोनेशन अलग। मिडिल और लोअर इनकम परिवार कैसे खर्च उठाएँ? कॉलेज और कोचिंग फीस परिवारों को कर्ज में डाल रही है। CJP शिक्षा को सस्ती और सुलभ बनाने पर जोर देगा। बेरोजगारी, सामाजिक न्याय, शासन और संस्थागत जवाबदेही अन्य प्रमुख मुद्दे होंगे।
दीपके ने चुनाव आयोग और न्यायपालिका पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थागत जवाबदेही खतरे में है। अभियान इन मुद्दों पर जन दबाव बनाने का माध्यम बनेगा।
Abhijeet Dipke की पृष्ठभूमि
अभिजीत दीपके का जन्म 29 सितंबर 1995 को महाराष्ट्र के औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजीनगर) में एक दलित परिवार में हुआ। उन्होंने पुणे के तिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ से पत्रकारिता की पढ़ाई की। 2020-2023 के बीच आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम से जुड़े रहे। बाद में बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स किया। उन्होंने खुद बताया कि यूनिवर्सिटी की क्लासेस से विजुअल कंसिस्टेंसी, क्लियर विजन और मिशन स्टेटमेंट जैसे सबक मिले, जिन्होंने CJP कैंपेन को आकार दिया। कॉकरोच का प्रतीक भी उसी सोच का हिस्सा था।
दीपके ने AI का इस्तेमाल भी स्वीकार किया, लेकिन कहा कि राजनीतिक प्रासंगिकता समझने का काम मनुष्य ही कर सकता है। उनके परिवार ने शुरुआती दिनों में धमकियों का सामना किया। माता-पिता ने कहा कि वे राजनीति में नहीं जाएँगे, लेकिन अब बेटा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है।
आंदोलन की सफलता और आगे की चुनौतियाँ
जंतर मंतर आंदोलन ने दिखाया कि संगठित और निरंतर दबाव सरकार को झुका सकता है। प्रधान के इस्तीफे को कई लोगों ने युवा शक्ति की जीत माना। दीपके ने कहा कि लोगों में डर टूटा है। अब वे सड़क पर आकर जवाबदेही माँगने से नहीं हिचकते।
लेकिन चुनौतियाँ बाकी हैं। आंदोलन के बाद कई राज्यों में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के आरोप लगे। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन का CJP समर्थन कर रहा है। टीम वहाँ जाने की योजना बना रही है। कानूनी मामलों, फंडिंग पारदर्शिता, आंतरिक लोकतंत्र और लंबे समय तक गति बनाए रखना अहम होंगे।
CJP ने मेंटर के रूप में सोनम वांगचुक का जिक्र भी किया है। संगठन महत्वपूर्ण फैसलों पर उनसे सलाह लेगा।
युवा राजनीति में इसका मतलब
CJP का उदय पारंपरिक राजनीतिक दलों की युवा पहुँच की कमी को उजागर करता है। सोशल मीडिया ने युवाओं को संगठित करने का नया माध्यम दिया। व्यंग्य से शुरू होकर मुद्दे-आधारित आंदोलन बनने की यह कहानी उल्लेखनीय है। राष्ट्रीय कार्यसमिति और दबाव समूह का मॉडल इसे टिकाऊ बनाने की कोशिश है।
अगले छह महीने संगठनात्मक विस्तार के होंगे। राज्य और शहर स्तर की इकाइयाँ, सदस्यता अभियान और ‘क्या बोलती पब्लिक’ के जरिए जमीनी संपर्क – ये सब CJP के अगले चरण को तय करेंगे। दीपके बार-बार कहते हैं कि यह सिर्फ शुरुआत है। युवा आकांक्षाएँ, शिक्षा, रोजगार और जवाबदेही जैसे मुद्दे लंबे समय तक चर्चा में रहेंगे।
CJP की यह घोषणा भारतीय लोकतंत्र में नागरिक दबाव और युवा भागीदारी की नई संभावनाओं की ओर इशारा करती है। अभिजीत दीपके राष्ट्रीय संयोजक के रूप में अब इस प्रक्रिया का चेहरा हैं, लेकिन टीम के अनुसार नेतृत्व सामूहिक है। आगे का रास्ता इस बात पर निर्भर करेगा कि संगठन कितनी पारदर्शिता, समावेशिता और मुद्दे-केंद्रित काम जारी रख पाता है।


















